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एशिया की सबसे तेज ‘ग्रीन इकॉनमी’ बना भारत: LSEG रिपोर्ट 2026 में बड़ा खुलासा, बायोगैस और क्लीन एनर्जी में मारी बाजी

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नई दिल्ली । शुक्रवार, 26 जून 2026

वैश्विक स्तर पर पर्यावरण अनुकूल और टिकाऊ विकास की दिशा में भारत एक बड़े पावरहाउस के रूप में उभर रहा है। लंदन स्टॉक एक्सचेंज ग्रुप (London Stock Exchange Group – LSEG) की हालिया ‘इन्वेस्टिंग इन द ग्रीन इकॉनमी 2026’ रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने साल 2025 में ग्रीन रेवेन्यू (Green Revenue) के मामले में एक नया मील का पत्थर छू लिया है। रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि भारत का कुल लिस्टेड ग्रीन रेवेन्यू बेस भले ही चीन या जापान जैसे दिग्गजों के मुकाबले छोटा हो, लेकिन इसकी बढ़ने की रफ्तार (Growth Rate) पूरे एशिया में सबसे घातक और बेमिसाल है।

110 बिलियन डॉलर का ग्रीन रेवेन्यू और 20% की शानदार CAGR

LSEG (जो फाइनेंशियल मार्केट डेटा और वैश्विक इंफ्रास्ट्रक्चर सर्विसेज देने वाली एक प्रतिष्ठित संस्था है) की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में भारत ने ग्रीन रेवेन्यू से 110 बिलियन डॉलर (लगभग ₹9.1 लाख करोड़) की बंपर कमाई की है।

इस रिपोर्ट की सबसे महत्वपूर्ण बात भारत की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) है। पिछले 5 वर्षों में भारत का ग्रीन रेवेन्यू 20 प्रतिशत की सालाना चक्रवृद्धि दर (CAGR) से बढ़ा है। यह रफ्तार:

  • पूरे एशियाई क्षेत्र की औसत ग्रीन रेवेन्यू ग्रोथ (12 फीसदी) से काफी ज्यादा है।

  • वैश्विक बाजार (Global Market) की औसत ग्रोथ रेट (10 फीसदी CAGR) से दोगुनी है।

यही वजह है कि वैश्विक स्तर पर छोटे बेस के बावजूद भारत को एशिया की सबसे तेजी से बढ़ती ग्रीन इकॉनमी में गिना जा रहा है।

बायोगैस और एडवांस्ड इरिगेशन सिस्टम में एकतरफा दबदबा

भले ही वैश्विक या क्षेत्रीय स्तर पर भारत का कुल ग्रीन रेवेन्यू शेयर अभी कम है, लेकिन कुछ खास ‘नीश सेक्टर्स’ (Niche Sectors) में भारत ने पूरे एशिया महाद्वीप को पीछे छोड़ दिया है। LSEG डेटा के अनुसार:

  1. बायोगैस एनर्जी इक्विपमेंट (Biogas Energy Equipment): एशिया के कुल बायोगैस ग्रीन रेवेन्यू में अकेले भारत की हिस्सेदारी 87 प्रतिशत दर्ज की गई है।

  2. एडवांस्ड इरिगेशन सिस्टम (Advanced Irrigation Systems): आधुनिक और स्मार्ट सिंचाई प्रणालियों के उपकरणों में एशिया के कुल ग्रीन रेवेन्यू का 75 प्रतिशत हिस्सा भारत के खाते में आया है।

ये आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि भारत का ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर (Rural Infrastructure), एग्रीकल्चर (Agriculture), वेस्ट-टू-एनर्जी (Waste-to-Energy) और डिसेंट्रलाइज्ड एनर्जी सिस्टम (Decentralized Energy) का मॉडल जमीन पर बेहद सफल साबित हो रहा है।

क्लीन एनर्जी निवेश: पावर सेक्टर का 83% हिस्सा पर्यावरण के नाम

निवेश के मोर्चे पर भी भारत ने अपनी प्राथमिकताओं को पूरी तरह बदल दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने क्लीन-एनर्जी (Clean Energy) प्रोजेक्ट्स में लगभग 100 बिलियन डॉलर का निवेश किया। सबसे खास बात यह है कि यह निवेश भारत के पावर-सेक्टर के कुल कैपिटल एलोकेशन (Capital Allocation) का 83 प्रतिशत है। यानी भारत नए पावर इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए मिलने वाले हर 100 रुपये में से 83 रुपये केवल क्लीन और रिन्यूएबल सोर्सेज पर खर्च कर रहा है।

भारत में यह बदलाव केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के डिजिटल और इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर को भी बदल रहा है। आज भारत में बन रहे आधुनिक और हाई-डेंसिटी डेटा सेंटर्स (AI Factories) को चलाने के लिए भारी मात्रा में रिन्यूएबल एनर्जी और सोलर ग्रिड्स का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके साथ ही क्लाइमेट-टेक (Climate-Tech) और एनवायरमेंटल इंजीनियरिंग से जुड़े स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए सरकारी स्तर पर Startup India Fund of Funds 2.0 जैसी योजनाएं भी क्लीन-एनर्जी सॉल्यूशंस में निवेश को कई गुना बढ़ा रही हैं।

एशियाई बाजार का हाल: चीन और जापान का कितना है शेयर?

LSEG 2026 की रिपोर्ट बताती है कि एशिया इस समय दुनिया का सबसे बड़ा ग्रीन-रेवेन्यू क्षेत्र बनकर उभरा है। साल 2025 में दुनिया के कुल ग्रीन रेवेन्यू में एशियाई कंपनियों की हिस्सेदारी 47 प्रतिशत थी। इस क्षेत्र में सबसे आगे रहने वाले देशों की हिस्सेदारी इस प्रकार है:

स्थान देश एशिया के ग्रीन रेवेन्यू में हिस्सेदारी (%)
1 चीन 41%
2 जापान 28%
3 हांगकांग 10%
4 दक्षिण कोरिया 6%
5 ताइवान 5%
6 भारत ~4%

एशियाई क्षेत्र मुख्य रूप से एनर्जी इक्विपमेंट, इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) बैटरी, ट्रांसपोर्ट इक्विपमेंट, वेस्ट एंड पॉल्यूशन कंट्रोल और रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे ग्रीन सेक्टर्स में दुनिया का नेतृत्व कर रहा है। इसमें अकेले चीन ने रिन्यूएबल्स, एनर्जी स्टोरेज और न्यूक्लियर सेक्टर में 625 बिलियन डॉलर का भारी-भरकम निवेश किया है।

बड़ी चुनौती: एनर्जी सिक्योरिटी और कोयले की मांग में संतुलन

तेजी से बढ़ती इस ग्रीन इकॉनमी के बीच रिपोर्ट ने एशिया के सामने खड़ी एक कड़वी सच्चाई और चुनौती की तरफ भी इशारा किया है। वह चुनौती है—‘एनर्जी सिक्योरिटी (ऊर्जा सुरक्षा) बनाम ग्रीन क्लीन ग्रोथ’

  • फॉसिल फ्यूल पर निर्भरता: एशिया आज भी मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) से आयात होने वाले कच्चे तेल और फॉसिल फ्यूल पर बहुत ज्यादा निर्भर है। हाल ही में वैश्विक स्तर पर देखी गई Global Commodity Markets Volatility यानी कमोडिटी बाजार के उतार-चढ़ाव और क्रूड ऑयल की कीमतों में आई तेजी के कारण भारत जैसे देशों को अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रिफाइंड ईंधनों पर नीतियां बदलनी पड़ी हैं।

  • कोयले की मांग (Coal Demand): अपनी बढ़ती मैन्युफैक्चरिंग और घरेलू बिजली की जरूरतों को पूरा करने के लिए एशिया दुनिया भर में कोयले की मांग को सबसे ज्यादा बढ़ा रहा है। इस मामले में भी चीन पहले नंबर पर है, जिसके ठीक बाद भारत और साउथ-ईस्ट एशियाई देशों का स्थान आता है।

निष्कर्ष: भारत के लिए दोहरी तस्वीर

लंदन स्टॉक एक्सचेंज ग्रुप (LSEG) की यह रिपोर्ट भारत के लिए एक दोहरी तस्वीर पेश करती है। एक तरफ भारत अभी भी एशिया के कुल लिस्टेड ग्रीन रेवेन्यू पूल में 4% हिस्सेदारी के साथ एक छोटा खिलाड़ी है। लेकिन दूसरी तरफ, इसकी रफ्तार (20% CAGR) और बायोगैस (87%) व एडवांस्ड इरिगेशन (75%) जैसे मुख्य डोमेन में इसका एकछत्र राज यह साबित करता है कि आने वाले सालों में भारत एशिया के ग्रीन ट्रांजिशन (Green Transition) का नेतृत्व करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

(LSEG के अनुसार, इस रिपोर्ट के लिए ग्रीन रेवेन्यू डेटा अप्रैल 2026 तक के इनपुट्स और कंपनियों का रेवेन्यू डेटा दिसंबर 2025 तक की स्थिति पर आधारित है।)

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