नई दिल्ली | शुक्रवार, 24 जुलाई 2026
प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता, शिक्षाविद और पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक ने देश भर में चर्चित नीट-यूजी (NEET-UG) पेपर लीक मामले और परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधारों की मांग को लेकर चल रहे अपने 26 दिन लंबे अनशन को समाप्त कर दिया है। गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह की उपस्थिति में उन्होंने जूस पीकर अपना अनशन तोड़ दिया।
अनशन समाप्त करते हुए सोनम वांगचुक ने स्पष्ट शब्दों में कहा:
“यह अनशन का अंत है, लेकिन व्यवस्था में जवाबदेही की एक नई शुरुआत है।”
26 दिनों के आंदोलन का घटनाक्रम और सरकार का लिखित आश्वासन
सोनम वांगचुक का यह अनिश्चितकालीन अनशन 28 जून से शुरू हुआ था। वह छात्रों के आंदोलन के समर्थन में जंतर-मंतर पर बैठे थे। आंदोलन के दौरान उनका वजन लगभग 11 किलोग्राम गिर गया था और स्वास्थ्य बिगड़ने के कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था।
सरकार और आंदोलनकारियों के बीच लगातार चली गहन वार्ता के बाद केंद्र सरकार ने कुछ महत्वपूर्ण लिखित आश्वासन दिए हैं:
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संसद में गंभीर चर्चा: नीट पेपर लीक, परीक्षा प्रणाली की खामियों और व्यापक शिक्षा सुधारों पर आगामी संसद सत्र में विस्तृत चर्चा की जाएगी।
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प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई नहीं: शांतिपूर्ण तरीके से विरोध जताने वाले छात्रों और 20 जुलाई के ‘संसद मार्च’ में शामिल युवाओं के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी।
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पीड़ित परिवारों को राहत: पेपर लीक विवाद के कारण मानसिक तनाव में आकर आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने पर सरकार सकारात्मक रूप से विचार कर रही है।
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कड़े कानून का प्रस्ताव: पेपर लीक रोकने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई के लिए नया विधेयक संसद में लाने की घोषणा की गई है।
“आंदोलन हिंसक न हो, इसलिए लिया निर्णय”
वांगचुक ने एक वीडियो संदेश जारी कर अपने समर्थकों का आभार व्यक्त किया और बताया कि विभिन्न राजनीतिक दलों के लगभग 65 सांसदों ने उनसे अनशन समाप्त करने की अपील की थी। उन्होंने कहा कि देश में तनाव बढ़ने और कुछ असमाजिक तत्वों द्वारा शांतिपूर्ण आंदोलन को हिंसक रूप देने की आशंका को देखते हुए उन्होंने अनशन समाप्त करने का फैसला किया।
उन्होंने देश के युवाओं और छात्रों से अपील की:
“हमारा रास्ता केवल शांति, अहिंसा और लोकतांत्रिक प्रक्रिया का है। सामने से चाहे जो भी परिस्थिति हो, हमारा उत्तर केवल संयम और अहिंसा होना चाहिए।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सोनम वांगचुक के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की और उन्हें डॉक्टरों की सलाह मानकर पुरानी दिनचर्या में लौटने का आग्रह किया।
आंदोलन का अगला चरण
हालांकि सोनम वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त कर दिया है, लेकिन छात्र संगठनों और सहयोगी संस्थाओं ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मूल मांगों पर ठोस कार्यान्वयन नहीं होता, तब तक उनका लोकतांत्रिक अभियान जारी रहेगा। आंदोलनकारियों का मुख्य उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष का विरोध करना नहीं, बल्कि देश की परीक्षा प्रणाली में शत-प्रतिशत पारदर्शिता और छात्रों के उज्ज्वल भविष्य की गारंटी सुनिश्चित करना है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. सोनम वांगचुक ने कितने दिनों का अनशन किया और यह कब शुरू हुआ था?
सोनम वांगचुक ने कुल 26 दिनों का अनशन किया, जिसकी शुरुआत 28 जून को हुई थी।
Q2. सोनम वांगचुक के अनशन की मुख्य मांगें क्या थीं?
उनकी मुख्य मांगें नीट (NEET) परीक्षा में हुए कथित पेपर लीक की जांच, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, कठोर भ्रष्टाचार-विरोधी कानून और छात्रों के हित में शिक्षा सुधार लागू करना थीं।
Q3. सरकार ने अनशन समाप्त कराने के लिए क्या आश्वासन दिए हैं?
सरकार ने संसद में पेपर लीक और शिक्षा सुधारों पर चर्चा, शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर कानूनी कार्रवाई न करने तथा प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने जैसे मुद्दों पर लिखित भरोसा दिया है।
अस्वीकरण (Disclaimer)
यह लेख हालिया घटनाक्रमों और आधिकारिक बयानों के आधार पर तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य केवल पाठकों तक निष्पक्ष एवं सटीक सूचना पहुँचाना है।
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