नई दिल्ली. 77वें गणतंत्र दिवस (26 जनवरी, 2026) के अवसर पर दिल्ली का कर्तव्य पथ भारत की बढ़ती सैन्य शक्ति, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और आत्मनिर्भरता के संकल्प का साक्षी बना। इस वर्ष का समारोह विशेष रूप से ‘विकसित भारत’ और ‘नारी शक्ति’ के प्रति समर्पित रहा।
1. मुख्य अतिथि और कूटनीतिक संदेश
इस वर्ष गणतंत्र दिवस समारोह में यूरोपीय नेतृत्व की एक साथ उपस्थिति ने भारत-यूरोपीय संघ (EU) के रणनीतिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया। मुख्य अतिथि के रूप में यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने शिरकत की। यह न केवल आर्थिक बल्कि रक्षा और जलवायु परिवर्तन के मुद्दों पर यूरोप के साथ भारत की बढ़ती साझेदारी का प्रतीक है।
2. ‘नारी शक्ति’ का पराक्रम
परेड के दौरान ‘नारी शक्ति’ का थीम स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। इस वर्ष परेड की कमान से लेकर विभिन्न सैन्य टुकड़ियों के नेतृत्व तक में महिलाओं की भागीदारी ऐतिहासिक रही।
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ऑल-वुमन मार्चिंग कंटिंजेंट: सेना, नौसेना और वायु सेना की संयुक्त महिला टुकड़ी ने ‘समानता और साहस’ का संदेश दिया।
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डेयरडेविल्स: महिला मोटरबाइक सवारों ने कर्तव्य पथ पर हैरतअंगेज करतब दिखाकर दर्शकों को दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर दिया।
3. सैन्य प्रदर्शन: आत्मनिर्भरता की झलक
भारतीय सेना ने स्वदेशी तकनीकों और ‘मेक इन इंडिया’ की ताकत का प्रदर्शन किया। परेड में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से जुड़े हथियारों ने प्रमुखता पाई:
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ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम: दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल।
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आकाश मिसाइल: सतह से हवा में मार करने वाली उन्नत रक्षा प्रणाली।
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स्वदेशी टैंक: ‘अर्जुन’ मार्क-1ए और नाग मिसाइल सिस्टम ने भारत की जमीनी ताकत को प्रदर्शित किया।
4. ‘भारत गाथा’: फिल्ममेकर संजय लीला भंसाली की कलाकारी
इस वर्ष की सबसे चर्चित झांकी सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की ‘भारत गाथा’ रही। प्रख्यात फिल्ममेकर संजय लीला भंसाली द्वारा डिजाइन की गई इस झांकी में सिनेमाई भव्यता और ऐतिहासिक तथ्यों का अद्भुत संगम था।
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इसमें भारत के प्राचीन ज्ञान से लेकर आधुनिक अंतरिक्ष उपलब्धियों तक की कहानी को एक भव्य कैनवास पर पेश किया गया।
5. वंदे मातरम् के 150 वर्ष
वर्ष 2026 ‘वंदे मातरम्’ की रचना के 150वें वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। इसी उपलक्ष्य में:
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संस्कृति मंत्रालय ने एक विशेष संगीत कार्यक्रम प्रस्तुत किया जिसमें देशभर के 500 से अधिक कलाकारों ने हिस्सा लिया।
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झांकियों में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के इस कालजयी गीत की ऐतिहासिक यात्रा को दर्शाया गया, जिसने स्वतंत्रता संग्राम में प्राण फूंके थे।
6. 16,000 फीट की ऊंचाई पर तिरंगा
कर्तव्य पथ के साथ-साथ सोशल मीडिया पर सिक्किम की बर्फीली चोटियों का एक वीडियो वायरल हुआ। भारतीय सेना के जवानों ने -20 डिग्री तापमान और 16,000 फीट की ऊंचाई पर तिरंगा फहराया और राष्ट्रगान गाया। यह वीडियो देशवासियों के लिए अटूट देशभक्ति और दुर्गम सीमाओं पर सुरक्षा के प्रति विश्वास का प्रतीक बना।
77वां गणतंत्र दिवस समारोह केवल एक परेड नहीं, बल्कि एक नए भारत का उद्घोष था। यह समारोह इस बात का प्रमाण था कि भारत अपनी परंपराओं (वंदे मातरम्) को सहेजते हुए आधुनिक शक्ति (ब्रह्मोस) और समावेशी समाज (नारी शक्ति) की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है।
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