मुंबई । सोमवार, 6 जुलाई 2026
पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के हजारों करोड़ रुपये के महाघोटाले के मुख्य आरोपी और भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी को भारत लाने की प्रक्रिया अब अपने बिल्कुल अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। लंदन की जेल में बंद नीरव मोदी ने खुद को भारत प्रत्यर्पित किए जाने से बचाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना आखिरी कानूनी दांव भी खेल लिया था, लेकिन वहां से भी उसे बड़ा झटका लगा है। नवीनतम दस्तावेजों के अनुसार, नीरव मोदी ने फ्रांस स्थित यूरोपियन कोर्ट ऑफ ह्यूमन राइट्स (ECHR) में जो अपील दायर की थी, उसे अदालत ने पूरी तरह खारिज कर दिया है।
कूटनीतिक और प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, इस अंतरराष्ट्रीय झटके के बाद अब नीरव मोदी के पास खुद को बचाने का कोई भी कानूनी विकल्प (Legal Option) शेष नहीं बचा है। ब्रिटेन की अदालतों से लेकर यूरोपीय मानवाधिकार अदालत तक के सारे दरवाजे बंद होने के बाद, अब यूके सरकार (UK Government) ने उसे भारतीय एजेंसियों को सौंपने की प्रशासनिक औपचारिकताएं और कागजी प्रक्रिया शुरू कर दी है।
यूरोपियन कोर्ट से क्यों नहीं मिली राहत?
नीरव मोदी ने अप्रैल 2026 में यूरोपियन कोर्ट ऑफ ह्यूमन राइट्स (ECHR) का दरवाजा खटखटाया था। इससे पहले ब्रिटेन की सर्वोच्च अदालतों ने उसकी सभी याचिकाएं यह कहते हुए खारिज कर दी थीं कि भारत सरकार और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की ओर से मुंबई की आर्थर रोड जेल की सुरक्षा, व्यवस्था और वहां मानवाधिकारों के पालन को लेकर दिए गए आश्वासन पूरी तरह पर्याप्त हैं।
नीरव मोदी की लीगल टीम ने यूके हाईकोर्ट में ‘भंडारी मामले’ (डिफेंस बिचौलिये संजय भंडारी से जुड़े केस) का हवाला देकर मानवीय आधार पर राहत मांगी थी और दावा किया था कि भारत भेजे जाने पर उसकी मानसिक स्थिति और प्रताड़ना का खतरा बढ़ सकता है। हालांकि, यूके कोर्ट और अब यूरोपियन कोर्ट दोनों ने माना कि नीरव मोदी के हालात असाधारण नहीं हैं और भारत द्वारा जेल की दी गई गारंटियां विश्वसनीय हैं।
किन-किन मामलों में वांछित है नीरव मोदी?
भारत की दो सबसे बड़ी केंद्रीय जांच एजेंसियां—सीबीआई (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED)—मार्च 2019 से लंदन की वैंड्सवर्थ जेल में बंद नीरव मोदी की कस्टडी की मांग कर रही हैं। नीरव मोदी मुख्य रूप से भारत में तीन बड़े मामलों में वांछित है:
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PNB बैंक धोखाधड़ी घोटाला: पंजाब नेशनल बैंक के लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (LoU) का गलत इस्तेमाल कर करीब 14,000 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी का मामला, जिसकी मुख्य जांच सीबीआई कर रही है।
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मनी लॉन्ड्रिंग (ED केस): धोखाधड़ी के जरिए कमाए गए काले धन को विभिन्न मुखौटा (Shell) कंपनियों के जरिए सफेद करने और विदेश भेजने का प्रवर्तन निदेशालय (ED) का मामला।
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सबूतों और गवाहों से छेड़छाड़: घोटाला उजागर होने के बाद जांच को प्रभावित करने के उद्देश्य से अहम डिजिटल और दस्तावेजी सबूतों को नष्ट करने तथा गवाहों को डराने-धमकाने का आपराधिक मामला।
इसके अलावा, हाल ही में जून 2026 में लंदन की कमर्शियल कोर्ट ने बैंक ऑफ इंडिया द्वारा दायर एक अन्य मामले में भी नीरव मोदी की पर्सनल लोन गारंटी को वैध मानते हुए उसे ब्याज सहित करीब 108 करोड़ रुपये चुकाने का आदेश दिया था, जिससे उसकी आर्थिक और कानूनी मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
कब आ सकता है भारत?
साल 2021 में ही ब्रिटेन की तत्कालीन गृह सचिव प्रीति पटेल ने नीरव मोदी के प्रत्यर्पण आदेश पर हस्ताक्षर कर दिए थे। इसके बाद पिछले 5 सालों से केवल अदालती अपीलों के कारण यह मामला अटका हुआ था। अब चूंकि मानवाधिकार अदालत (ECHR) से भी उसकी अर्जी खारिज हो चुकी है, यूके सरकार के गृह मंत्रालय (Home Office) के पास केवल प्रशासनिक औपचारिकताएं बाकी हैं। सूत्रों का दावा है कि औपचारिकताएं पूरी होते ही ब्रिटिश पुलिस नीरव मोदी को भारतीय जांच दल (CBI-ED) के सुपुर्द कर देगी और उसे किसी भी दिन विशेष विमान से मुंबई लाया जा सकता है।
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