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राशन व्यवस्था में बड़ा बदलाव: अब परिवार नहीं, सदस्यों की संख्या तय करेगी कितना मिलेगा अनाज; सरकार ने मांगा सुझाव

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नई दिल्ली । गुरुवार, 25 जून 2026

देश की सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) और गरीब परिवारों को मिलने वाले राशन की व्यवस्था में केंद्र सरकार एक ऐतिहासिक बदलाव करने जा रही है। खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग ने ‘राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा (संशोधन) विधेयक, 2026’ का मसौदा (ड्राफ्ट) आधिकारिक रूप से जारी कर दिया है। इस नए संशोधन विधेयक के जरिए सरकार देश के सबसे गरीब वर्ग यानी ‘अंत्योदय अन्न योजना’ (AAY) के लाभार्थियों को मिलने वाले अनाज के कोटे की पूरी परिभाषा बदलने की तैयारी में है।

खाद्य मंत्रालय ने इस प्रस्तावित कानून पर आम जनता, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विशेषज्ञों से राय मांगी है। सभी हितधारक 13 जुलाई 2026 तक इस ड्राफ्ट पर अपने सुझाव और आपत्तियां दर्ज करा सकते हैं।

क्या है मौजूदा व्यवस्था और इसमें क्या कमी है?

वर्तमान में लागू राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA), 2013 के नियमों के अनुसार, अंत्योदय अन्न योजना (AAY) के अंतर्गत आने वाले परिवारों को ‘सबसे गरीब’ माना जाता है। इन्हें प्रति परिवार के आधार पर हर महीने फिक्स 35 किलोग्राम अनाज (गेहूं और चावल) मुफ्त दिया जाता है। इस व्यवस्था में परिवार के सदस्यों की संख्या (Family Size) मायने नहीं रखती; चाहे परिवार में 2 लोग हों या 7 लोग, राशन 35 किलो ही मिलता है।

इसके विपरीत, राशन कार्ड की दूसरी श्रेणी यानी ‘प्राथमिकता वाले परिवारों’ (Priority Households – PHH) को प्रति व्यक्ति के हिसाब से हर महीने 5 किलोग्राम अनाज दिया जाता है।

असमानता का मुख्य कारण:

मौजूदा व्यवस्था के चलते एक बड़ा विरोधाभास पैदा हो गया था। उदाहरण के लिए, यदि किसी AAY परिवार में 7 सदस्य हैं, तो 35 किलो के हिसाब से प्रति व्यक्ति केवल 5 किलो अनाज ही मिल पाता था। वहीं कई मामलों में, प्राथमिकता वाले परिवारों (जो AAY की तुलना में थोड़े कम कमजोर हैं) के सदस्यों को बेहतर अनुपात में राशन मिल रहा था। इस ‘इंट्रा-कैटेगरी असमानता’ (Intra-category inequities) को दूर करने के लिए ही यह नया संशोधन लाया गया है।

नए नियम के तहत क्या है नया प्रस्ताव?

प्रस्तावित ‘राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा (संशोधन) विधेयक, 2026’ के मुताबिक, अब राशन का निर्धारण ‘प्रति परिवार’ के बजाय ‘प्रति व्यक्ति’ (Per Capita) के आधार पर किया जाएगा।

  • प्रति व्यक्ति 7 किलो अनाज: नए नियमों के लागू होने के बाद AAY परिवार के प्रत्येक सदस्य को हर महीने 7 किलोग्राम अनाज दिया जाएगा।

  • अधिकतम 35 किलो की कैपिंग: सरकार ने साफ किया है कि प्रति परिवार मिलने वाले राशन की अधिकतम सीमा 35 किलोग्राम प्रति माह ही रहेगी। इसका मतलब है कि सदस्यों की संख्या के आधार पर राशन बढ़ेगा तो सही, लेकिन वह 35 किलो की ऊपरी सीमा को पार नहीं करेगा।

इसे हम इस प्रकार आसानी से समझ सकते हैं:

परिवार में सदस्यों की संख्या मौजूदा राशन कोटा (प्रति परिवार) प्रस्तावित नया राशन कोटा (प्रति व्यक्ति 7 किलो)
2 सदस्य 35 किलोग्राम 14 किलोग्राम
3 सदस्य 35 किलोग्राम 21 किलोग्राम
4 सदस्य 35 किलोग्राम 28 किलोग्राम
5 या अधिक सदस्य 35 किलोग्राम 35 किलोग्राम (अधिकतम सीमा के तहत)

किन्हें मिलेगा इस बदलाव का सीधा फायदा?

सरकार के इस कदम का सबसे बड़ा लाभ बड़े और अत्यधिक गरीब परिवारों को मिलेगा। अब राशन का आवंटन पूरी तरह से परिवार की पोषण संबंधी आवश्यकताओं और आकार के अनुकूल हो सकेगा।

खाद्य मंत्रालय के अनुसार, छोटे परिवारों के लिए मात्रा भले ही कुछ कम या संतुलित हो जाए, लेकिन इससे अनाज की बर्बादी रुकेगी और लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (TPDS) में पारदर्शिता और न्यायसंगत बंटवारा सुनिश्चित हो सकेगा। वर्तमान में, दोनों ही श्रेणियों (AAY और PHH) को केंद्र सरकार द्वारा पूरी तरह से मुफ्त अनाज दिया जा रहा है, और सरकारी गोदामों में खाद्यान्न का पर्याप्त बफर स्टॉक मौजूद है।

‘मानव जीवन चक्र दृष्टिकोण’ पर केंद्रित है यह कदम

सरकार ने इस संशोधन को ‘मानव जीवन चक्र दृष्टिकोण’ (Human Life Cycle Approach) के एक हिस्से के रूप में पेश किया है। इसका मूल उद्देश्य समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक किफायती कीमत पर अच्छी गुणवत्ता वाला और पर्याप्त मात्रा में भोजन उपलब्ध कराना है, ताकि देश से कुपोषण की समस्या को खत्म किया जा सके। 13 जुलाई 2026 को जनता से सुझाव मिलने के बाद, प्राप्त प्रतिक्रियाओं की समीक्षा की जाएगी और आवश्यक सुधारों के साथ इस विधेयक को संसद में पारित कराने के लिए आगे बढ़ाया जाएगा।

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