लखनऊ. उत्तर प्रदेश कैडर के प्रशासनिक गलियारों में उस वक्त हलचल तेज हो गई जब केंद्र सरकार ने राज्य के छह वरिष्ठ आईएएस (IAS) अधिकारियों को सचिव और सचिव समकक्ष पदों पर तैनाती के लिए इम्पैनल (सूचीबद्ध) कर लिया। इस सूची में 1993 से 1995 बैच के उन अधिकारियों के नाम शामिल हैं, जो वर्तमान में उत्तर प्रदेश और केंद्र सरकार के महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
इन अधिकारियों को मिली हरी झंडी
केंद्र द्वारा जारी सूची के अनुसार, निम्नलिखित अधिकारियों को केंद्र में सचिव स्तर की जिम्मेदारी के योग्य माना गया है:
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आलोक कुमार-प्रथम (1993 बैच): वर्तमान में यूपी के औद्योगिक विकास विभाग में अपर मुख्य सचिव।
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लीना जौहरी (1994 बैच): अपर मुख्य सचिव, महिला एवं बाल विकास विभाग।
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संजय प्रसाद (1995 बैच): अपर मुख्य सचिव, मुख्यमंत्री कार्यालय एवं गृह विभाग।
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मृत्युंजय कुमार नारायण (1995 बैच): वर्तमान में महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त (केंद्र)।
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भुवनेश कुमार (1995 बैच): मुख्य कार्यकारी अधिकारी, UIDAI।
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संतोष कुमार यादव (1995 बैच): अध्यक्ष, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI)।
राज्य और केंद्र के बीच खिंच सकती है ‘नूराकुश्ती’
इस इम्पैनलमेंट के बाद इन अधिकारियों के पूर्ण रूप से केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने की अटकलें तेज हैं। हालांकि, उत्तर प्रदेश सरकार के लिए इन्हें कार्यमुक्त करना आसान नहीं होगा। विशेषकर आलोक कुमार-प्रथम और संजय प्रसाद जैसे अधिकारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ड्रीम प्रोजेक्ट्स और गृह विभाग की महत्वपूर्ण कमान संभाल रहे हैं। सूत्रों का मानना है कि राज्य की प्रशासनिक जरूरतों को देखते हुए फिलहाल इन्हें दिल्ली भेजने का निर्णय टाला जा सकता है।
महत्वपूर्ण क्यों है यह कदम?
प्रशासनिक विशेषज्ञों के अनुसार, यूपी कैडर के इतने वरिष्ठ अधिकारियों का एक साथ इम्पैनल होना राज्य के प्रशासनिक प्रभाव को दर्शाता है। इससे आने वाले समय में केंद्र और राज्य के बीच नीति-निर्माण और समन्वय (Coordination) में और अधिक मजबूती आने की उम्मीद है।
“यह इम्पैनलमेंट इन अधिकारियों के अनुभव और कार्यक्षमता पर केंद्र की मुहर है, जिससे भविष्य में राष्ट्रीय स्तर की योजनाओं के क्रियान्वयन में यूपी कैडर की अहम भूमिका रहेगी।”
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