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बंगाल में बड़ा राजनीतिक भूचाल: बागी गुट ने ममता बनर्जी को पद से हटाया, अरूप रॉय बने ‘तृणमूल’ के नए अध्यक्ष

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टीएमसी में ममता के युग का अंत

कोलकाता । सोमवार, 22 जून 2026

पश्चिम बंगाल की राजनीति में सोमवार को एक ऐसा ऐतिहासिक और अभूतपूर्व मोड़ आया जिसने राज्य के सियासी गलियारों को हिलाकर रख दिया है। विधानसभा के बजट सत्र की समाप्ति के ठीक बाद, तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी गुट ने न्यूटाउन के एक प्रतिष्ठित होटल में बेहद गुप्त और बिजली जैसी तेज रफ्तार से एक ‘स्पेशल सेशन’ आयोजित किया।

महज 31 मिनट 20 सेकंड तक चली इस बैठक में बागी गुट ने खुद को ‘असली तृणमूल’ घोषित करते हुए पार्टी की संस्थापक ममता बनर्जी को चेयरपर्सन (अध्यक्ष) के पद से हटा दिया। उनकी जगह हावड़ा सेंट्रल के वरिष्ठ विधायक और पूर्व मंत्री अरूप रॉय को नया राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। बागी नेताओं ने ममता बनर्जी को पूरी तरह निष्कासित न करते हुए, उनके लिए संगठन में ‘मुख्य सलाहकार’ (Chief Advisor) के पद की पेशकश की है।

अभिषेक बनर्जी सस्पेंड, नई नेशनल वर्किंग कमेटी (NWC) का गठन

रिताब्रता बनर्जी और अन्य असंतुष्ट नेताओं के नेतृत्व वाले इस गुट ने एक और बड़ा कदम उठाते हुए ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी को पार्टी के ‘ऑल इंडिया जनरल सेक्रेटरी’ (सर्वसर्वेश्रवा महासचिव) के पद से सस्पेंड कर दिया है।

बागी गुट ने पार्टी के संविधान की धारा 20 (Article 20) का हवाला दिया, जिसके तहत हर 3 साल में नेशनल वर्किंग कमेटी (NWC) का पुनर्गठन होना अनिवार्य है। नेताओं का दावा है कि आखिरी कमेटी 12 फरवरी 2022 को बनी थी, जिसका कार्यकाल समाप्त होने के बाद पार्टी में ‘संवैधानिक संकट’ खड़ा हो गया था। इसी को आधार बनाकर 30 सदस्यों वाली नई नेशनल वर्किंग कमेटी घोषित की गई है:

  • राष्ट्रीय अध्यक्ष (Chairperson): अरूप रॉय (विधायक, हावड़ा सेंट्रल)

  • नेशनल जनरल सेक्रेटरी: रिताब्रता बनर्जी, जावेद खान और संदीपन साहा (निष्कासित/बागी विधायक)

  • राष्ट्रीय उपाध्यक्ष: फिरहाद हकीम, अरूप बिस्वास, रथिन घोष और सबीना यास्मिन

न्यूटाउन होटल में भारी शक्ति प्रदर्शन

इस स्पेशल सेशन में बागी गुट ने पार्टी संगठन और विधायी विंग पर अपनी मजबूत पकड़ का दावा किया। बैठक के मुख्य आंकड़े इस प्रकार हैं:

श्रेणी उपस्थित संख्या (दावा)
बागी विधायक (MLAs) लगभग 60 विधायक
पार्षद (Councillors) कोलकाता और अन्य निकायों के 70 के करीब वर्तमान व पूर्व पार्षद
कुल प्रतिनिधि और नेता जिलों से आए ब्लॉक अध्यक्षों और पूर्व विधायकों सहित करीब 500 नेता
जिला अध्यक्ष कम से कम 16 जिला अध्यक्ष

विशेष बात यह रही कि बैठक के मुख्य मंच पर लगे बैनरों से ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी की तस्वीरें पूरी तरह नदारद थीं। वहाँ केवल अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (AITC) का नाम और आधिकारिक ‘जोड़ा फूल’ (Two Flowers and Grass) का सिंबल लगा हुआ था।

अब नजर TMC के बैंक खातों और कानूनी लड़ाई पर

पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को बदलने के बाद अब इस विभाजन की लड़ाई कानूनी रूप अख्तियार करने जा रही है। बागी गुट का अगला कदम पूरी तरह से तकनीकी और रणनीतिक है:

  1. बैंक अकाउंट्स पर नियंत्रण: बागी गुट के नेताओं ने स्पष्ट किया है कि वे तृणमूल कांग्रेस के आधिकारिक बैंक खातों और फंड को अपने नियंत्रण में लेने के लिए वरिष्ठ कानूनी विशेषज्ञों की सलाह ले रहे हैं। इसके साथ ही पिछले वित्तीय वर्षों में हुए खर्चों की जांच के लिए एक प्रोफेशनल ऑडिटर (Auditor) नियुक्त करने की घोषणा की गई है।

  2. चुनाव आयोग (ECI) का रुख: बागी गुट बहुत जल्द भारतीय चुनाव आयोग के समक्ष अपनी नई कमेटी के दस्तावेज जमा करेगा ताकि आधिकारिक तौर पर ‘अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘जोड़ा फूल’ चुनाव चिन्ह पर अपना दावा पुख्ता किया जा सके।

  3. समानांतर संगठन का निर्माण: अगले 21 दिनों के भीतर यह गुट राज्य स्तर से लेकर जिला स्तर तक नए फ्रंटल संगठनों (युवा, छात्र और महिला विंग) की कमेटियों का गठन पूरा कर लेगा।

ममता बनर्जी खेमे का पलटवार

दूसरी तरफ, ममता बनर्जी के प्रति वफादार नेताओं ने इस पूरी प्रक्रिया को सिरे से खारिज कर दिया है। ममता खेमे के वरिष्ठ नेताओं (जैसे मदन मित्रा) का कहना है कि यह बैठक पूरी तरह असंवैधानिक, अवैध और बिना किसी कानूनी आधार के की गई है। उनके अनुसार, तृणमूल कांग्रेस के संविधान में इस तरह जबरन अध्यक्ष को हटाने या समानांतर कमेटी बनाने का कोई प्रावधान नहीं है।

पश्चिम बंगाल के हालिया विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को मिली शिकस्त के बाद से ही पार्टी के भीतर आंतरिक कलह सुलग रही थी, जो अब खुले तौर पर एक बड़े विभाजन (Split) के रूप में सामने आ गई है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि विधानसभा अध्यक्ष (Speaker) और देश का चुनाव आयोग इस तकनीकी तख्तापलट पर क्या फैसला लेता है।

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