गांधीनगर | मंगलवार, 24 मार्च 2026
गुजरात सरकार ने मंगलवार को विधानसभा में ऐतिहासिक ‘गुजरात समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक, 2026’ पेश कर दिया है। उत्तराखंड के बाद गुजरात देश का दूसरा ऐसा राज्य बनने जा रहा है, जहाँ सभी धर्मों के लिए विवाह, तलाक और संपत्ति के समान नियम लागू होंगे। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल द्वारा पेश किए गए इस 209 पन्नों के विधेयक में महिलाओं के अधिकारों और आधुनिक सामाजिक व्यवस्थाओं (जैसे लिव-इन) को लेकर कड़े प्रावधान किए गए हैं।
1. लिव-इन रिलेशनशिप: रजिस्ट्रेशन अनिवार्य, छिपाया तो जेल
विधेयक का सबसे चर्चित हिस्सा ‘लिव-इन रिलेशनशिप’ से जुड़ा है। अब गुजरात में साथ रहने वाले जोड़ों को एक महीने के भीतर जिला रजिस्ट्रार के पास अपना पंजीकरण कराना होगा।
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सजा का प्रावधान: अगर कोई जोड़ा रजिस्ट्रेशन नहीं कराता है, तो उन्हें 3 महीने तक की जेल या 10,000 रुपये तक का जुर्माना (या दोनों) हो सकता है।
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माता-पिता को सूचना: यदि लिव-इन में रहने वाले पार्टनर की उम्र 21 वर्ष से कम है, तो रजिस्ट्रार इसकी सूचना उनके माता-पिता या अभिभावकों को देगा।
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बच्चों को हक: लिव-इन से पैदा हुए बच्चों को कानूनी तौर पर ‘वैध’ माना जाएगा और उन्हें संपत्ति में पूरा अधिकार मिलेगा।
2. संपत्ति बंटवारा: वसीयत न होने पर सबको समान हिस्सा
संपत्ति के उत्तराधिकार नियमों में क्रांतिकारी बदलाव किया गया है। यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु बिना वसीयत (Intestate) बनाए हो जाती है, तो उसकी संपत्ति:
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पति/पत्नी, बच्चों और माता-पिता के बीच बराबर हिस्सों में बांटी जाएगी।
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इसमें बेटे और बेटी के बीच कोई भेदभाव नहीं होगा; बेटियों को पैतृक संपत्ति में पूर्ण अधिकार सुनिश्चित किया गया है।
3. विवाह और तलाक: केवल कोर्ट के जरिए ही संभव
विधेयक में स्पष्ट किया गया है कि अब कोई भी विवाह या तलाक केवल धार्मिक रीति-रिवाजों तक सीमित नहीं रहेगा।
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अनिवार्य रजिस्ट्रेशन: शादी के 60 दिनों के भीतर पंजीकरण कराना होगा। हालांकि, रजिस्ट्रेशन न होने पर शादी अवैध नहीं होगी, लेकिन भारी जुर्माना लगेगा।
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हलाला और इद्दत पर रोक: बिना अदालती प्रक्रिया के दिए गए तलाक मान्य नहीं होंगे। यह प्रथाओं जैसे ‘हलाला’ को अप्रत्यक्ष रूप से समाप्त करता है क्योंकि तलाक के बाद दोबारा उसी साथी से शादी के लिए किसी तीसरे व्यक्ति से विवाह की शर्त को खत्म कर दिया गया है।
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बहुविवाह (Polygamy) पर प्रतिबंध: अब एक जीवित जीवनसाथी के रहते दूसरी शादी करना पूरी तरह प्रतिबंधित होगा।
4. अनुसूचित जनजातियों (ST) को छूट
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह कानून राज्य की अनुसूचित जनजातियों (Scheduled Tribes) पर लागू नहीं होगा। उनके पारंपरिक और संवैधानिक अधिकारों को बरकरार रखा गया है।
5. आयु सीमा और अन्य शर्तें
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शादी के लिए पुरुषों की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और महिलाओं की 18 वर्ष तय की गई है।
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शादी के एक साल के भीतर तलाक की अर्जी दाखिल करने पर रोक लगाई गई है (विशेष परिस्थितियों को छोड़कर)।
क्यों है यह ‘स्वर्णिम दिन’?
गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी ने इसे “बेटियों और बहनों के सम्मान का दिन” बताया है। सरकार का मानना है कि व्यक्तिगत कानूनों की जटिलता के कारण जो महिलाएं दशकों से प्रताड़ित थीं, उन्हें अब कानून के समान संरक्षण से न्याय मिलेगा। विपक्षी दलों और कुछ समुदायों द्वारा इसका विरोध भी देखा जा रहा है, लेकिन बहुमत के साथ इस विधेयक के जल्द ही कानून बनने की उम्मीद है।
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