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भारत में परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी कंपनियों की एंट्री: NPCIL देगी तकनीकी मदद, 2047 तक 100 GW का लक्ष्य

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मुंबई | गुरुवार, 27 अगस्त 2026 
भारत सरकार ने देश के ऊर्जा परिदृश्य में एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी बदलाव की दिशा में कदम बढ़ा दिया है। अब तक केवल सरकारी संस्थानों तक सीमित रहने वाले परमाणु ऊर्जा क्षेत्र (Nuclear Energy Sector) को अब निजी कंपनियों के लिए आसान और सुलभ बनाने की तैयारी है।
इस कदम का मुख्य उद्देश्य वर्ष 2047 तक भारत की परमाणु ऊर्जा उत्पादन क्षमता को 100 गीगावाट (GW) तक पहुंचाना है। इस रणनीति के केंद्र में न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) का अनुभव और निजी क्षेत्र का निवेश व नवाचार है।

NPCIL बनाएगी नई कंसल्टिंग इकाई: निजी क्षेत्र को मिलेगा तकनीकी सहारा

परमाणु ऊर्जा तकनीक बेहद जटिल और संवेदनशील होती है। इस क्षेत्र में नए प्रवेश करने वाले निजी खिलाड़ियों को तकनीकी और नियामकीय अड़चनों से बचाने के लिए सरकार NPCIL के तहत एक समर्पित कंसल्टिंग विंग (Consulting Unit) बनाने का प्रस्ताव ला रही है।
यह इकाई निजी कंपनियों को निम्नलिखित क्षेत्रों में विशेषज्ञता प्रदान करेगी:
  • डिजाइन और इंजीनियरिंग: विश्वस्तरीय मानकों के अनुरूप रिएक्टर डिजाइन तैयार करना।
  • सुलभ संचालन एवं प्रबंधन: संयंत्रों के कुशल और सुरक्षित संचालन के लिए प्रशिक्षण और रणनीतिक सलाह।
  • नियामकीय स्वीकृति: परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (AERB) से लाइसेंसिंग और सुरक्षा मंजूरी प्राप्त करने में मार्गदर्शन।

SMRs और 2047 का 100 गीगावाट लक्ष्य

भारत के नेट-ज़ीरो (Net-Zero) उत्सर्जन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए केवल पारंपरिक बड़े परमाणु संयंत्र ही काफी नहीं हैं। इसलिए सरकार स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स (SMRs) जैसी आधुनिक तकनीकों को भी बढ़ावा दे रही है।
पहलू पारंपरिक परमाणु संयंत्र स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR)
उत्पादन क्षमता 700 MW – 1000+ MW 30 MW – 300 MW
निर्माण समय 8 से 10 वर्ष 3 से 5 वर्ष
पूंजीगत लागत अत्यधिक उच्च मध्यम एवं चरणबद्ध निवेश
निजी क्षेत्र के अनुकूल सीमित व्यवहार्यता उच्च व्यवहार्यता
एसएमआर (SMRs) का निर्माण कारखानों में किया जा सकता है और इन्हें मॉड्यूल के रूप में स्थापित किया जा सकता है, जिससे शुरुआती लागत और निर्माण में लगने वाला समय काफी कम हो जाता है।

सुरक्षा मानक और चुनौतियाँ

परमाणु क्षेत्र को खोलने के साथ-साथ सरकार के सामने कई विधिक और नियामकीय चुनौतियाँ भी मौजूद हैं:
  1. परमाणु देयता कानून (CLND Act): किसी भी दुर्घटना की स्थिति में वित्तीय और कानूनी देनदारी के नियमों पर निजी कंपनियों को स्पष्टता की आवश्यकता है।
  2. सुरक्षा और रेडियोधर्मी कचरा प्रबंधन: प्रयुक्त ईंधन (Spent Fuel) और परमाणु कचरे के सुरक्षित निपटान के लिए सख्त केंद्रीय दिशानिर्देश आवश्यक हैं।
  3. लाइसेंसिंग प्रक्रिया: सुरक्षा मानकों से समझौता किए बिना लाइसेंसिंग को समयबद्ध बनाना।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1. NPCIL की नई कंसल्टिंग इकाई का मुख्य कार्य क्या होगा?
NPCIL की कंसल्टिंग इकाई निजी कंपनियों को परमाणु संयंत्रों के डिजाइन, इंजीनियरिंग, दैनिक संचालन, प्रबंधन और AERB से सुरक्षा लाइसेंस पाने में तकनीकी सहायता प्रदान करेगी।
Q2. भारत का 2047 तक परमाणु ऊर्जा उत्पादन का क्या लक्ष्य है?
भारत सरकार ने वर्ष 2047 (आज़ादी के शताब्दी वर्ष) तक परमाणु ऊर्जा क्षमता को 100 गीगावाट (GW) तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा है।
Q3. परमाणु क्षेत्र में SMRs (Small Modular Reactors) क्यों महत्वपूर्ण हैं?
SMRs आकार में छोटे, कम खर्चीले और जल्दी तैयार होने वाले रिएक्टर होते हैं। ये निजी कंपनियों के लिए वित्तीय रूप से अधिक सुलभ और सुरक्षित माने जाते हैं।

डिस्क्लेमर (Disclaimer)

यह लेख उपलब्ध नीतिगत प्रस्तावों, सरकारी योजनाओं और उद्योग विश्लेषण पर आधारित एक विश्लेषणात्मक रिपोर्ट है। परमाणु ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े कानून और नीतिगत नियम समय-समय पर केंद्र सरकार और परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) द्वारा अपडेट किए जाते हैं। आधिकारिक और अद्यतन जानकारी के लिए सरकारी गजट का अवलोकन करें।
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