नई दिल्ली । शनिवार, 25 जुलाई 2026
सरकारी नौकरी और राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी कर रहे देश के लाखों युवाओं के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। दिल्ली में लगातार पेपर लीक, डमी कैंडिडेट और परीक्षा हॉल में होने वाली धांधली जैसी शिकायतों पर अंकुश लगाने के लिए दिल्ली पुलिस ने एक बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है।
पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार की औपचारिक मंजूरी के बाद, दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा (क्राइम ब्रांच) के तहत एक स्पेशल टास्क फोर्स (STF) का गठन किया गया है। यह टास्क फोर्स केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए नए कानून—पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट-2024 (Public Examinations Act, 2024)—के तहत काम करेगी।
क्या है इस एसटीएफ (STF) का मुख्य उद्देश्य?
दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता राजीव रंजन के अनुसार, एसटीएफ का मुख्य लक्ष्य परीक्षा माफिया के नेटवर्क को ध्वस्त करना और भर्ती प्रक्रियाओं की शुचिता (integrity) को बनाए रखना है।
यह समर्पित टीम केवल अपराधों की जांच ही नहीं करेगी, बल्कि अभियोजन (prosecution) एजेंसियों के साथ सीधा तालमेल बिठाकर मामलों की जल्द से जल्द चार्जशीट दाखिल करेगी। उद्देश्य यह है कि ऐसे संवेदनशील मामलों में बिना किसी देरी के त्वरित न्याय मिल सके।
किन-किन बड़ी परीक्षाओं पर रहेगी एसटीएफ की पैनी नजर?
एसटीएफ का कार्यक्षेत्र देश की लगभग सभी शीर्ष केंद्रीय भर्ती एवं प्रवेश परीक्षाओं तक विस्तृत होगा:
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संघ लोक सेवा आयोग (UPSC): सिविल सेवा व अन्य केंद्रीय राजपत्रित परीक्षाएं।
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कर्मचारी चयन आयोग (SSC): CGL, CHSL, और मल्टी-टास्किंग भर्ती परीक्षाएं।
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रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB): नॉन-टेक्निकल व अन्य रेलवे पदों की भर्ती परीक्षाएं।
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बैंकिंग कार्मिक चयन संस्थान (IBPS): सार्वजनिक क्षेत्रों के बैंकों के पीओ और क्लर्क एग्जाम।
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नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA): NEET, JEE, CUET और UGC-NET जैसी बड़ी राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षाएं।
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केंद्रीय विभाग: केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों के तहत होने वाले अन्य सभी भर्ती एग्जाम।
विशेष ध्यान: केंद्र सरकार आवश्यकता पड़ने पर किसी भी अन्य परीक्षा एजेंसी या निकाय को एसटीएफ के दायरे में शामिल करने के लिए अधिकृत होगी।
कैसे काम करेगी कमांड और निगरानी व्यवस्था?
जांच की गुणवत्ता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए एक त्रि-स्तरीय (three-tier) प्रशासनिक ढांचा तैयार किया गया है:
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कमांड: एसटीएफ का नेतृत्व पुलिस उपायुक्त (DCP) रैंक के वरिष्ठ अधिकारी करेंगे।
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प्रशासनिक नियंत्रण: क्राइम ब्रांच के विशेष पुलिस आयुक्त (Special CP) इसकी समग्र निगरानी करेंगे।
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विशेष अदालती व्यवस्था: दिल्ली हाई कोर्ट ने पेपर लीक मामलों की तेज सुनवाई के लिए विशेष अदालत (Special Fast-Track Court) का गठन किया है।
एसटीएफ की सख्त जांच और विशेष अदालत में रोजाना की तर्ज पर सुनवाई से परीक्षा में धांधली करने वाले सिंडिकेट्स और अपराधियों को बहुत कम समय में कठोर सजा दिलाना संभव हो सकेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
Q1: एसटीएफ (STF) का गठन किस कानून के तहत किया गया है?
उत्तर: इस एसटीएफ का गठन पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट-2024 के कानूनी प्रावधानों के तहत किया गया है।
Q2: एसटीएफ की कमान किसके पास होगी?
उत्तर: इस विशेष टीम का नेतृत्व पुलिस उपायुक्त (DCP) स्तर के अधिकारी करेंगे, जबकि इसकी प्रशासनिक निगरानी क्राइम ब्रांच के विशेष पुलिस आयुक्त करेंगे।
Q3: क्या इसमें केवल यूपीएससी (UPSC) की परीक्षाएं शामिल होंगी?
उत्तर: नहीं, इसमें UPSC, SSC, RRB, IBPS, NTA (NEET/JEE/CUET) तथा केंद्र सरकार की सभी प्रमुख भर्ती परीक्षाएं शामिल हैं।
Q4: विशेष अदालत (Special Court) से क्या लाभ होगा?
उत्तर: दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा गठित विशेष अदालत में पेपर लीक और फर्जीवाड़े से जुड़े मामलों की रोजाना के आधार पर त्वरित सुनवाई होगी, जिससे अपराधियों को समय पर सख्त सजा मिल सकेगी।
डिस्क्लेमर (Disclaimer)
यह लेख दिल्ली पुलिस द्वारा जारी की गई आधिकारिक सूचना तथा सार्वजनिक समाचारों के आधार पर अभ्यर्थियों की सामान्य जानकारी हेतु तैयार किया गया है। किसी भी आधिकारिक कानूनी प्रावधान या नियम की विस्तृत एवं प्रामाणिक जानकारी के लिए कृपया दिल्ली पुलिस अथवा संबंधित मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट का अवलोकन करें।
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