मुंबई । शुक्रवार, 24 जुलाई 2026
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच वैश्विक बाजारों में उथल-पुथल देखने को मिली। शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत भारी गिरावट के साथ हुई, लेकिन दिन के उत्तरार्ध में बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स (Sensex) और निफ्टी (Nifty) निचले स्तरों से तेजी से संभल गए।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Brent Crude Oil) की कीमतों में शुरुआती उछाल के बाद आई गिरावट और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा रुपये को सहारा देने के लिए किए गए संभावित दखल से घरेलू बाजार को बड़ी राहत मिली।
1. शुरुआती झटके के बाद निचले स्तरों से स्मार्ट रिकवरी
कारोबार की शुरुआत में जब ब्रेंट क्रूड ऑयल $100 प्रति बैरल का स्तर पार कर गया, तो घरेलू शेयर बाजार में घबराहट फैल गई:
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सेंसेक्स का हाल: शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 916.96 अंक (1.2%) टूटकर 75,474.43 के निचले स्तर तक चला गया था।
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निफ्टी का हाल: वहीं निफ्टी 263.3 अंक (1.1%) गिरकर 23,606.30 के स्तर पर पहुंच गया।
हालांकि, दोपहर 1:15 बजे के आसपास बाजार में ‘वैल्यू बाइंग’ (Value Buying) देखने को मिली। निचले स्तरों पर खरीदारों के सक्रिय होने से सेंसेक्स अपने दिन के निचले स्तर से 600 अंक से ज्यादा सुधरा और निफ्टी में भी तेजी से रिकवरी देखी गई।
2. रुपया संभला: RBI के दखल की खबर से मिला सपोर्ट
भारतीय रुपये ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 22 पैसे की बढ़त हासिल की और 96.51 पर कारोबार करता देखा गया।
रुपये की मजबूती के मुख्य कारण:
RBI का संभावित हस्तक्षेप: कच्चे तेल के $100 के पार जाने पर करेंसी में बड़ी गिरावट को रोकने के लिए रिजर्व बैंक के सक्रिय होने की खबरें आईं।
अमेरिकी डॉलर में नरमी: वैश्विक स्तर पर डॉलर इंडेक्स के थोड़ा कमजोर होने से घरेलू मुद्रा को सहारा मिला।
FII की बिकवाली का दबाव: विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के बावजूद रुपये ने अपनी गिरावट की भरपाई की।
3. निवेशकों ने चुनिंदा शेयरों में की ‘वैल्यू बाइंग’
बेंचमार्क इंडेक्स लगातार पांचवें सत्र में गिरावट की राह पर थे और इस हफ्ते सेंसेक्स-निफ्टी में लगभग 3% की गिरावट आ चुकी थी। भारी बिकवाली के कारण कई अच्छे फंडामेंटल वाले शेयर निचले स्तरों पर उपलब्ध थे, जिससे वैल्यू इन्वेस्टर्स ने मौके का फायदा उठाया और खरीदारी शुरू कर दी।
4. आने वाले समय में मार्केट का सेंटीमेंट कैसा रहेगा?
बाजार जानकारों के अनुसार, आने वाले समय में मार्केट सेंटीमेंट पर दबाव बना रह सकता है:
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कच्चे तेल की ऊंची कीमतें: यदि क्रूड ऑयल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो इसका असर देश के मैक्रो-इकोनॉमिक इंडिकेटर्स (जैसे महंगाई और चालू खाता घाटा) पर पड़ेगा।
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US Bond Yield 52-हफ्ते के उच्चतम स्तर पर: क्रूड की कीमतों में तात्कालिक गिरावट के बावजूद अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी यह दर्शाती है कि वैश्विक बॉन्ड मार्केट अभी भी ऊर्जा आधारित महंगाई को लेकर चिंतित है।
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ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका: अमेरिका में मजबूत लेबर मार्केट और फेडरल रिजर्व के सख्त रुख को देखते हुए आने वाले महीनों में ब्याज दरें बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
प्रश्न 1: शुक्रवार को शेयर बाजार में अचानक रिकवरी क्यों आई?
उत्तर: अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतों में 2% से ज्यादा की गिरावट, रुपये में मजबूती और निचले स्तरों पर निवेशकों द्वारा की गई वैल्यू बाइंग (Value Buying) के कारण बाजार में रिकवरी आई।
प्रश्न 2: क्या शेयर बाजार पर दबाव खत्म हो गया है?
उत्तर: नहीं, आने वाले समय में भी बाजार पर दबाव रह सकता है। अमेरिका में 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड के 52-हफ्ते के उच्चतम स्तर पर होने और कच्चे तेल के ऊंचे दामों से महंगाई का खतरा बना हुआ है।
प्रश्न 3: क्या RBI ने रुपये की गिरावट रोकने में मदद की?
उत्तर: खबरों और बाजार की रिपोर्टों के अनुसार, क्रूड ऑयल में तेजी के बीच रुपये को और ज्यादा गिरने से बचाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा करेंसी मार्केट में दखल देने के संकेत मिले हैं।
अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख केवल सूचनात्मक और शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए लिखा गया है। शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड में निवेश बाजार के जोखिमों के अधीन है। किसी भी प्रकार के निवेश से पहले अपने पंजीकृत वित्तीय सलाहकार (Financial Advisor) से परामर्श अवश्य लें।
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