नई दिल्ली । सोमवार, 31 अगस्त 2026
देश भर में एसिड (तेजाब) की आसान उपलब्धता और उससे जुड़ी भयावह घटनाओं पर रोक लगाने के लिए शीर्ष अदालत ने एक ऐतिहासिक और कड़ा रुख अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से सीधा सवाल किया है कि क्या एसिड की खुदरा (रिटेल) बिक्री पर देशव्यापी पूर्ण प्रतिबंध (Complete Ban) लगा दिया जाना चाहिए या फिर इसे अत्यंत सख्त और नियंत्रित नियमों के तहत ही बेचने की अनुमति दी जानी चाहिए।
मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने एसिड अटैक सर्वाइवर शाहीन मलिक द्वारा दायर याचिका और उससे जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश जारी किया। अदालत ने स्पष्ट रूप से माना कि वर्ष 2013 में एसिड की बिक्री को नियंत्रित करने के लिए जारी किए गए दिशा-निर्देश अब समय के साथ निष्प्रभावी और पुराने हो चुके हैं और ज़मीनी स्तर पर इनका पालन नहीं हो रहा है।
2013 के नियमों की असफलता पर कोर्ट की चिंता
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर गहरा असंतोष व्यक्त किया कि 2013 के ऐतिहासिक फैसलों और गाइडलाइंस के बावजूद बाजार में एसिड की खरीद-बिक्री बिना किसी कड़े पर्यवेक्षण के आसानी से हो रही है।
अदालत ने कहा:
“2013 के दिशा-निर्देश लगभग अप्रचलित हो गए हैं और उनका प्रभावी ढंग से पालन नहीं किया जा रहा है। पीड़ितों पर यह बोझ नहीं डाला जा सकता कि वे कानून और व्यवस्था का नियमन कैसे करें। सरकार को इस पर ठोस और जवाबदेह ढांचा तैयार करना होगा।”
एसिड बिक्री पर प्रस्तावित संभावित कड़े नियम
अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि केंद्र सरकार एसिड की खुदरा बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाती है, तो एसिड नियंत्रण के लिए निम्नलिखित सख्त और पारदर्शी व्यवस्था लागू की जानी चाहिए:
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डिजिटल और स्वचालित ट्रैकिंग सिस्टम: एसिड की कुल आपूर्ति, बिक्री और दुकान में उपलब्ध स्टॉक की वास्तविक समय (Real-Time) में निगरानी के लिए एक स्वचालित केंद्रीय रिकॉर्ड सिस्टम बनाया जाए।
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पहचान एवं उद्देश्य का ब्यौरा: एसिड खरीदने वाले व्यक्ति के फोटो पहचान पत्र के साथ-साथ खरीद के स्पष्ट उद्देश्य का लिखित रिकॉर्ड और रजिस्टर में एंट्री अनिवार्य की जाए।
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उम्र सीमा संबंधी नियम: खुदरा बिक्री के लिए विशेष पात्रता और खरीदार की न्यूनतम आयु (जैसे 50 वर्ष से अधिक) से जुड़े कड़े नियम तय किए जाएं।
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घरेलू सफाई विकल्पों का उपयोग: औद्योगिक आवश्यकताओं को छोड़कर आम घरेलू सफाई के लिए एसिड की जगह बाजार में उपलब्ध सुरक्षित रासायनिक विकल्पों को बढ़ावा दिया जाए।
पीड़ितों के पुनर्वास और निशुल्क इलाज पर बड़ा निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने केवल बिक्री पर ही नहीं, बल्कि एसिड अटैक का शिकार हुए पीड़ितों (Survivors) के जीवन को बेहतर बनाने और उनके संपूर्ण पुनर्वास पर जोर दिया है। अदालत ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को 6 सप्ताह के भीतर विस्तृत पुनर्वास योजना तैयार करने का निर्देश दिया है।
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निःशुल्क चिकित्सा एवं उपचार: पीड़ितों को तत्काल और पूर्ण इलाज मुहैया कराना।
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वित्तीय सहायता एवं मुफ़्त शिक्षा: पीड़ितों को उच्च स्तर तक मुफ्त शिक्षा और आर्थिक पुनर्वास (अनुग्रह राशि/मानदेय) देना।
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लंबित मामलों की निगरानी: देश की अदालतों में लंबित एसिड अटैक के मामलों, दर्ज एफआईआर और चार्जशीट की स्थिति पर सभी उच्च न्यायालयों और राज्यों से आंकड़े मांगे गए हैं।
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जागरूकता अभियान: स्कूलों व कॉलेजों के पाठ्यक्रम में प्राथमिक चिकित्सा (First Aid Protocol) और दुर्घटना के बाद के उपचार से संबंधित जागरूकता शामिल करने का सुझाव दिया गया है।
क्या सुप्रीम कोर्ट ने पूर्ण बैन का आदेश दे दिया है?
नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल एसिड की खुदरा बिक्री पर तुरंत पूर्ण प्रतिबंध लगाने का अंतिम आदेश जारी नहीं किया है। अदालत ने केंद्र सरकार और सभी राज्य सरकारों से 6 सप्ताह के भीतर इस पर विस्तृत जवाब मांगा है। अदालत इस विकल्प पर गंभीरता से विचार कर रही है कि क्या एसिड को बाजार में बैन किया जाए या केवल उद्योग/संस्थानों के लिए सीमित रखा जाए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. सुप्रीम कोर्ट ने एसिड की बिक्री पर केंद्र सरकार से क्या मांगा है?
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा है कि एसिड की रिटेल बिक्री पर पूरी तरह बैन लगाया जाए या इसे सख्त और स्वचालित निगरानी तंत्र के तहत विनियमित किया जाए।
2. क्या 2013 के एसिड नियम अभी भी प्रभावी हैं?
सुप्रीम कोर्ट के अनुसार 2013 के दिशा-निर्देश अब पुराने (Obsolete) हो चुके हैं और राज्यों में उनका कड़ाई से पालन नहीं हो पा रहा है।
3. एसिड अटैक पीड़ितों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने क्या निर्देश दिए हैं?
कोर्ट ने सभी राज्यों को 6 सप्ताह के भीतर पीड़ितों के लिए मुफ्त इलाज, मुआवजा, पुनर्वास और उच्च शिक्षा तक मुफ्त व्यवस्था प्रदान करने वाली योजना बनाने का आदेश दिया है।
अस्वीकरण (Disclaimer)
अस्वीकरण: यह लेख सुप्रीम कोर्ट में चल रही जनहित याचिका पर हुई नवीनतम सुनवाई और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध अदालती कार्यवाहियों व कानूनी रिपोर्टों पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल आम जनता को जागरूक और सूचित करना है। किसी भी कानूनी सलाह या आधिकारिक जानकारी के लिए संबंधित विभाग या आधिकारिक अदालती आदेश का संदर्भ लें।
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