लखनऊ. कानपुर में आयकर विभाग (Income Tax Department) की टीमों ने एक बड़ी और सुनियोजित कार्रवाई करते हुए रजिस्ट्री कार्यालय (Registry Office) और शहर के पॉश इलाके सिविल लाइंस (Civil Lines) में कई रियल एस्टेट डेवलपर्स, बिल्डरों और भू-माफियाओं के ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। यह कार्रवाई प्रॉपर्टी डीलिंग में बड़े पैमाने पर नकद लेनदेन (Cash Transactions), अंडर-वैल्यूएशन और सरकारी राजस्व चोरी के इनपुट के आधार पर की गई।
आयकर विभाग के सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई सिर्फ स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार अन्य जिलों और बड़े रियल एस्टेट नेटवर्क से भी जुड़े हो सकते हैं।
🔍 कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य
इस पूरे ऑपरेशन का फोकस निम्न बिंदुओं पर रहा:
- प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन में बड़े पैमाने पर कैश डीलिंग
- जमीनों की रजिस्ट्री वास्तविक कीमत से कम मूल्य (Under-valuation) पर करना
- बेनामी संपत्तियों के जरिए काले धन का निवेश
- रियल एस्टेट सेक्टर में समानांतर अर्थव्यवस्था (Parallel Economy) का संचालन
- सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाने वाले संगठित नेटवर्क का खुलासा
📑 जब्त दस्तावेज और अहम सबूत
छापेमारी के दौरान रजिस्ट्री कार्यालय से भारी मात्रा में ऐसे दस्तावेज बरामद किए गए हैं, जिनसे साफ संकेत मिलता है कि:
- सर्किल रेट से काफी कम पर रजिस्ट्रेशन किए गए
- अलग-अलग नामों से संपत्तियों की खरीद-फरोख्त
- नकद भुगतान (On-Money) को सिस्टमेटिक तरीके से मैनेज किया जा रहा था
- डिजिटल रिकॉर्ड और ऑफलाइन रसीदों में भारी अंतर पाया गया
💰 जांच में सामने आए बड़े आंकड़े
अब तक की शुरुआती जांच में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं:
1️⃣ ₹3,500 करोड़ की वित्तीय विसंगतियां
लगभग ₹3,500 करोड़ के ऐसे ट्रांजेक्शन मिले हैं जिनका सही लेखा-जोखा नहीं रखा गया या जानबूझकर छिपाया गया।
2️⃣ ₹800 करोड़ की टैक्स चोरी
आयकर विभाग को करीब ₹800 करोड़ की प्रत्यक्ष टैक्स चोरी के पुख्ता सबूत मिले हैं, जो:
- बेनामी संपत्तियों
- अघोषित आय
- फर्जी कंपनियों के जरिए निवेश
से जुड़े हुए हैं।
3️⃣ कच्चे पर्चे और डिजिटल डेटा
छापेमारी में:
- बिना हिसाब वाली रसीदें (कच्चे पर्चे)
- लैपटॉप
- पेनड्राइव
- मोबाइल डेटा
बरामद हुआ है, जो अंडरग्राउंड इकॉनमी नेटवर्क की पुष्टि करता है।
🏢 रजिस्ट्री कार्यालय की भूमिका संदेह के घेरे में
मामला इसलिए और गंभीर हो गया है क्योंकि जांच में रजिस्ट्री कार्यालय के कुछ अधिकारियों और बाबुओं की संलिप्तता का संदेह सामने आया है।
संभावित आरोप:
- सर्किल रेट से कम मूल्यांकन
- ऑन-मनी सिस्टम को संरक्षण
- नकद लेनदेन को नजरअंदाज करना
- फर्जी पहचान पत्रों से रजिस्ट्री
- फर्जी पैन कार्ड का इस्तेमाल
🚨 आगे क्या कार्रवाई हो सकती है?
🔐 बैंक लॉकरों की जांच
कई संदिग्ध बिल्डरों और कारोबारियों के बैंक लॉकर फ्रीज किए जा चुके हैं, जिन्हें जल्द खोला जाएगा।
🕵️ ED की एंट्री संभव
चूंकि मामला 100 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है, इसलिए प्रवर्तन निदेशालय (ED) की एंट्री लगभग तय मानी जा रही है।
⚖️ अधिकारियों पर कार्रवाई
रजिस्ट्री विभाग के दोषी कर्मचारियों पर:
- विभागीय जांच
- निलंबन
- कानूनी कार्रवाई
की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।
📊 विशेषज्ञों की राय
आर्थिक मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि यह कार्रवाई केवल छापेमारी नहीं, बल्कि पूरे रियल एस्टेट सेक्टर की सफाई अभियान की शुरुआत है। इससे:
- रियल एस्टेट में पारदर्शिता बढ़ेगी
- कैश इकॉनमी पर नियंत्रण होगा
- सरकारी राजस्व में बढ़ोतरी होगी
- बेनामी निवेश नेटवर्क कमजोर पड़ेगा
📌 निष्कर्ष
कानपुर में आयकर विभाग की यह कार्रवाई अब तक की सबसे बड़ी रियल एस्टेट जांचों में से एक मानी जा रही है। जिस तरह के आंकड़े सामने आ रहे हैं, उससे साफ है कि आने वाले दिनों में:
- और बड़ी गिरफ्तारियां
- नए नामों का खुलासा
- बड़े बिल्डर नेटवर्क का भंडाफोड़
संभावित है।
यह केस आने वाले समय में पूरे उत्तर प्रदेश के रियल एस्टेट सेक्टर के लिए एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है।
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