नई दिल्ली | शनिवार, 28 मार्च 2026
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और Strait of Hormuz के प्रभावी रूप से बंद होने के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में हाहाकार मचा हुआ है। दुनिया का लगभग 20% तेल और गैस इसी मार्ग से गुजरता है। भारत, जो अपनी तेल जरूरतों का 85% आयात करता है, इस संकट से सबसे अधिक प्रभावित होने वाले देशों में से एक था।
सऊदी अरब और इराक जैसे पारंपरिक सहयोगियों से आपूर्ति बाधित होने के बाद, भारत सरकार ने रणनीतिक कदम उठाते हुए रूस की ओर रुख किया है। ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, मार्च और अप्रैल 2026 के लिए भारत ने कुल 6 करोड़ बैरल रूसी कच्चे तेल की बुकिंग की है।
Reliance और IOCL की बड़ी भूमिका
सूत्रों के अनुसार, भारत की निजी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी Reliance Industries और सार्वजनिक क्षेत्र की Indian Oil Corporation (IOCL) इस सौदे का नेतृत्व कर रही हैं।
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IOCL ने लगभग 10-15 मिलियन बैरल तेल बुक किया है।
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Reliance ने भी समान मात्रा में तेल सुरक्षित किया है।
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इसके अलावा Mangalore Refinery (MRPL) जैसी अन्य कंपनियों ने भी महीनों बाद रूस से फिर से खरीदारी शुरू की है।
US Waiver: अमेरिका ने क्यों दी हरी झंडी?
इस सौदे की सबसे चौंकाने वाली बात अमेरिका का रुख रहा है। वैश्विक तेल बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए अमेरिका ने भारत को 30 दिनों की विशेष छूट (US Waiver) प्रदान की है। यह छूट उन रूसी जहाजों के लिए है जो 5 मार्च 2026 से पहले लदे थे और समुद्र में फंसे हुए थे। अमेरिका का उद्देश्य रूस को आर्थिक लाभ पहुंचाना नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर तेल की कमी से पैदा होने वाली मुद्रास्फीति (Inflation) को रोकना है।
प्रीमियम पर खरीद: मजबूरी या समझदारी?
दिलचस्प बात यह है कि जो रूसी तेल पहले भारी डिस्काउंट पर मिलता था, उसे भारत ने अब $5 से $15 प्रति बैरल के प्रीमियम (Brent Crude की तुलना में) पर खरीदा है। विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध के कारण बढ़े ‘वॉर प्रीमियम’, बीमा खर्च और आपूर्ति की तत्काल आवश्यकता की वजह से यह कीमत चुकानी पड़ रही है।
आयात के आंकड़ों में बड़ा उलटफेर
जनवरी 2026 में भारत के कुल तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी गिरकर 19.3% रह गई थी, जो अक्टूबर 2022 के बाद का सबसे निचला स्तर था। हालांकि, इस नए मेगा सौदे के बाद मार्च और अप्रैल में रूस की हिस्सेदारी फिर से 35% के पार जाने की उम्मीद है।
मुख्य बिंदु:
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पश्चिम एशिया युद्ध के कारण Strait of Hormuz (हॉर्मुज जलडमरूमध्य) लगभग बंद, वैश्विक तेल आपूर्ति ठप।
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भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए रूस से 60 मिलियन (6 करोड़) बैरल कच्चे तेल का नया समझौता किया।
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अमेरिका ने भारत को 30 दिनों की विशेष छूट (Waiver) दी; समुद्र में फंसे रूसी तेल जहाजों को भारतीय रिफाइनरियों ने खरीदा।
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रूस एक बार फिर बना भारत का शीर्ष तेल आपूर्तिकर्ता; प्रीमियम कीमतों पर हुआ सौदा।
निष्कर्ष:
Strait of Hormuz के संकट ने भारत को अपनी ऊर्जा नीति में लचीलापन दिखाने पर मजबूर किया है। अमेरिका के साथ कूटनीतिक तालमेल और रूस के साथ व्यापारिक सक्रियता ने भारत को एक बड़े ऊर्जा संकट से बचा लिया है।
Matribhumisamachar


