देहरादून। रविवार, 26 अप्रैल 2026
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून स्थित राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल (GDMC) एक बार फिर चर्चा में है। इस बार मामला प्रशासनिक नहीं बल्कि धार्मिक मान्यताओं और कार्यस्थल पर व्यवहार से जुड़ा है। अस्पताल की पैथोलॉजी विभागाध्यक्ष (HOD) डॉ. गजाला रिजवी पर एक महिला कर्मचारी ने पूजा-पाठ और धार्मिक प्रतीकों के इस्तेमाल पर आपत्ति जताने का आरोप लगाया है, जिससे स्थानीय हिंदू संगठनों में भारी आक्रोश है।
विवाद की जड़: क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, पैथोलॉजी विभाग में कार्यरत एक महिला कर्मचारी ने आरोप लगाया कि जब वह अस्पताल परिसर में स्थित मंदिर में पूजा करने जाती है, तो डॉ. गजाला रिजवी उसे टोकती हैं। कर्मचारी का यह भी आरोप है कि डॉ. रिजवी ने उसके हाथ में बंधे ‘कलावा’ (रक्षा सूत्र) और माथे पर लगे ‘टीके’ को लेकर भी अपमानजनक टिप्पणियां कीं।
जैसे ही यह बात अस्पताल के गलियारों से बाहर निकली, हिंदू रक्षा दल और अन्य स्थानीय संगठनों ने अस्पताल के बाहर मोर्चा खोल दिया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि किसी भी कर्मचारी को उसकी निजी आस्था के पालन से रोकना असंवैधानिक है।
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हिंदू संगठनों का अल्टीमेटम
हिंदू रक्षा दल के अध्यक्ष ललित शर्मा ने इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा:
“देवभूमि के सरकारी संस्थानों में इस तरह की मानसिकता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि 5 दिनों के भीतर इस मामले में ठोस जांच और कार्रवाई नहीं हुई, तो हम बड़ा आंदोलन करेंगे।”
वहीं, विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के पदाधिकारियों ने भी सोमवार को कॉलेज प्रशासन के साथ बैठक करने का निर्णय लिया है।
नवीनतम अपडेट
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प्रशासनिक जांच: कॉलेज की प्राचार्य डॉ. गीता जैन ने मामले को संज्ञान में लेते हुए एक आंतरिक जांच समिति गठित करने के संकेत दिए हैं। प्रशासन का कहना है कि वे दोनों पक्षों को सुनने के बाद ही किसी निर्णय पर पहुँचेंगे।
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डॉ. गजाला रिजवी का पक्ष: हालांकि अभी तक डॉ. रिजवी की ओर से कोई आधिकारिक लिखित बयान नहीं आया है, लेकिन अस्पताल सूत्रों के अनुसार, उन्होंने इन आरोपों को कार्यस्थल के अनुशासन (Workplace Discipline) से जोड़कर देखने की बात कही है।
निष्कर्ष: धार्मिक स्वतंत्रता बनाम कार्यस्थल अनुशासन
यह विवाद अब एक व्यापक बहस का रूप ले चुका है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म के पालन की स्वतंत्रता है, वहीं सरकारी संस्थानों में एक निश्चित ‘कोड ऑफ कंडक्ट’ का पालन भी अनिवार्य है। अब देखना यह होगा कि कॉलेज प्रशासन इस विवाद को शांत करने के लिए क्या कदम उठाता है।
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