मुंबई ।
विदेशी मुद्रा बाजार (Forex Market) में 18 सितंबर 2026 को भारतीय रुपये में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकवरी और मजबूती दर्ज की गई। गुरुवार को ₹95.93 पर बंद होने के बाद शुक्रवार को रुपया ₹95.75 के स्तर पर खुला और शुरुआती सत्र में ही मजबूत होकर ₹95.73 के स्तर तक पहुंच गया।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इस अल्पकालिक रिकवरी के पीछे नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का मेगा आईपीओ और कच्चे तेल की कीमतों में आ रही गिरावट मुख्य वजहें हैं।
रुपये में मजबूती के प्रमुख कारक
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NSE IPO से विदेशी पूंजी का प्रवाह: ₹22,562 करोड़ का NSE IPO बाजार में खुला हुआ है, जिसे पहले ही दिन लगभग 43% सब्सक्रिप्शन मिला। संस्थागत निवेशकों (FIIs) की भागीदारी बढ़ने से बाजार में डॉलर की आवक (Dollar Inflow) बढ़ेगी, जिससे रुपये को सहारा मिल रहा है।
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क्रूड ऑयल (Crude Oil) की कीमतों में नरमी: लगातार तीसरे दिन कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में नरमी रही। Brent crude $104 प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। भारत का आयात बिल कम होने से डॉलर की मांग पर दबाव घटा है।
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घरेलू शेयर बाजार में मजबूती: भारतीय इक्विटी मार्केट में सकारात्मक रुख ने भी निवेशकों के मनोबल को बढ़ाया है।
बाजार के समक्ष चुनौतियां और दायरा
रुपये में सुधार के बावजूद विदेशी मुद्रा बाजार में कई वैश्विक दबाव बने हुए हैं। आयातकों (Importers) की ओर से लगातार डॉलर की मांग, विदेशी फंडों की बिकवाली (FII Outflows), और वैश्विक स्तर पर मजबूत डॉलर इंडेक्स रुपये की तेज बढ़त को सीमित कर रहे हैं।
| तकनीकी स्तर | दर (INR/USD) | प्रभाव |
| प्रारंभिक सपोर्ट | ₹95.73 – ₹95.75 | तात्कालिक मजबूती का स्तर |
| महत्वपूर्ण रेंज | ₹95.75 – ₹95.80 | अल्पकालिक ट्रेडिंग दायरा |
| पिछला बंद स्तर | ₹95.93 | गुरुवार का क्लोजिंग लेवल |
आगे रुपये की दिशा NSE IPO के विदेशी प्रवाह, कच्चे तेल के रुझान और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के हस्तक्षेप पर निर्भर करेगी।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1: 18 सितंबर 2026 को रुपया डॉलर के मुकाबले किस स्तर पर खुला?
A: रुपया ₹95.93 के पिछले बंद स्तर के मुकाबले ₹95.75 पर खुला और शुरुआती कारोबार में ₹95.73 तक मजबूत हुआ।
Q2: NSE IPO का रुपये पर क्या प्रभाव पड़ रहा है?
A: NSE के ₹22,562 करोड़ के IPO में विदेशी संस्थागत निवेशकों की भागीदारी से बाजार में डॉलर की आपूर्ति बढ़ेगी, जिससे रुपये को मजबूती मिलेगी।
Q3: कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से भारत को क्या लाभ है?
A: कच्चे तेल की कीमतें घटने से भारत का आयात बिल कम होता है, जिससे डॉलर की मांग कम होती है और भारतीय रुपये पर दबाव घटता है।
अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख केवल सूचनात्मक और शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए लिखा गया है। मुद्रा बाजार और शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है। वित्तीय निर्णय लेने से पहले अपने प्रमाणित वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लें।
