मुंबई | सोमवार, 30 मार्च 2026
भारतीय शेयर बाजार के लिए वित्त वर्ष 2025-26 का अंत बेहद दर्दनाक रहा। सप्ताह के पहले ही दिन सोमवार को दलाल स्ट्रीट पर “खून-खराबा” देखने को मिला। मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध के तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में आए भूचाल ने निवेशकों के हौसले पस्त कर दिए। सेंसेक्स और निफ्टी में 2% से ज्यादा की भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे एक ही दिन में निवेशकों की करीब ₹10 लाख करोड़ की संपत्ति खाक हो गई।
📊 बाजार का क्लोजिंग डेटा (30 मार्च 2026)
| इंडेक्स | गिरावट (अंक) | प्रतिशत | क्लोजिंग लेवल |
| BSE सेंसेक्स | 🔻 1,635.67 | 2.22% | 71,947.55 |
| NSE निफ्टी 50 | 🔻 488.20 | 2.14% | 22,331.40 |
🚨 गिरावट के 5 बड़े ‘विलेन’: क्यों कांप गया बाजार?
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मिडिल ईस्ट में युद्ध का 5वां हफ्ता: ईरान-इजरायल-अमेरिका के बीच जारी संघर्ष ने वैश्विक सप्लाई चेन को हिला दिया है। स्ट्रैट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में ब्लॉकेज की आशंका से निवेशक डरे हुए हैं।
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क्रूड ऑयल का ‘शॉक’: ब्रेंट क्रूड की कीमतें $115 प्रति बैरल के पार निकल गई हैं। भारत अपनी जरूरत का 85% तेल आयात करता है, जिससे चालू खाता घाटा (CAD) बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है।
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रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर: सोमवार को भारतीय रुपया पहली बार ₹95 प्रति डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गया। कमजोर रुपये ने विदेशी निवेशकों (FIIs) की घबराहट और बढ़ा दी।
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FIIs की ऐतिहासिक निकासी: मार्च महीने में विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से रिकॉर्ड ₹1.14 लाख करोड़ निकाल लिए हैं। आज अकेले एक दिन में भारी बिकवाली देखी गई।
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आईटी और बैंकिंग में बड़ी गिरावट: दिग्गज शेयरों जैसे SBI, बजाज फाइनेंस और कोटक बैंक में भारी दबाव रहा। ग्लोबल टेक स्पेंडिंग में कमी की आशंका से IT सेक्टर भी लाल निशान में डूबा रहा।
📉 FY 2025-26: 2020 के बाद सबसे बुरा साल
यह साल निवेशकों के लिए किसी बुरे सपने जैसा रहा। वित्त वर्ष 2025-26 में:
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सेंसेक्स: लगभग 7% (5,467 अंक) टूटा।
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निफ्टी: करीब 5% (1,187 अंक) की गिरावट दर्ज की गई।
यह पिछले 6 सालों का सबसे खराब प्रदर्शन है, जो 2020 के कोविड क्रैश की याद दिलाता है।
🧠 विशेषज्ञों की राय: अब निवेशक क्या करें?
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि जब तक भू-राजनीतिक तनाव कम नहीं होता, बाजार में “Buy on Dips” (गिरावट पर खरीदारी) की रणनीति भी जोखिम भरी हो सकती है।
“बाजार इस समय ‘डर’ के साये में है। निवेशकों को फिलहाल एग्रेसिव होने के बजाय कैश बचाकर रखना चाहिए। निफ्टी के लिए 22,000 का स्तर एक मजबूत सपोर्ट हो सकता है, लेकिन अगर युद्ध और भड़कता है, तो गिरावट और गहरी हो सकती है।” — मार्केट एनालिस्ट
💡 आपके लिए अगला कदम
क्या आप जानना चाहते हैं कि इस गिरावट के बीच कौन से ‘डिफेंसिव’ सेक्टर्स (जैसे फार्मा या FMCG) आपके पोर्टफोलियो को बचा सकते हैं? या क्या आप रुपये की गिरावट का अपने व्यक्तिगत फाइनेंस पर असर समझना चाहेंगे?
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