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वाराणसी: पहचान छिपाकर शादी और जबरन धर्मांतरण का घिनौना खेल, ‘अमित’ निकला ‘आफताब’

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

लखनऊ । रविवार, 26 अप्रैल 2026

वाराणसी में धर्म और पहचान की आड़ में एक दलित युवती के साथ धोखाधड़ी और उत्पीड़न का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने समाज को झकझोर कर रख दिया है। एक युवक ने खुद को ‘अमित’ बताकर न केवल एक युवती का विश्वास जीता, बल्कि उसके साथ हिंदू रीति-रिवाज से विवाह भी किया। लेकिन जैसे ही घूंघट के पीछे की हकीकत सामने आई, पीड़िता के लिए वह घर खुशियों के बजाय प्रताड़ना का केंद्र बन गया।

काम के बहाने जाल, फिर विश्वासघात

पीड़िता, जो दलित समाज से आती है और शादियों में वेटर का काम कर अपना जीवन यापन करती थी, उसकी मुलाकात 2024 में अमित नामक एक व्यक्ति से हुई। अमित ने उसे काम दिलाने का भरोसा दिया और धीरे-धीरे उसे प्रेम जाल में फंसा लिया। आरोपी ने शादी का झांसा देकर युवती के साथ शारीरिक संबंध बनाए और अंततः मार्च 2025 में मंदिर में शादी कर ली।

हरहुआ पहुंचते ही खुला राज: ‘अमित’ बना ‘आफताब’

विवाह के बाद जब आरोपी युवती को हरहुआ स्थित अपने पैतृक घर ले गया, तब युवती के पैरों तले जमीन खिसक गई। वहां उसे पता चला कि जिसे वह ‘अमित’ समझ रही थी, उसका असली नाम आफताब है। सच्चाई सामने आते ही आफताब और उसके परिवार का व्यवहार पूरी तरह बदल गया।

उत्तर प्रदेश अपराध जगत: matribhumisamachar.com/category/crime

जबरन धर्मांतरण और गंभीर प्रताड़ना

पीड़िता का आरोप है कि उसकी पहचान उजागर होने के बाद ससुराल वालों ने उस पर धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया। मना करने पर उसे बेरहमी से पीटा गया। इतना ही नहीं, पीड़िता ने आफताब के बड़े भाई पर भी दुष्कर्म करने का अत्यंत गंभीर आरोप लगाया है। किसी तरह जान बचाकर पीड़िता अपने मायके पहुंची और पुलिस को आपबीती सुनाई।

पुलिस की कार्रवाई और नवीनतम अपडेट

वाराणसी पुलिस ने इस मामले को संज्ञान में लेते हुए तत्काल कार्रवाई की है।

  • दर्ज धाराएं: पुलिस ने आफताब और उसके परिजनों के खिलाफ धोखाधड़ी, दुष्कर्म, मारपीट और उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम (एंटी-कन्वर्जन लॉ) के तहत मुकदमा दर्ज किया है।

  • ताजा स्थिति: मुख्य आरोपी आफताब फिलहाल फरार है। पुलिस की तीन टीमें उसकी गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं। पुलिस का कहना है कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।