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कोलकाता एयरपोर्ट रनवे से हटेगी 136 साल पुरानी मस्जिद: 30 साल पुराना गतिरोध सुलझाने में जुटी सुवेंदु अधिकारी सरकार

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कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का रनवे और परिचालन क्षेत्र जहाँ विमान खड़े हैं.

कोलकाता  गुरुवार, 28 मई 2026

कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (दमदम एयरपोर्ट) के विमान परिचालन क्षेत्र (Operational Area) में पिछले तीन दशकों से अटका एक बड़ा सुरक्षा गतिरोध अब निर्णायक समाधान की ओर बढ़ रहा है। हवाई अड्डे के बेहद संवेदनशील और हाई-सिक्योरिटी जोन में स्थित करीब 136 साल पुरानी ऐतिहासिक गौरीपुर जामे मस्जिद (जिसे बांकरा मस्जिद भी कहा जाता है) को वहां से सुरक्षित और सम्मानजनक स्थान पर शिफ्ट करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।

पश्चिम बंगाल में हुए हालिया राजनीतिक बदलाव के बाद, मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की नई राज्य सरकार और केंद्र सरकार के बीच बने बेहतरीन प्रशासनिक तालमेल के कारण इस 30 साल पुराने लंबित मामले पर सहमति बनती दिख रही है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय, उत्तर 24 परगना जिला प्रशासन और हवाई अड्डा प्रबंधन (AAI) ने इस दिशा में बैठकों का दौर शुरू कर दिया है।

सुरक्षा मानकों और विमानन नियमों का संकट

अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन मानकों के मुताबिक, किसी भी कमर्शियल हवाई अड्डे के रनवे से किसी भी स्थायी निर्माण या इमारत की न्यूनतम दूरी कम से कम 240 मीटर होनी चाहिए। इसके विपरीत, यह ऐतिहासिक मस्जिद एयरपोर्ट के सेकेंडरी (दूसरे) रनवे के बेहद करीब, महज 165 मीटर की दूरी पर स्थित है। इसके साथ ही यह हवाई अड्डे की मुख्य सुरक्षा दीवार के भी 150 मीटर अंदर आ चुकी है।

एयरपोर्ट अथॉरिटी के अधिकारियों का कहना है कि मस्जिद की इस भौगोलिक स्थिति के कारण विमानों के टेकऑफ और लैंडिंग के समय हमेशा एक बड़ा सुरक्षा जोखिम बना रहता है। इस वजह से रनवे का पूरा और प्रभावी इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है।

बड़े विमानों की लैंडिंग पर ब्रेक और तकनीकी बाधाएं

मस्जिद के बिल्कुल रनवे के अप्रोच पाथ (विमान के उतरने वाले रास्ते) में होने की वजह से सुरक्षा कारणों से सेकेंडरी रनवे के टचडाउन प्वाइंट (जहां विमान के पहिए जमीन छूते हैं) को करीब 88 मीटर आगे (दक्षिण की तरफ) खिसकाना पड़ा था।

टचडाउन प्वाइंट खिसकने के कारण रनवे की प्रभावी लंबाई काफी घट गई है। वर्तमान में इस छोटे रनवे पर एयरबस A320 या बोइंग 737 जैसे छोटे और मध्यम आकार के विमान तो उतर जाते हैं, लेकिन बोइंग 787 और एयरबस A330 जैसे बड़े (वाइड-बॉडी) अंतरराष्ट्रीय विमानों को उतारना तकनीकी रूप से नामुमकिन बना हुआ है। इसके अतिरिक्त:

  • कोहरे में लैंडिंग की समस्या: सर्दियों के दिनों में जब कोलकाता में भारी कोहरा होता है, तब मुख्य रनवे पर आधुनिक कैट-III इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (ILS) की मदद से विमान उतर जाते हैं। हालांकि, सेकेंडरी रनवे पर मस्जिद की मौजूदगी के कारण यह आधुनिक विजिबिलिटी सिस्टम आज तक नहीं लगाया जा सका है, जो आपातकालीन लैंडिंग की स्थिति में बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।

  • सुरक्षा एजेंसियों की सिरदर्दी: हाई-सिक्योरिटी रनवे जोन के भीतर हर दिन 20-25 और जुमे (शुक्रवार) के दिन करीब 80 से 100 नमाजियों को केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) की कड़ी चेकिंग के बाद विशेष बस से अंदर ले जाना और वापस लाना सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी रोजाना की चुनौती बना हुआ था।

पूर्ववर्ती सरकारों का रुख बनाम वर्तमान इच्छाशक्ति

ऐतिहासिक रिकॉर्ड्स के अनुसार, इस मस्जिद का निर्माण 1890 के दशक में हुआ था जब दमदम के आसपास का यह इलाका एक छोटा सा गांव हुआ करता था। 1924 में ब्रिटिश काल में यहाँ पहला एयरड्रम विकसित हुआ और 1962 में राज्य सरकार ने भूमि अधिग्रहण कर इसे एयरपोर्ट अथॉरिटी को सौंप दिया। तब से यह मस्जिद हवाई अड्डे के अंदर एक ‘इनक्लेव’ की तरह बनी रही।

1990 के दशक से ही एयरपोर्ट अथॉरिटी इस खतरे को लेकर राज्य सरकारों को पत्र लिख रही थी। मगर राजनीतिक और धार्मिक संवेदनशीलताओं के कारण पिछली वामपंथी और तृणमूल कांग्रेस सरकारों के समय यह मामला हमेशा ठंडे बस्ते में डाला जाता रहा। वर्ष 1995 में तो तत्कालीन मुख्यमंत्री ज्योति बसु ने इस प्रशासनिक फाइल पर सीधे ‘नॉट अप्रूव्ड’ लिख दिया था। मगर अब राज्य और केंद्र में वैचारिक व प्रशासनिक तालमेल होने से इस फाइल पर जमी धूल साफ हो गई है और मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने हवाई अड्डे की परिचालन क्षमता और सुरक्षा को प्राथमिकता दी है।

भव्य मस्जिद का प्रस्ताव और कब होगा अंतिम फैसला?

उत्तर 24 परगना के जिलाधिकारी (DM) कार्यालय में हुई हालिया उच्च स्तरीय बैठक में मस्जिद कमेटी और जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रतिनिधियों के साथ विस्तृत चर्चा की गई है। हवाई अड्डा प्रशासन और जिला प्रशासन ने मस्जिद कमेटी को एयरपोर्ट परिसर के बाहर सरकारी जमीन पर एक बड़ी, आधुनिक और भव्य मस्जिद अपने खर्च पर बनाकर देने का लिखित प्रस्ताव दिया है।

मस्जिद कमेटी के सदस्यों ने भी सकारात्मक रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि वे कोलकाता और देश के नागरिक उड्डयन विकास में बाधा नहीं बनना चाहते। हालांकि, उन्होंने कहा कि आस्था से जुड़े इस संवेदनशील विषय पर अंतिम और औपचारिक फैसला ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और दारुल उलूम देवबंद जैसे शीर्ष धार्मिक व कानूनी संगठनों से मशवरे के बाद ही आधिकारिक रूप से लिया जाएगा।

वर्तमान में कानून-व्यवस्था, आपसी भाईचारा और सामाजिक शांति बनाए रखने के लिए इस मामले की अगली व्यावहारिक कार्रवाई को आगामी ईद-उल-अजहा (बकरीद) के त्योहार तक रोक दिया गया है, जिसके तुरंत बाद इस स्थानांतरण प्रक्रिया पर अंतिम मुहर लग जाएगी।

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