मंगलवार, जुलाई 28 2026 | 07:01:47 PM
Breaking News
Home / राष्ट्रीय / NEET-UG पेपर लीक पर केंद्र सरकार का बड़ा प्रहार: सार्वजनिक परीक्षा कानून में संशोधन को मंजूरी, 10 साल की सज़ा और ₹10 करोड़ जुर्माने का प्रावधान

NEET-UG पेपर लीक पर केंद्र सरकार का बड़ा प्रहार: सार्वजनिक परीक्षा कानून में संशोधन को मंजूरी, 10 साल की सज़ा और ₹10 करोड़ जुर्माने का प्रावधान

Follow us on:

केंद्रीय कैबिनेट द्वारा स्वीकृत एंटी-पेपर लीक संशोधन विधेयक के तहत 10 वर्ष की सज़ा और ₹10 करोड़ जुर्माने का पोस्टर।

नई दिल्ली | शुक्रवार, 24 जुलाई 2026

केंद्र सरकार देश में आयोजित होने वाली विभिन्न सार्वजनिक एवं प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता बहाल करने के लिए सख्त कानूनी कदम उठाने जा रही है। हाल के समय में NEET-UG जैसी बड़ी परीक्षाओं में सामने आई पेपर लीक और संगठित गिरोहों द्वारा की जाने वाली धोखाधड़ी की घटनाओं को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सार्वजनिक परीक्षाएं (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 में संशोधन के प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी है।

इस संशोधन विधेयक को आगामी संसद सत्र में पेश किया जाएगा, जिसका मुख्य उद्देश्य देश के लाखों युवाओं और छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करना है।

⚖️ नए संशोधनों में क्या है खास? प्रमुख प्रावधान

कैबिनेट द्वारा मंजूर किए गए नए कानूनी ढाँचे के तहत परीक्षा प्रणाली में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप करने वाले असामाजिक तत्वों और संगठित माफियाओं पर नकेल कसने की तैयारी है:

  1. कठोरतम सज़ा का प्रावधान: पेपर लीक, प्रश्नपत्र तक अवैध पहुँच, परीक्षा प्रणाली से छेड़छाड़ और फर्जीवाड़े (Impersonation) के दोषी पाए जाने पर 10 वर्ष तक की सख्त कैद और ₹10 करोड़ तक का भारी जुर्माना लगाया जा सकेगा।

  2. संगठित गिरोहों व कोचिंग संस्थानों पर गाज: यदि किसी कोचिंग सेंटर, सॉल्वर गैंग या किसी निजी संस्था की संलिप्तता पाई जाती है, तो उनके खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई होगी। आवश्यकता पड़ने पर अपराध से अर्जित संपत्तियों को ज़ब्त करने का अधिकार भी दिया जा रहा है।

  3. फास्ट-ट्रैक अदालतों की स्थापना: ऐसे मामलों का त्वरित और समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित करने के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट्स गठित करने का विचार है, ताकि दोषियों को शीघ्र सज़ा मिल सके।

  4. व्यापक दायरा: यह संशोधित कानून NEET-UG, JEE, CUET सहित केंद्र सरकार और केंद्रीय एजेंसियों (जैसे NTA, UPSC, SSC) द्वारा आयोजित की जाने वाली सभी प्रमुख परीक्षाओं पर प्रभावी रूप से लागू होगा।

🏛️ सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख: साल भर होगी परीक्षा सुधारों की निगरानी

सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले में स्वतः संज्ञान और याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) को स्पष्ट निर्देश दिए हैं। सर्वोच्च अदालत ने सरकार से परीक्षा सुधारों की प्रगति रिपोर्ट मांगी है और स्पष्ट किया है कि सुधार के उपायों के क्रियान्वयन की निगरानी पूरे वर्ष की जाएगी।

“प्रतियोगी परीक्षा प्रणाली में छात्रों का विश्वास पुनः स्थापित करने के लिए ठोस और निरंतर प्रयासों की आवश्यकता है। केवल नियम बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका धरातल पर कड़ाई से पालन होना अनिवार्य है।”

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

📊 मुख्य बिंदुओं की संक्षेप तालिका

विषय / पहलू विवरण
प्रस्तावित विधेयक सार्वजनिक परीक्षाएं (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक
अधिकतम सज़ा 10 वर्ष तक का कारावास
अधिकतम जुर्माना ₹10 करोड़ तक का आर्थिक दंड
अन्य कड़े कदम आरोपियों की संपत्ति ज़ब्ती, कोचिंग संस्थानों पर कार्रवाई, फास्ट-ट्रैक कोर्ट्स
प्रभावित परीक्षाएँ NEET, JEE, CUET, UPSC, SSC एवं अन्य केंद्रीय परीक्षाएँ

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम कब पहली बार लागू हुआ था?

उत्तर: यह मूल अधिनियम वर्ष 2024 में अस्तित्व में आया था, जिसमें अब 2026 में NEET-UG प्रकरण के बाद और अधिक कड़े संशोधन किए जा रहे हैं।

Q2. क्या यह कानून राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं पर भी लागू होता है?

उत्तर: मूल रूप से यह कानून केंद्रीय सार्वजनिक परीक्षाओं (NTA, UPSC, SSC, Railways आदि) के लिए है, परंतु कई राज्य सरकारें भी अपने स्तर पर इसी मॉडल के आधार पर एंटी-पेपर लीक कानून अपना रही हैं।

Q3. यदि कोई कोचिंग संस्थान पेपर लीक में शामिल पाया जाता है तो क्या होगा?

उत्तर: नए प्रावधानों के तहत आरोपी कोचिंग संस्थानों की मान्यता रद्द करने के साथ-साथ उनकी संपत्तियों को ज़ब्त करने और भारी वित्तीय जुर्माना लगाने का अधिकार होगा।

⚠️ अस्वीकरण (Disclaimer)

यह समाचार लेख मातृभूमि समाचार ब्यूरो द्वारा जारी प्राथमिक सरकारी सूत्रों, कैबिनेट निर्णयों एवं सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाहियों पर आधारित है। प्रस्तावित विधेयक के अंतिम प्रावधान संसद में पारित होने और राजपत्र (Gazette Notification) में प्रकाशित होने के पश्चात पूर्ण रूप से प्रभावी होंगे।

मित्रों,
मातृभूमि समाचार का उद्देश्य मीडिया जगत का ऐसा उपकरण बनाना है, जिसके माध्यम से हम व्यवसायिक मीडिया जगत और पत्रकारिता के सिद्धांतों में समन्वय स्थापित कर सकें। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए हमें आपका सहयोग चाहिए है। कृपया इस हेतु हमें दान देकर सहयोग प्रदान करने की कृपा करें। हमें दान करने के लिए निम्न लिंक पर क्लिक करें -- Click Here


* 1 माह के लिए Rs 1000.00 / 1 वर्ष के लिए Rs 10,000.00

Contact us

Check Also

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद कॉकरोच जनता पार्टी का आंदोलन स्थगित, जानिए क्या रहीं प्रमुख मांगें

नई दिल्ली । शनिवार, 25 जुलाई 2026 नई दिल्ली: देश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार …