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भारत-अमेरिका व्यापार समझौता: क्यों आखिरी वक्त पर भारत ने दिखाई कड़ाई? पीयूष गोयल ने खोला बड़ी शर्त का राज

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नई दिल्ली । शनिवार, 27 जून 2026 

भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित द्विपक्षीय व्यापार समझौता (BTA) फाइनल होने के बेहद करीब पहुंच चुका है, लेकिन दिल्ली और वाशिंगटन के बीच अभी भी एक महत्वपूर्ण कानूनी और रणनीतिक पेंच फंसा हुआ है। जहां एक तरफ अमेरिकी अधिकारी लगातार संकेत दे रहे हैं कि यह अंतरिम डील जल्द ही धरातल पर आ सकती है, वहीं दूसरी तरफ भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने लंदन में ‘यूके-इंडिया वीक 2026’ कार्यक्रम के दौरान साफ कर दिया है कि जब तक भारत के निर्यातकों को प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले फायदा नहीं मिलता, भारत इस डील पर हस्ताक्षर नहीं करेगा।

क्या है पूरा मामला और क्यों बदली परिस्थितियां?

शुरुआती बातचीत के दौरान दोनों देशों ने 6 फरवरी 2026 को इस डील की रूपरेखा (Framework) तय की थी। इस फ्रेमवर्क के तहत अमेरिका ने भारतीय सामानों पर लगने वाले टैरिफ (आयात शुल्क) को 50% से घटाकर 18% करने पर सहमति जताई थी। उस समय भारत के प्रतिस्पर्धी देशों (जैसे वियतनाम, बांग्लादेश या अन्य आसियान देश) पर अमेरिकी शुल्क 19% से 20% के बीच था, जिससे भारतीय निर्यातकों को सीधा लाभ (Competitive Edge) मिल रहा था।

लेकिन हाल ही में अमेरिकी कानूनी व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव आया है:

  1. अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का फैसला: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा ‘इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट’ (IEEPA) के तहत लगाए गए रेसिप्रोकल टैरिफ को अमान्य घोषित करने के बाद पूरा समीकरण बदल गया।

  2. 10% बेसलाइन टैरिफ की समयसीमा: वर्तमान में अमेरिका ने सभी देशों पर एक अस्थायी 10% बेसलाइन टैरिफ लागू किया हुआ है, जिसकी समयसीमा 24 जुलाई 2026 को समाप्त हो रही है। इस वजह से सभी देश एक ही ब्रैकेट में आ गए हैं।

भारत की मुख्य मांग: ‘कॉम्पिटिटिव टैरिफ एडवांटेज’

पीयूष गोयल ने रॉयटर्स और वैश्विक मीडिया को दिए इंटरव्यू में स्पष्ट रूप से कहा कि एक मुक्त या द्विपक्षीय व्यापार समझौते का असली मतलब तभी है जब हमें हमारे प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले बाजार में प्राथमिकता मिले।

पीयूष गोयल का बयान: “पूरी डील इसी कॉम्पिटिटिव एडवांटेज (18% टैरिफ दर) के इर्द-गिर्द बुनी गई थी ताकि हमें बांग्लादेश, वियतनाम, थाईलैंड, इंडोनेशिया, मलेशिया और चीन जैसे देशों के मुकाबले अमेरिकी बाजार में बढ़त मिले। जिस दिन अमेरिका हमें कानूनी रूप से यह गारंटी देने का रास्ता ढूंढ लेगा, उसी दिन डील पक्की हो जाएगी।”

अगर भारतीय कपड़ा, दवाइयों (Pharmaceuticals) और इंजीनियरिंग उत्पादों पर भी वियतनाम या बांग्लादेश जितना ही आयात शुल्क लगेगा, तो इस समझौते का भारतीय व्यवसायों के लिए कोई बड़ा आर्थिक महत्व नहीं रह जाएगा।

भारत-अमेरिका व्यापार के ताजा आंकड़े (FY 2025-26)

अमेरिका वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार बनकर उभरा है। दोनों देशों के बीच व्यापार की स्थिति इस प्रकार है:

विवरण राशि (अरब डॉलर में)
भारत का अमेरिका को कुल निर्यात (Exports) $87.3 बिलियन
भारत का अमेरिका से कुल आयात (Imports) $52.9 बिलियन
मई 2026 में भारत का ट्रेड सरप्लस $2.94 बिलियन (जो पिछले साल $5.02 बिलियन था)

आगे की राह: क्या 24 जुलाई से पहले होगी डील?

भारत और अमेरिका के मुख्य वार्ताकार (भारत की ओर से वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त सचिव दर्पन जैन और अमेरिका के मुख्य वार्ताकार ब्रेंडन लिंच) लगातार इस समस्या का कानूनी हल निकालने में जुटे हैं। अमेरिकी प्रशासन वर्तमान में ‘धारा 301’ (Section 301) के तहत करीब 60 देशों की जांच पूरी कर रहा है, जिसके बाद एक नया टैरिफ ढांचा घोषित किया जा सकता है।

भारत अपनी घरेलू इंडस्ट्री और किसानों के हितों (विशेषकर डेयरी और कृषि क्षेत्र) की सुरक्षा को लेकर कोई समझौता नहीं करना चाहता। वाशिंगटन अब ऐसे कानूनी रास्तों और टूल्स की तलाश कर रहा है जिसके जरिए वह भारत को अन्य विकासशील देशों के मुकाबले कम शुल्क की औपचारिक गारंटी दे सके।

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