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कानपुर में गूंजी राजर्षि छत्रपति शाहूजी महाराज की गाथा: कुर्मी परिवार समागम ने मेधावी बच्चों को किया सम्मानित

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कानपुर बर्रा में कुर्मी परिवार समागम के प्रतिभा सम्मान समारोह में मेधावी बच्चों को स्मृति चिन्ह व अतिथि।

कानपुर। रविवार, 28 जून 2026

समाज को आगे बढ़ाने का सबसे सशक्त माध्यम ‘शिक्षा’ और ‘संगठन’ है। इसी भावना को साकार करते हुए रविवार को कानपुर के विश्व बैंक बर्रा स्थित स्मृति पैलेस में कुर्मी परिवार समागम द्वारा एक भव्य विचार गोष्ठी एवं प्रतिभा सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। यह विशेष कार्यक्रम महान समाज सुधारक राजर्षि छत्रपति शाहूजी महाराज की जयन्ती के पावन अवसर पर आयोजित किया गया था।

समाज को संगठित और आत्मनिर्भर बनाने का संकल्प

कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए आशीष सचान ने कुर्मी परिवार समागम के मुख्य उद्देश्यों को सभी के सामने रखा। उन्होंने कहा कि संगठन का एकमात्र लक्ष्य समाज के लोगों को एकजुट करना और जरूरत पड़ने पर धन एवं बल से हर संभव मदद पहुँचाना है।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित लेबर कमिश्नर नवनीत वर्मा ने अभिभावकों को एक बेहद जरूरी संदेश दिया। उन्होंने कहा:

“अगर समाज को प्रगति के पथ पर ले जाना है, तो बच्चों को उच्च शिक्षा देना सबसे जरूरी है। इसके साथ ही, अब हमें बच्चों को सिर्फ नौकरी के भरोसे न रखकर व्यवसाय (Business) की ओर भी प्रेरित करना होगा, तभी हमारा देश सच्चे मायनों में आत्मनिर्भर बनेगा।”

राजर्षि छत्रपति शाहूजी महाराज का गौरवशाली इतिहास

विचार गोष्ठी के दौरान एच.बी.टी.यू. (HBTU) के प्रोफेसर डॉ. बृजेश कटियार ने छत्रपति शाहूजी महाराज के जीवन और उनके महान कार्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि शाहूजी महाराज का जन्म 1874 में हुआ था और वे 1894 में राजा बने। वर्ष 1922 में उनका महापरिनिर्वाण हुआ।

डॉ. कटियार ने शाहूजी महाराज के इतिहास से जुड़े कुछ बेहद महत्वपूर्ण तथ्य साझा किए:

  • ‘राजर्षि’ की उपाधि: सन् 1919 में कानपुर के इसी ऐतिहासिक फूलबाग मैदान में अखिल भारतीय कुर्मी क्षत्रिय समाज द्वारा उन्हें ‘राजर्षि’ की उपाधि से नवाजा गया था।

  • अनिवार्य शिक्षा के जनक: उन्होंने अपने राज्य में सबसे पहले निशुल्क और अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा की शुरुआत की और गांव-गांव स्कूल खुलवाए।

  • महिला अधिकार: वे एक ऐसे दूरदर्शी राजा थे जिन्होंने महिलाओं को समाज में बराबरी का हक देते हुए संपत्ति का कानूनी अधिकार दिलाया।

प्रतिभाओं का सम्मान और पर्यावरण संरक्षण की अनूठी पहल

इस समागम का सबसे खूबसूरत पल वह था जब समाज के होनहार मेधावी छात्र-छात्राओं को मंच पर सम्मानित किया गया। समाज सेवी और पत्रकार डॉ. अनूप सचान ने बच्चों की हौसलाअफजाई की। कार्यक्रम के संयोजक आशीष सचान ने हर वर्ष प्रतिभावान छात्रों का इसी प्रकार सम्मान करने का आश्वासन दिया।

सम्मान पाने वाले होनहारों में निकिता सचान, अनुराग सचान, पार्थिवी सचान, वेदांश सचान, तनु हरि, प्रतिष्ठा सचान, रोहित सचान, अनन्या सचान, कुणाल पटेल, आर्यन उमराव, रवीश कटियार, अदिति सिंह, प्रिंस, प्राप्ति सचान, कुशाग्र सचान, सृष्टि सिंह और याशी सचान शामिल रहीं। इन सभी बच्चों को स्मृति चिन्ह (Momento) देकर प्रोत्साहित किया गया।

इस समारोह में केवल बच्चों की प्रतिभा को ही नहीं सराहा गया, बल्कि प्रकृति को बचाने का भी संदेश दिया गया। संस्कार शाला के शैलेंद्र सचान ने एक अनूठी मिसाल पेश करते हुए सभी सम्मानित बच्चों को उपहार स्वरूप एक-एक पौधा (Plant) भेंट किया।

गरिमामयी उपस्थिति

कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रख्यात समाजसेवी सुदामा प्रसाद ‘अकेला’ ने की तथा मंच का कुशल संचालन एडवोकेट राजेंद्र प्रसाद वर्मा द्वारा किया गया। अतिथियों का स्वागत अरविंद सिंह सचान, बृजेंद्र स्वरूप, अनुक्रम सिंह, क्रांति कटियार और अंजनी वर्मा ने मिलकर किया।

इस मौके पर बी.डी. सचान, शिव सचान फौजी, जे.एन. कटियार, राजेश सचान, योगेंद्र सचान, पूर्व बीएसए (BSA) देवेंद्र स्वरूप सचान, डॉ. अजीत सचान, अंकिता सचान, जितेंद्र सचान, हेमेंन्द्र सचान, विकास सचान, संदीप उत्तम, सुमित सचान, शशिकांत, नागेंद्र कुमार, हीरेंद्र प्रताप सिंह और नमिता कटियार सहित भारी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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