यरुशलम. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दो दिवसीय इजरायल यात्रा ने दोनों देशों के कूटनीतिक इतिहास में एक नया अध्याय लिख दिया है। रक्षा, तकनीक और व्यापार के क्षेत्रों में गहरी होती इस साझेदारी को ‘विशेष रणनीतिक साझेदारी’ के रूप में देखा जा रहा है।
🏛️ नेसेट में गूंजा ‘भारत का संदेश’
इजरायली संसद ‘नेसेट’ को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बनकर पीएम मोदी ने इतिहास रचा। अपने संबोधन में उन्होंने भारत और इजरायल को “दो प्राचीन सभ्यताओं का मिलन” बताया।
“मैं 1.4 बिलियन भारतीयों का अभिवादन और दोस्ती का संदेश लेकर आया हूँ।” — पीएम मोदी
प्रधानमंत्री के स्वागत में नेसेट का माहौल ‘मोदी-मोदी’ के नारों से गूंज उठा और पूरे संसद भवन को तिरंगे के रंगों से रोशन किया गया, जो दोनों देशों के बीच बढ़ती आत्मीयता का प्रतीक है।
🛡️ रक्षा सहयोग: केवल खरीद-बिक्री नहीं, अब ‘सह-उत्पादन’ पर जोर
दौरे का सबसे महत्वपूर्ण पहलू रक्षा संबंधों का विस्तार है। अब भारत और इजरायल केवल रक्षा उपकरणों के लेनदेन तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि निम्नलिखित तीन स्तंभों पर ध्यान केंद्रित करेंगे:
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संयुक्त उत्पादन: ‘मेक इन इंडिया’ के तहत हथियारों का निर्माण।
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तकनीकी हस्तांतरण (ToT): उन्नत सैन्य तकनीक को साझा करना।
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एयर डिफेंस: भारत के ‘सुदर्शन चक्र’ और इजरायल के ‘आयरन डोम’ के बीच संभावित तकनीकी समन्वय पर चर्चा।
📈 आर्थिक और क्षेत्रीय रणनीतियां
आर्थिक मोर्चे पर, दोनों देश फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) और द्विपक्षीय निवेश समझौतों को जल्द अंतिम रूप देने की दिशा में बढ़ रहे हैं। साथ ही, ‘भारत-पश्चिम एशिया-यूरोप आर्थिक गलियारा’ पर बातचीत ने वैश्विक व्यापार जगत का ध्यान खींचा है।
प्रधानमंत्री नेतन्याहू के प्रस्तावित ‘हेक्सागन’ गठबंधन (भारत, अरब, अफ्रीकी और भूमध्यसागरीय राष्ट्र) पर भी चर्चा की संभावना है, जो भारत की वैश्विक भूमिका को और अधिक विस्तार देगा।
✨ प्रतीकात्मकता और सम्मान
इजरायली मीडिया ने इस यात्रा को ‘रिश्तों का नया चरण’ करार दिया है। 2017 की प्रसिद्ध ‘बीच वॉक’ की यादों के साथ-साथ, यरुशलम की सड़कों पर भारतीय झंडों का लहराना यह स्पष्ट करता है कि भारत अब इजरायल का सबसे विश्वसनीय वैश्विक साझेदार बन चुका है।
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