लखनऊ । गुरुवार, 28 मई 2026
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के मैंगो बेल्ट कहे जाने वाले मलिहाबाद क्षेत्र के कसमंडी कलां गांव में एक ऐतिहासिक प्राचीन ढांचे को लेकर दो समुदायों के बीच विवाद गहरा गया है। लाखन आर्मी और पासी समाज के संगठनों ने मलिहाबाद थाने में मौलाना जमील अहमद (उर्फ जॉनी) के खिलाफ तहरीर देकर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिसके बाद से क्षेत्र में सांप्रदायिक तनाव की स्थिति बनी हुई है। आगामी त्योहारों और संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने विवादित स्थल पर धार्मिक गतिविधियों पर कड़े प्रतिबंध लागू कर दिए हैं।
क्या है पूरा विवाद और दोनों पक्षों के दावे?
विवाद की मुख्य वजह कसमंडी कलां में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) के पीछे बने दो प्राचीन ढांचे हैं, जिन्हें लेकर दोनों समुदायों द्वारा अलग-अलग ऐतिहासिक दावे किए जा रहे हैं:
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पासी समाज का दावा (किला और शिव मंदिर): लाखन पासी संगठन और पासी समाज के प्रतिनिधियों का तर्क है कि यह ढांचा 11वीं सदी (लगभग 980-1031 ईस्वी) के महाप्रतापी नागवंशी शासक राजपासी राजा कंस का प्राचीन किला और शिव मंदिर था। उनका दावा है कि इमारत की दीवारों पर तीन नाग, कलश और कमल के फूल की आकृतियां उकेरी गई हैं, जो सनातन हिंदू परंपरा और नागवंश का प्रतीक हैं। पासी समाज ने पुराने लखनऊ गजेटियर का हवाला देते हुए कहा कि राजा कंस ने विदेशी आक्रांता सैयद सालार मसूद गाजी के दो सेनापतियों (सैयद हातिम और सैयद खातिम) को इसी इलाके में मार गिराया था। उनका आरोप है कि बाद में इस ऐतिहासिक धरोहर का स्वरूप बदलकर इसे मकबरे और मस्जिद का रूप दे दिया गया।
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मुस्लिम पक्ष का दावा (मकबरा और वक्फ संपत्ति): दूसरी ओर, मुस्लिम समुदाय का कहना है कि यह स्थल पीढ़ियों पुराना मकबरा और कब्रिस्तान है, जो वक्फ बोर्ड के तहत आता है। उनका कहना है कि यहां लंबे समय से धार्मिक गतिविधियां होती रही हैं। हालांकि, पासी समाज का आरोप है कि ढांचे के भीतर बनी समाधि और बाहर लगा बोर्ड हाल ही में (पिछले कुछ महीनों में) लगाया गया है और यहां पहले नियमित नमाज नहीं होती थी।
मौलाना जमील अहमद पर लगे गंभीर आरोप
लाखन आर्मी ने स्थानीय प्रशासन और पुलिस को सौंपी तहरीर में मौलाना जमील अहमद पर सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने का सीधा आरोप लगाया है। मौलाना पर निम्नलिखित आरोप लगाए गए हैं:
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अवैध मदरसा संचालन: ऐतिहासिक स्थल परिसर में बिना किसी सरकारी मान्यता के ‘सुलेमानिया मदरसा’ चलाने का आरोप।
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धर्मांतरण और ब्रेनवॉश: नट जाति के लगभग 20 स्थानीय बच्चों को बहला-फुसलाकर उनका ब्रेनवॉश करने और अवैध धर्मांतरण का प्रयास करने का आरोप।
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तनाव फैलाना: बिना अनुमति के ऐतिहासिक स्थल पर नई धार्मिक गतिविधियां और नमाज शुरू कराकर क्षेत्र की कानून-व्यवस्था को खतरे में डालना।
स्थानीय हिंदूवादी संगठनों के विरोध के बाद मौलाना के वहां से चले जाने पर अखिल भारत हिंदू महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शिशिर चतुर्वेदी ने सवाल उठाए हैं कि यदि गतिविधियां वैध थीं, तो विरोध शुरू होते ही मौलाना वहां से क्यों चले गए।
प्रशासन की कार्रवाई और वर्तमान स्थिति
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए लखनऊ जिला प्रशासन और पुलिस पूरी तरह मुस्तैद है:
धार्मिक गतिविधियों पर रोक: कानून-व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द को बनाए रखने के लिए प्रशासन ने इस विवादित परिसर के भीतर आगामी बकरीद की नमाज और किसी भी नए पक्ष द्वारा पूजा/सुंदरकांड पाठ जैसी सभी धार्मिक गतिविधियों पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी है।
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सुरक्षा के कड़े इंतजाम: कसमंडी कलां इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। पीएसी (PAC) और कई थानों की पुलिस फोर्स को मौके पर तैनात किया गया है। ड्रोन कैमरों और स्थानीय खुफिया तंत्र (LIU) के जरिए स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
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विवाद के बीच जुमे की नमाज: खुफिया इनपुट के बाद पुलिस सुरक्षा के कड़े साये में पिछले शुक्रवार को परिसर में शांतिपूर्ण ढंग से जुमे की नमाज संपन्न कराई गई थी, जिसके बाद पासी समाज ने प्रदर्शन कर अपना विरोध दर्ज कराया।
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पुरातत्व विभाग से जांच की मांग: लाखन पासी संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरज पासी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, जिलाधिकारी (DM) और उपजिलाधिकारी (SDM) को ज्ञापन सौंपकर इस प्राचीन इमारत की पुरातत्व विभाग (ASI) से वैज्ञानिक जांच कराने की मांग की है ताकि सच्चाई सामने आ सके।
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