कानपुर। उत्तर प्रदेश के औद्योगिक और सांस्कृतिक केंद्र कानपुर सहित पूरे उत्तर भारत के लिए मार्च 2026 का महीना आध्यात्मिक चेतना और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से एक ऐतिहासिक कालखंड होने जा रहा है। वसंत ऋतु की विदाई और ग्रीष्म के आगमन के बीच, यह माह न केवल रंगों के उत्सव होली का गवाह बनेगा, बल्कि हिंदू नव वर्ष (विक्रम संवत 2083) और चैत्र नवरात्रि के साथ एक नई ऊर्जा का संचार भी करेगा।
ज्योतिषविदों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, मार्च 2026 के ये त्योहार केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं हैं, बल्कि बदलते मौसम में शरीर को अनुकूलित करने की एक प्राचीन ‘बायोलॉजिकल इंजीनियरिंग’ भी हैं।
1. होली 2026: बुराई पर अच्छाई और संक्रमण पर विजय
रंगों का महापर्व होली इस वर्ष मार्च के प्रथम सप्ताह में ही दस्तक दे देगा। कानपुर के गंगा मेला की ऐतिहासिक परंपरा के साथ यह उत्सव और भी खास हो जाता है।
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होलिका दहन (छोटी होली): 3 मार्च 2026 (मंगलवार)
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शुभ मुहूर्त: शाम 06:22 बजे से रात 08:50 बजे तक।
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धुलंडी (रंगों की होली): 4 मार्च 2026 (बुधवार)
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कानपुर का विशेष गंगा मेला: 10 मार्च 2026
वैज्ञानिक और पर्यावरणीय दृष्टिकोण:
शीत ऋतु की समाप्ति और वसंत के संधिकाल में वातावरण में नमी और तापमान का संतुलन बिगड़ता है, जिससे बैक्टीरिया और वायरस सक्रिय हो जाते हैं।
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थर्मल क्लीनिंग: होलिका दहन की अग्नि से उठने वाला ताप (Heat) स्थानीय परिवेश के सूक्ष्मजीवों को नष्ट करता है।
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रंग चिकित्सा (Chromotherapy): प्राकृतिक रंगों (जैसे हल्दी, टेसू के फूल) का उपयोग त्वचा के रोगों को दूर करता है और मानसिक तनाव को कम कर शरीर में एंडोर्फिन का संचार करता है।
2. हिंदू नव वर्ष एवं चैत्र नवरात्रि: विक्रम संवत 2083 का उदय
19 मार्च 2026 से भारतीय काल गणना के अनुसार नए साल की शुरुआत होगी। कानपुर के सिद्धपीठों (जैसे बारादेवी, जंगली देवी और तपेश्वरी देवी मंदिर) में इस दौरान भक्तों का भारी रेला उमड़ने की संभावना है।
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नव वर्ष प्रारंभ (गुड़ी पड़वा/उगादि): 19 मार्च 2026 (गुरुवार)
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घटस्थापना मुहूर्त: सुबह 06:52 बजे से 07:43 बजे तक।
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अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:05 बजे से 12:53 बजे तक।
उपवास का विज्ञान (The Science of Fasting):
नवरात्रि के नौ दिनों का उपवास ‘इंटरमिटेंट फास्टिंग’ का प्राचीन रूप है।
“जब मौसम बदलता है, तो हमारी जठराग्नि (Digestive Fire) मंद हो जाती है। कुट्टू, सिंघाड़ा और साबूदाना जैसे हल्के भोजन शरीर को डिटॉक्स (Detoxify) करते हैं और बदलते मौसम के प्रति इम्यूनिटी (प्रतिरोधक क्षमता) को सुदृढ़ करते हैं।”
3. राम नवमी 2026: अनुशासन और आत्मबल का महापर्व
मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम का जन्मोत्सव मार्च के अंतिम सप्ताह में एक विशेष खगोलीय घटना के साथ मनाया जाएगा।
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राम नवमी तिथि: 26 मार्च 2026 (गुरुवार)
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मध्याह्न पूजा समय: सुबह 11:13 बजे से दोपहर 01:41 बजे तक।
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राम जन्म का मुख्य क्षण: दोपहर 12:27 बजे।
खगोलीय और मानसिक महत्व:
इस समय सूर्य अपनी उच्च राशि की ओर अग्रसर होता है, जिससे प्रकृति में ‘अग्नि तत्व’ बढ़ता है। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, राम नवमी के दौरान किए जाने वाले जप और ध्यान व्यक्ति के ‘विल पावर’ (संकल्प शक्ति) को बढ़ाते हैं। यह समय शैक्षणिक और व्यावसायिक लक्ष्यों के निर्धारण के लिए ज्योतिषीय रूप से अत्यंत फलदायी माना जाता है।
4. मार्च 2026 के अन्य महत्वपूर्ण व्रत एवं त्यौहार (कैलेंडर)
मार्च का पूरा महीना ही आध्यात्मिक गतिविधियों से भरा रहेगा:
| त्यौहार / व्रत | तिथि | धार्मिक महत्व |
| रंग पंचमी | 8 मार्च 2026 | देवताओं की होली, सकारात्मक ऊर्जा का संचार |
| शीतला अष्टमी | 11 मार्च 2026 | बासोड़ा उत्सव, चेचक जैसे रोगों से सुरक्षा का प्रतीक |
| पापमोचिनी एकादशी | 15 मार्च 2026 | मन की शुद्धि और पश्चाताप का व्रत |
| गुड़ी पड़वा | 19 मार्च 2026 | नए व्यापार और कार्यों की शुरुआत के लिए सर्वश्रेष्ठ |
| महावीर जयंती | 31 मार्च 2026 | अहिंसा और सत्य का संदेश |
कानपुर के लिए संदेश
मार्च 2026 का यह महीना धार्मिक उल्लास के साथ-साथ स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहने का भी समय है। कानपुर जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्र में इन त्योहारों का वैज्ञानिक अनुपालन (जैसे हर्बल रंगों का प्रयोग और संतुलित खान-पान) हमें न केवल मानसिक शांति देगा, बल्कि शारीरिक रूप से भी आने वाली गर्मियों के लिए तैयार करेगा।
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