नई दिल्ली. 77वें गणतंत्र दिवस (26 जनवरी, 2026) की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का राष्ट्र के नाम संबोधन केवल एक औपचारिक भाषण नहीं, बल्कि आधुनिक भारत की आकांक्षाओं और उपलब्धियों का एक विस्तृत लेखा-जोखा रहा। उन्होंने अपने संबोधन में ‘विकसित भारत’ के संकल्प को केंद्र में रखते हुए देश के प्रत्येक नागरिक को राष्ट्र निर्माण की इस यात्रा में भागीदार बनने का आह्वान किया।
1. संवैधानिक मूल्यों का संरक्षण और राष्ट्रीय एकता
राष्ट्रपति मुर्मु ने अपने भाषण की शुरुआत भारतीय संविधान की शक्ति और उसकी प्रासंगिकता से की। उन्होंने रेखांकित किया कि हमारा लोकतंत्र केवल एक राजनीतिक व्यवस्था नहीं, बल्कि न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व का एक जीवंत आदर्श है। उन्होंने विशेष रूप से सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने भारत की एकता और अखंडता की नींव रखी थी। साथ ही, ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्षों का उल्लेख करते हुए उन्होंने इसे राष्ट्रीय चेतना का स्वर बताया।
2. आर्थिक प्रगति और ‘एक राष्ट्र’ की अवधारणा
आर्थिक मोर्चे पर भारत की उपलब्धियों को गिनाते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि देश आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक है।
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GST का प्रभाव: उन्होंने GST को एक ऐसा क्रांतिकारी सुधार बताया जिसने ‘एक राष्ट्र, एक बाजार’ के सपने को हकीकत में बदला और व्यापार की सुगमता (Ease of Doing Business) को बढ़ावा दिया।
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गरीबी उन्मूलन: राष्ट्रपति ने इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि करोड़ों लोग गरीबी रेखा से बाहर आए हैं और सरकार की कल्याणकारी योजनाएं यह सुनिश्चित कर रही हैं कि समाज का अंतिम व्यक्ति भी विकास की मुख्यधारा से जुड़े।
3. नारी शक्ति: नेतृत्व और सफलता का नया चेहरा
राष्ट्रपति के संबोधन का एक बड़ा हिस्सा महिला सशक्तिकरण को समर्पित था। उन्होंने गर्व के साथ भारतीय बेटियों की सफलताओं का जिक्र किया:
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खेलों में कीर्तिमान: भारतीय महिला क्रिकेट टीम की विश्व कप जीत और शतरंज (Chess) के क्षेत्र में आर. वैशाली और कोनेरू हम्पी जैसे नामों की उपलब्धियों को उन्होंने नए भारत की पहचान बताया।
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राजनीतिक और आर्थिक नेतृत्व: पंचायतों में 46% महिलाओं की भागीदारी और स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के माध्यम से 10 करोड़ महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबन को उन्होंने सामाजिक परिवर्तन का मुख्य आधार बताया।
4. अन्नदाता और सुरक्षा बल: राष्ट्र के दो मजबूत स्तंभ
राष्ट्रपति ने कृषि और रक्षा क्षेत्र के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जहाँ हमारे किसान ‘अन्नदाता’ बनकर देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित कर रहे हैं, वहीं हमारे सैनिक और पुलिस बल दुर्गम परिस्थितियों में सीमाओं और आंतरिक सुरक्षा की रक्षा कर रहे हैं। उन्होंने आधुनिक तकनीक और स्वदेशी हथियारों के माध्यम से सेना के सुदृढ़ीकरण की भी सराहना की।
5. युवा ऊर्जा और तकनीकी भविष्य
भारत की विशाल युवा आबादी को ‘जनसांख्यिकीय लाभांश’ (Demographic Dividend) बताते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि आज का युवा न केवल नौकरी चाहने वाला है, बल्कि स्टार्टअप्स के माध्यम से नौकरी देने वाला (Job Creator) बन रहा है। उन्होंने विज्ञान, अंतरिक्ष अनुसंधान और डिजिटल इंडिया के क्षेत्र में युवाओं द्वारा किए जा रहे नवाचारों की सराहना की।
6. पर्यावरण और सतत विकास
जलवायु परिवर्तन की वैश्विक चुनौती पर राष्ट्रपति ने कहा कि भारत आज अक्षय ऊर्जा (Renewable Energy) और जैविक खेती के मामले में दुनिया का नेतृत्व कर रहा है। उन्होंने नागरिकों से ‘पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली’ अपनाने का आग्रह किया ताकि आने वाली पीढ़ियों को एक सुरक्षित और हरा-भरा भविष्य मिल सके।
‘विकसित भारत’ की ओर बढ़ते कदम
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का यह संबोधन आत्मविश्वास, समावेशी विकास और राष्ट्रीय गौरव से ओत-प्रोत रहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि 2047 तक ‘विकसित भारत’ का लक्ष्य तभी प्राप्त किया जा सकता है जब देश का हर नागरिक अपने कर्तव्यों का पालन पूरी निष्ठा से करे। उनका संदेश एकता और सामूहिक प्रयास का एक सशक्त आह्वान था।
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