लखनऊ. कानपुर ने एक बार फिर भारत के डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। शहर स्थित डिफेंस पीएसयू Gliders India Limited (GIL) की प्रमुख इकाई Ordnance Parachute Factory (OPF) को Vietnam Air Force से ₹30 करोड़ से अधिक का एक्सपोर्ट ऑर्डर प्राप्त हुआ है।
यह ऑर्डर Sukhoi Su-30 फाइटर जेट के लिए ब्रेक पैराशूट और पायलट पैराशूट की आपूर्ति से जुड़ा है, जो किसी भी आधुनिक लड़ाकू विमान के लिए मिशन-क्रिटिकल सेफ्टी सिस्टम माने जाते हैं।
📌 ऑर्डर की मुख्य खासियतें
🔁 वियतनाम से रिपीट ऑर्डर
यह वियतनाम से मिला दूसरा बड़ा रक्षा निर्यात ऑर्डर है। रिपीट ऑर्डर यह साबित करता है कि भारतीय रक्षा उत्पाद अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरे उतर रहे हैं और वैश्विक सेनाओं का भरोसा लगातार बढ़ रहा है।
🇮🇳 आत्मनिर्भर भारत को नई मजबूती
इस प्रोजेक्ट के तहत बनने वाले सभी पैराशूट पूरी तरह स्वदेशी तकनीक, कच्चे माल और मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस से कानपुर में ही तैयार किए जाएंगे। यह Make in India, Atmanirbhar Bharat और Defence Export Policy के लक्ष्यों को सीधे तौर पर मजबूत करता है।
🛡️ मिशन-क्रिटिकल और सेफ्टी-फर्स्ट सिस्टम
सुखोई-30 जैसे भारी और हाई-स्पीड फाइटर जेट की सुरक्षित लैंडिंग के लिए ब्रेक पैराशूट बेहद अहम होता है, खासकर छोटे रनवे, गीली सतह या आपात स्थितियों में।
⚙️ तकनीकी बारीकियां: कैसे काम करते हैं ये पैराशूट?
🪂 ब्रेक पैराशूट सिस्टम
- उपयोग: फाइटर जेट की लैंडिंग दूरी कम करना
- तैनाती गति: लगभग 180 से 300 किमी/घंटा
- फायदे:
- रनवे की आवश्यकता कम
- ब्रेक और टायर सिस्टम पर कम दबाव
- आपात स्थिति में अतिरिक्त सुरक्षा
🧑✈️ पायलट पैराशूट (PSU-36 सीरीज़)
- सिस्टम का हिस्सा: इजेक्शन सीट
- ऑपरेशनल सीमा:
- गति: 650 किमी/घंटा तक
- ऊंचाई: 6000 मीटर तक
- भूमिका:
- आपात स्थिति में पायलट को सुरक्षित बाहर निकालना
- हवा में स्थिरता और नियंत्रित लैंडिंग सुनिश्चित करना
🌏 भारत की रक्षा निर्यात रणनीति में अहम कड़ी
हाल के वर्षों में भारत का फोकस केवल रक्षा उपकरणों के आयात पर नहीं, बल्कि हाई-टेक डिफेंस एक्सपोर्ट पर भी रहा है। कानपुर स्थित OPF जैसी इकाइयाँ भारत को उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में ला रही हैं, जो फाइटर जेट सेफ्टी सिस्टम जैसे विशेष उत्पादों का निर्यात करने में सक्षम हैं।
यह ऑर्डर भारत-वियतनाम के बीच रणनीतिक रक्षा सहयोग को भी नई ऊंचाई देता है और एशिया-प्रशांत क्षेत्र में भारत की विश्वसनीय रक्षा साझेदार की छवि को मजबूत करता है।
🏭 कानपुर: पारंपरिक शहर से हाई-टेक डिफेंस हब तक
कभी कपड़ा और चमड़ा उद्योग के लिए पहचाने जाने वाला कानपुर अब
- रक्षा उत्पादन
- पैराशूट टेक्नोलॉजी
- एयरोस्पेस सेफ्टी सिस्टम
जैसे क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान बना रहा है। यह उपलब्धि न सिर्फ OPF या GIL की सफलता है, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश और भारत की डिफेंस इंडस्ट्री के लिए गर्व का विषय है।
वियतनाम एयरफोर्स से मिला ₹30 करोड़ से अधिक का यह एक्सपोर्ट ऑर्डर यह साबित करता है कि कानपुर अब वैश्विक रक्षा आपूर्ति श्रृंखला का अहम हिस्सा बन चुका है। स्वदेशी तकनीक, अंतरराष्ट्रीय भरोसा और रणनीतिक सहयोग—तीनों का यह संगम भारत को डिफेंस सेक्टर में नई ऊंचाइयों पर ले जा रहा है।
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