
कानपुर | शनिवार, 24 जुलाई 2026
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वैचारिक संगठन भारतीय मजदूर संघ (BMS) के 72वें स्थापना दिवस के अवसर पर कानपुर के केशव नगर स्थित ‘कविताई भवन’ में एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए विभाग संघचालक डॉ. श्यामबाबू गुप्ता ने संगठन के मूल सिद्धांतों, वैचारिक मजबूती और इसकी कार्यपद्धति पर प्रकाश डाला।
श्यामबाबू गुप्ता ने कहा कि संघ और उसके अनुषांगिक संगठनों में कभी विघटन नहीं हुआ, जबकि कम्युनिस्टों या अन्य वैचारिक समूहों में समय-समय पर बिखराव देखने को मिला है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी बड़े संगठन में विचारों का अंतर होना स्वाभाविक है, लेकिन लक्ष्य एक ही होता है—”मतभेदता हो सकती है, किन्तु मनभिन्नता नहीं।”
1.82 करोड़ सदस्यों के साथ विश्व का सबसे बड़ा मजदूर संगठन
गोष्ठी में बीएमएस के 80 वर्षीय पूर्व राष्ट्रीय मंत्री सुखदेव मिश्रा ने संगठन के सात दशकों के सफर की यात्रा का विस्तृत उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि वर्तमान में भारतीय मजदूर संघ की सदस्य संख्या 1 करोड़ 72 लाख (पौने दो करोड़) से अधिक है। इसी सदस्यता बल के कारण बीएमएस आज दुनिया का सबसे बड़ा श्रमिक संगठन है।
श्यामबाबू गुप्ता ने आगे कहा कि सिर्फ मजदूर क्षेत्र ही नहीं, बल्कि:
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विद्यार्थी क्षेत्र: अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) विश्व का सबसे बड़ा छात्र संगठन है।
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राजनीतिक क्षेत्र: भारतीय जनता पार्टी (BJP) विश्व का सबसे बड़ा राजनीतिक दल है।
‘मतभेदता है, मनभिन्नता नहीं’ — पारिवारिक उदाहरण से समझें
संगठनात्मक तालमेल को समझाते हुए श्यामबाबू गुप्ता ने एक लोक-उदाहरण दिया:
“जब किसी कन्या के लिए वर (दूल्हा) की तलाश की जाती है, तो कन्या रूपवान वर चाहती है, माता सोचती है कि उसकी कमाई अच्छी हो, पिता ज्ञानी वर चाहता है और रिश्तेदार अच्छे कुल की चिंता करते हैं। विवाह में आने वाले मेहमानों को अच्छे भोजन की फिक्र होती है। सभी की राय (मत) अलग है, लेकिन सभी का भाव (मन) एक ही है—कन्या सुखी रहे। ठीक इसी तरह बीएमएस में मतभेद भले हों, मनभिन्नता कभी नहीं होती।”
कम्युनिस्ट बनाम बीएमएस: विचारों का बुनियादी अंतर
श्यामबाबू गुप्ता ने कम्युनिस्ट विचारधारा और बीएमएस के भारतीय दर्शन की तुलना करते हुए मुख्य अंतर रेखांकित किया:
| विचारधारा | मूल नारा / संकल्प | दर्शन |
| कम्युनिस्ट | “कमाने वाला खाएगा” | वर्ग संघर्ष आधारित |
| भारतीय मजदूर संघ (BMS) | “कमाने वाला खिलाएगा, जो जन्मा है वह खाएगा” | एकात्म मानववाद व एकात्म परिवार |
उन्होंने याद दिलाया कि 23 जुलाई 1955 को महान विचारक दत्तोपंत ठेंगड़ी ने बीएमएस की स्थापना करते समय “भारत माता की जय” और “देशहित में करेंगे काम, काम का लेंगे पूरा दाम” जैसे राष्ट्रवादी नारे दिए थे।
“कार्य की नहीं, कार्यकर्ता की चिंता करो”
संभाग के संगठन मंत्री श्रीकांत अवस्थी ने दत्तोपंत ठेंगड़ी जी के ध्येय वाक्य को याद करते हुए कहा कि बीएमएस की सबसे बड़ी ताकत उसकी पारिवारिक भावना है। ठेंगड़ी जी हमेशा कहते थे—“कार्य की नहीं, कार्यकर्ता की चिंता करो।” इसी अपनेपन के कारण संगठन आज इस ऊंचाई पर पहुंचा है।
गोष्ठी में वक्ताओं ने यह भी कहा कि पहले की सरकारें केवल ‘रोटी, कपड़ा और मकान’ तक सीमित थीं, जबकि वर्तमान सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा जैसे विषयों पर काम करते हुए समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक कल्याणकारी योजनाएं पहुंचा रही है।

कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख जन
इस गोष्ठी की अध्यक्षता अनमोल शुक्ला ने की तथा संचालन जिला मंत्री दीपक शुक्ला ने किया। मंच से प्रदेश अध्यक्ष अनिल उपाध्याय, प्रदेश उपाध्यक्ष सुरेश यादव, बैंक यूनियन के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रबल प्रताप सिंह, युवा प्रवक्ता योगेंद्र सिंह चौहान और अरुण मिश्रा ने भी संबोधित किया।
कार्यक्रम में जिलाध्यक्ष दीप्ति उत्तम, साधू सिंह यादव, ओ.पी. त्रिपाठी, फिरोज आलम, सुधीर शुक्ला, सुधाकर तिवारी, कुंदन सिंह, योगेंद्र सचान, अतुल शुक्ला, शैलेंद्र सिंह, अजीत अवस्थी, रजनीकांत सहित कई कार्यकर्ता उपस्थित रहे। कवि ओम प्रकाश शुक्ला ने बीएमएस की जय पर कविता पाठ कर समां बांध दिया।
FAQs (Frequently Asked Questions)
Q1. भारतीय मजदूर संघ (BMS) की स्थापना कब और किसने की थी?
उत्तर: भारतीय मजदूर संघ की स्थापना 23 जुलाई 1955 को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक और विचारक दत्तोपंत ठेंगड़ी जी ने की थी।
Q2. वर्तमान में भारतीय मजदूर संघ के कुल कितने सदस्य हैं?
उत्तर: वर्तमान में भारतीय मजदूर संघ के 1 करोड़ 72 लाख (पौने दो करोड़) से अधिक पंजीकृत सदस्य हैं, जो इसे दुनिया का सबसे बड़ा मजदूर संगठन बनाता है।
Q3. बीएमएस के प्रमुख नारे क्या हैं?
उत्तर: बीएमएस के मुख्य नारे हैं—”भारत माता की जय”, “देशहित में करेंगे काम, काम का लेंगे पूरा दाम” तथा “कमाने वाला खिलाएगा, जो जन्मा है वह खाएगा।”
अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख कानपुर में आयोजित भारतीय मजदूर संघ के 72वें स्थापना दिवस कार्यक्रम की प्रेस विज्ञप्ति एवं स्थानीय समाचार रिपोर्ट पर आधारित है। इसमें व्यक्त विचार वक्ताओं के निजी एवं संगठनात्मक दृष्टिकोण हैं।
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