इस्लामाबाद । रविवार, 5 जुलाई 2026
तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) ने एक बेहद चौंकाने वाला और खतरनाक एलान करते हुए अपनी परिचालन (ऑपरेशनल) क्षमता का विस्तार करने के लिए स्वदेशी मिसाइल तकनीक विकसित करने की घोषणा की है। टीटीपी का यह नया रुख ठीक उसी तर्ज पर है, जैसे पश्चिम एशिया में ईरान समर्थित हिज्बुल्लाह और हूती जैसे गैर-राज्य संगठन रॉकेट और मिसाइल प्रणालियों से लैस हैं। टीटीपी के इस कदम के बाद दक्षिण एशिया, विशेषकर पाकिस्तान के भीतर एक नया और गंभीर सुरक्षा संकट खड़ा हो गया है।
अल-फारूक मिसाइल: TTP का नया और घातक हथियार
द संडे गार्जियन को दिए एक विशेष इंटरव्यू में टीटीपी के आधिकारिक प्रवक्ता मोहम्मद खोरासानी ने इस बात की पुष्टि की है कि संगठन तेजी से एक आधुनिक मिसाइल सिस्टम हासिल करने और उसे स्वदेशी रूप से विकसित करने पर काम कर रहा है। टीटीपी ने अपनी इस मिसाइल प्रणाली का नाम ‘अल-फारूक’ (Al-Farooq) रखा है।
प्रवक्ता के मुताबिक, संगठन पहले से ही पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के खिलाफ लड़ाई में क्वाडकॉप्टर (ड्रोन) और थर्मल इमेजिंग जैसी एडवांस मिलिट्री टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रहा है। अब लंबी दूरी तक मार करने वाली ‘अल-फारूक’ मिसाइल के आ जाने से पाकिस्तानी सेना के कैंप्स और हवाई ठिकानों पर सीधे हमलों का खतरा कई गुना बढ़ गया है।
पृष्ठभूमि (2026): यह विकास ऐसे समय में आया है जब फरवरी 2026 से ही अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा पर भीषण सैन्य तनाव और हवाई हमलों का दौर चल रहा है। पाकिस्तानी सेना द्वारा पूर्वी अफगानिस्तान में किए गए हमलों के बाद दोनों पक्षों के बीच ‘ओपन वार’ जैसी स्थिति बनी हुई है। ऐसे माहौल में टीटीपी को मिल रहा तकनीकी अपग्रेड पूरे रीजन को अस्थिर कर सकता है।
शांति वार्ता पूरी तरह खारिज; सरेंडर की नीति फेल
पाकिस्तान सरकार और उसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) की ‘बातचीत के जरिए टीटीपी का आत्मसमर्पण’ कराने की नीति पूरी तरह से फेल साबित हो चुकी है। खोरासानी ने अपने इंटरव्यू में स्पष्ट कर दिया है कि टीटीपी अब पाकिस्तान के साथ किसी भी प्रकार के समझौते, युद्धविराम या शांति वार्ता को स्वीकार नहीं करेगा।
संगठन का दावा है कि पाकिस्तान की सेना ने दशकों से पश्तूनों, बलोचों, सराइकियों और कश्मीरियों के अधिकारों को कुचला है और उनके संसाधनों को लूटा है। यही कारण है कि टीटीपी ने अब खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान प्रांतों में पाकिस्तानी सेना के खिलाफ अपनी हिंसक ‘जंग’ को और तेज करने का फैसला किया है।
ईरान की तर्ज पर संगठन का री-स्ट्रक्चरिंग
टीटीपी ने अपनी सैन्य कार्रवाइयों को निरंतरता देने के लिए अपने नेतृत्व ढांचे (शूरा काउंसिल) में भी बड़ा बदलाव किया है। खोरासानी के अनुसार, संगठन हर साल हालात के हिसाब से काबिल लोगों को अलग-अलग पदों पर नियुक्त करता है। संगठन को इस तरह स्ट्रक्चर किया गया है कि यदि किसी शीर्ष कमांडर की ड्रोन हमले या सैन्य कार्रवाई में मौत हो जाती है, तो उसकी जगह फौरन दूसरी नियुक्ति हो सके। संगठन का यह बैकअप प्लान काफी हद तक ईरान के ‘एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस’ (Axis of Resistance) मॉडल से मेल खाता है।
इसके अलावा, टीटीपी ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) को अपनी प्रशासनिक शब्दावली में एक ‘विलायत’ (प्रांत) घोषित कर दिया है और वहां एक ‘वली’ (गवर्नर) की भी नियुक्ति कर दी है, जो सीधे तौर पर भारत और पाकिस्तान दोनों के लिए सुरक्षा संबंधी नई चुनौतियां खड़ी करता है।
भारत और दुनिया के लिए 3 सबसे बड़ी चिंताएं
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पाकिस्तान के परमाणु अड्डों की सुरक्षा: सबसे बड़ा डर यह है कि अगर टीटीपी जैसी बेरहम और चरमपंथी तंजीम मिसाइल और ड्रोन तकनीक से लैस हो जाती है, तो पाकिस्तान के परमाणु हथियारों (Nuclear Assets) की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। दुनिया को डर है कि कहीं ये खतरनाक तकनीक या ठिकाने आतंकियों के सीधे नियंत्रण में न आ जाएं।
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इंडो-पाक और अफगान रीजन में भारी तनाव: साल 2026 की शुरुआत से ही जारी अफगान-पाक सीमा संघर्ष के बीच टीटीपी की ये मिसाइल क्षमताएं आग में घी का काम करेंगी। इससे सीमा पार से होने वाले हमलों में तेजी आएगी और पूरे क्षेत्र की कानून व्यवस्था ध्वस्त हो सकती है।
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कश्मीर को ‘विलायत’ घोषित करना: टीटीपी द्वारा पीओके को अपनी ‘विलायत’ बताना और वहां अपनी संस्थाएं सक्रिय करना यह संकेत देता है कि यह संगठन भविष्य में अपनी आतंकवादी गतिविधियों का रुख भारतीय सीमाओं की तरफ भी मोड़ने की फिराक में है।
TTP का यह मिसाइल बनाने का दावा सिर्फ खोखली धमकी है या जमीनी हकीकत, यह तो वक्त बताएगा, लेकिन इसने पाकिस्तानी हुक्मरानों और वैश्विक सुरक्षा एजेंसियों की नींद जरूर उड़ा दी है।
Matribhumisamachar


