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भारत में आसमान से ‘जहर’ की सप्लाई: पिछले 4 वर्षों में ड्रोन से ड्रग तस्करी में 100 गुना का उछाल, पंजाब बना मुख्य केंद्र

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नई दिल्ली। शनिवार, 27 जून 2026

भारत में मादक पदार्थों (Narcotics) के खिलाफ जारी जंग अब पारंपरिक जमीनी रास्तों से उठकर आसमान तक पहुंच चुकी है। तकनीकी रूप से उन्नत और आधुनिक होते जा रहे अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट्स ने भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के सामने एक नई और बेहद गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा जारी नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के साल 2025 के वार्षिक आंकड़ों के मुताबिक, देश में ड्रोन से ड्रग तस्करी के मामलों में साल 2021 के मुकाबले 100 गुना से अधिक की रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह एक ऐसा डिजिटल और तकनीकी रूप से मजबूत खतरा बनकर उभरा है, जिससे निपटने के लिए अब एंटी-ड्रोन तकनीक और वित्तीय चोट (Financial Investigation) को मुख्य हथियार बनाया जा रहा है।

आंकड़ों की जुबानी: 2021 के मुकाबले 100 गुना से ज्यादा की तेजी

एनसीबी (NCB) की ताजा रिपोर्ट के चौंकाने वाले आंकड़े बताते हैं कि साल 2021 में देश के भीतर ड्रोन से तस्करी के महज 3 मामले दर्ज किए गए थे। लेकिन इसके बाद के 4 वर्षों में इस ग्राफ में 98% से अधिक की सालाना चक्रवृद्धि दर से उछाल आया और साल 2025 में ड्रोन से जुड़े रिकॉर्ड 305 मामले सामने आए। इन सभी मामलों में सुरक्षा एजेंसियों ने कुल 468 किलोग्राम खतरनाक नशीले पदार्थ आसमान से भारतीय सीमा में गिराए जाते वक्त या उसके ठीक बाद बरामद किए।

ड्रोन तस्करी का ‘एपिसेंटर’ बना पंजाब

इस पूरी रिपोर्ट का सबसे चिंताजनक पहलू भौगोलिक वितरण (Geographical Distribution) है। आंकड़ों के विश्लेषण से साफ है कि देश में ड्रोन के जरिए होने वाली कुल तस्करी का लगभग 98% हिस्सा अकेले पंजाब में केंद्रित है।

  • कुल 305 घटनाओं में से 298 घटनाएं अकेले पंजाब की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर दर्ज की गईं।

  • भारत-पाकिस्तान सीमा (Indo-Pak Border) का इस्तेमाल कर सीमा पार बैठे तस्कर पंजाब के रास्ते देश में हाई-प्यूरिटी हेरोइन (High-Purity Heroine) और मेथमफेटामाइन (Meth) जैसी सिंथेटिक और जानलेवा ड्रग्स भेज रहे हैं।

फार्मास्युटिकल दवाओं का अवैध डायवर्जन और कफ सिरप का संकट

न केवल अवैध सिंथेटिक ड्रग्स, बल्कि मेडिकल सेक्टर में इस्तेमाल होने वाली दवाओं का नशे के रूप में दुरुपयोग (Pharmaceutical Diverversion) भी तेजी से बढ़ा है। साल 2021 और 2025 के बीच इसमें कुल 77% की बढ़ोतरी देखी गई है।

एक समय नशीले पदार्थों की सालाना जब्ती 2,43,111 किलोग्राम के अपने उच्चतम (Peak) स्तर पर पहुंच गई थी, जो अब थोड़ी सी सुधरकर 2,37,390 किलोग्राम पर आ गई है। हालांकि, पंजाब में इस समय मेडिकल नशे की एक नई और घातक लहर देखी जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में रिकॉर्ड 8.95 लाख कोडीन आधारित कफ सिरप की बोतलें जब्त की गई हैं। इसके अतिरिक्त ब्यूप्रेनॉर्फिन (Buprenorphine), ट्रामाडोल (Tramadol) और अल्प्राजोलम (Alprazolam) जैसी प्रतिबंधित दवाओं की अवैध सप्लाई भी बड़े स्तर पर पकड़ी गई है।

कूरियर और डार्कनेट का नया चैलेंज

सुरक्षा एजेंसियों ने हवाई रास्तों और सीमाओं पर एंटी-ड्रोन सिस्टम के जरिए निगरानी तो सख्त की है, लेकिन तस्करों ने अब कूरियर और पोस्टल (डाक) नेटवर्क को अपना नया जरिया बना लिया है। कूरियर के जरिए तस्करी के मामले हालांकि 174 पर स्थिर बने हुए हैं, लेकिन पोस्टल चैनलों के माध्यम से जब्त किए गए नशीले पदार्थों की मात्रा 972 किलोग्राम के बड़े आंकड़े को पार कर गई है, जो बेहद संवेदनशील है।

गुप्त प्रयोगशालाओं (Secret Synthetic Labs) का भंडाफोड़

देश के भीतर ही सिंथेटिक ड्रग्स बनाने वाले घरेलू नेटवर्क पर भी एनसीबी ने बड़ी स्ट्राइक की है। पिछले 3 वर्षों के संयुक्त आंकड़ों को पीछे छोड़ते हुए अकेले इस अवधि में 30 गुप्त सिंथेटिक निर्माण प्रयोगशालाओं को पूरी तरह से नष्ट (Busted) किया गया और इस सिलसिले में 102 शातिर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया।

ये गुप्त लैब्स मुख्य रूप से देश के तीन राज्यों में सक्रिय थीं:

  1. महाराष्ट्र

  2. राजस्थान

  3. मध्य प्रदेश

इन ठिकानों पर भारी मात्रा में मेफेड्रोन (Mephedrone – म्याऊ म्याऊ), एफेड्रिन (Ephedrine) और कई तरह की गैर-कानूनी साइकोट्रोपिक (Psychotropic) गोलियां तैयार की जा रही थीं, जिन्हें मेट्रो शहरों की रेव पार्टियों और युवाओं तक सप्लाई किया जाना था।

विदेशी नेटवर्क और ‘मनी ट्रेल’ पर एनसीबी का कड़ा प्रहार

भारत के इस ड्रग विरोधी अभियान में अंतरराष्ट्रीय कार्टेल से जुड़े 747 विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार विदेशी तस्करों में सबसे बड़ी संख्या पड़ोसी देश नेपाल (203 नागरिक) की है। इसके बाद नाइजीरिया के 146 और म्यांमार के 97 नागरिक शामिल हैं।

रणनीति में बड़ा बदलाव: सुरक्षा एजेंसियों ने अब केवल ड्रग्स की खेप पकड़ने (Seizure-centric approach) के बजाय ‘मनी ट्रेल’ (Money Trail) यानी पैसे के स्रोत और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक नेटवर्क को ध्वस्त करने की रणनीति अपनाई है।

इस वित्तीय चोट के तहत, ड्रग कार्टेल की जांच के मामलों की संख्या तेजी से बढ़कर 1,356 हो गई है और अब तक तस्करों की 836 करोड़ रुपये की काली कमाई और संपत्ति को फ्रीज किया जा चुका है। यह आंकड़ा पांच साल पहले जब्त की गई 164.93 करोड़ रुपये की संपत्ति की तुलना में कई गुना अधिक है, जो यह दर्शाता है कि सरकार अब ड्रग्स माफियाओं की आर्थिक रीढ़ तोड़ने में सफल हो रही है।

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