बुलंदशहर । गुरुवार, 28 मई 2026
उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले के जहांगीराबाद इलाके से एक तनावपूर्ण खबर सामने आई है। ईद के पावन अवसर पर जहां चारों तरफ उल्लास का माहौल होना चाहिए था, वहीं जहांगीराबाद ईदगाह मस्जिद के बाहर पुलिस प्रशासन और स्थानीय नेताओं के बीच भारी नोकझोंक देखने को मिली। इस विवाद का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसमें क्षेत्राधिकारी (सीओ) हाथ जोड़ते नजर आ रहे हैं।
आइए समझने की कोशिश करते हैं कि आखिर उस सुबह ग्राउंड जीरो पर ऐसा क्या हुआ जिसने ईद की खुशियों के बीच अचानक तनाव पैदा कर दिया।
विवाद की शुरुआत: नमाजियों की शिकायत और नेताओं की एंट्री
जानकारी के अनुसार, ईद की सुबह जहांगीराबाद स्थित मुख्य ईदगाह में हजारों की संख्या में अकीदतमंद नमाज अदा करने पहुंचे थे। विवाद तब शुरू हुआ जब ईदगाह के बाहर मौजूद कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि पुलिस उन्हें अंदर जाने और नमाज पढ़ने से रोक रही है।
उसी समय वहां समाजवादी पार्टी (सपा) के पूर्व विधायक चौधरी होशियार सिंह और जिला पंचायत सदस्य सुनील चरोरा मौजूद थे। जब नाराज नमाजियों ने अपनी शिकायत इन नेताओं के सामने रखी, तो मामला राजनीतिक और प्रशासनिक बहस में बदल गया। सपा नेता तुरंत पुलिस अधिकारियों के पास पहुंचे और जनता को रोकने का कारण पूछने लगे।
नेताओं का आरोप: ‘त्योहार के दिन पुलिस की मनमानी’
पूर्व विधायक चौधरी होशियार सिंह और सुनील चरोरा ने सीओ अनूपशहर विकास प्रताप सिंह चौहान पर सीधे तौर पर मनमानी करने का आरोप लगाया। सपा नेताओं का कहना था कि:
-
ईद जैसे पवित्र और संवेदनशील मौके पर नागरिकों को उनकी इबादत से रोकना पूरी तरह गलत है।
-
पुलिस का रवैया सहयोगात्मक होने के बजाय अड़ियल था, जिससे त्योहार की खुशी में खलल पड़ा।
देखते ही देखते नेताओं के समर्थन में वहां मौजूद भीड़ भी इकट्ठा हो गई और पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी और हंगामा शुरू हो गया। माहौल बिगड़ता देख स्थिति काफी संवेदनशील हो गई थी। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, बढ़ते विवाद को शांत करने और कानून-व्यवस्था को काबू में रखने के लिए सीओ विकास प्रताप सिंह को हाथ जोड़कर प्रदर्शनकारियों से बात करनी पड़ी, जिसके बाद लोग शांत हुए।
प्रशासन का पक्ष: ‘जगह नहीं बची थी, नेताओं ने भीड़ को उकसाया’
दूसरी ओर, सीओ अनूपशहर विकास प्रताप सिंह चौहान ने नेताओं के इन सभी आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। पुलिस का कहना है कि उनकी मंशा किसी को रोकने की नहीं, बल्कि सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने की थी।
सीओ ने स्थिति को स्पष्ट करते हुए निम्नलिखित बातें कहीं:
-
समय और क्षमता: सुबह ठीक 7:30 बजे तक ईदगाह परिसर अपनी पूरी क्षमता से भर चुका था और मुख्य नमाज शुरू हो चुकी थी। अंदर तिल रखने की भी जगह नहीं बची थी।
-
बैरिकेडिंग तोड़ना: जब अंदर जगह नहीं थी, तो सुरक्षा के लिहाज से बैरिकेडिंग लगाई गई थी। इसके बावजूद कुछ लोग जबरन बैरिकेडिंग तोड़कर अंदर घुसने का प्रयास करने लगे, जिससे भगदड़ जैसी स्थिति बन सकती थी।
-
उकसाने का आरोप: पुलिस अधिकारी का आरोप है कि पूर्व विधायक होशियार सिंह, मुकेश शर्मा, ब्लॉक प्रमुख मनोज खालौर और उनके साथियों ने व्यवस्था में सहयोग करने के बजाय वहां मौजूद धार्मिक भीड़ को उकसाने का काम किया।
पुलिस की कार्रवाई: बुलंदशहर पुलिस के मुताबिक, स्थिति बिगड़ने से रोकने के लिए पुलिस ने सूझबूझ से काम लिया। जो लोग देर से आए थे, उन्हें समझा-बुझाकर पास की दूसरी मस्जिदों में भेजा गया ताकि वे शांतिपूर्वक नमाज अदा कर सकें।
निष्कर्ष और वर्तमान स्थिति
बुलंदशहर प्रशासन का कहना है कि क्षेत्र में पूरी तरह शांति व्यवस्था कायम है। त्योहारों के मौके पर इस तरह की प्रशासनिक और राजनीतिक नोकझोंक अक्सर कानून व्यवस्था के लिए चुनौती बन जाती है, लेकिन राहत की बात यह रही कि समय रहते स्थिति को संभाल लिया गया और कोई अप्रिय घटना नहीं घटी।
Matribhumisamachar


