कोलकाता । बुधवार, 8 जुलाई, 2026
पश्चिम बंगाल की राजनीति और कॉपोरेट जगत में उस वक्त हड़कंप मच गया जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार (7 जुलाई, 2026) को कोलकाता और उसके आस-पास के इलाकों में पांच महत्वपूर्ण ठिकानों पर ताबड़तोड़ तलाशी अभियान शुरू किया। यह कार्रवाई अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (TMC) से जुड़े बैंक खातों के जरिए धन के संदिग्ध लेन-देन और कथित वित्तीय अनियमितताओं की कड़ियों को जोड़ने के लिए की गई है।
एजेंसी का मुख्य फोकस मनी लॉन्ड्रिंग (Prevention of Money Laundering Act – PMLA) के तहत फंड को इधर-उधर भेजने (Routing of Funds) और अवैध रूप से धन जुटाने के तौर-तरीकों को बेनकाब करना है।
केयरवेल एविएशन (Carewell Aviation) और ₹160 करोड़ का संदिग्ध कनेक्शन
इस पूरी जांच के केंद्र में विमानन (Aviation) क्षेत्र में काम करने वाला ‘केयरवेल ग्रुप’ और उसकी कंपनियां हैं। केंद्रीय जांच एजेंसी ने चौंकाने वाला दावा करते हुए कहा है कि अप्रैल 2023 से जून 2026 के बीच टीएमसी (TMC) के आधिकारिक बैंक खातों से लगभग 160 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि ‘केयरवेल एविएशन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड’ (Carewell Aviation India Pvt Ltd) और उससे जुड़ी एक सहयोगी इकाई को ट्रांसफर की गई थी।
जांच अधिकारियों के अनुसार, यह लेन-देन बेहद जटिल वित्तीय व्यवस्था के तहत किया गया, जो पहली नजर में पूरी तरह संदिग्ध प्रतीत होता है।
फंड की लेयरिंग और लग्जरी विमानों की खरीद
ED की शुरुआती तफ्तीश में सामने आया है कि फंड मिलने के बाद केयरवेल एविएशन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने साल 2023 से 2026 के बीच करीब 82.96 करोड़ रुपये अपनी ही एक नई नवेली और हाल ही में पंजीकृत (Newly Incorporated) सहयोगी कंपनी के खातों में ट्रांसफर कर दिए। कॉपोरेट जगत में इस प्रक्रिया को ‘फंड की लेयरिंग’ कहा जाता है, जिसका इस्तेमाल अक्सर असली लाभार्थी (Beneficial Owner) की पहचान छिपाने के लिए किया जाता है।
छापेमारी के दौरान जो सबसे बड़ा खुलासा हुआ, वह इन पैसों के इस्तेमाल के तरीके को लेकर है। ED के मुताबिक:
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इस डायवर्ट की गई रकम का एक बड़ा हिस्सा एम्ब्रेयर लेगेसी 600 (Embraer Legacy 600) विमान खरीदने में लगाया गया।
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इसके साथ ही एक अत्याधुनिक अगस्ता 109 एसपी (Agusta 109 SP) हेलीकॉप्टर की भी खरीद की गई।
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इन दोनों एयरक्राफ्ट्स की खरीद पर कुल मिलाकर लगभग 112 करोड़ रुपये खर्च किए गए।
सर्कुलर ट्रेडिंग और ‘शेल’ अरेंजमेंट का शक
जांच एजेंसी ने इस मामले में एक बेहद अजीबोगरीब कूटनीति (Arrangement) का पर्दाफाश किया है। ED का दावा है कि हेलीकॉप्टर खरीदने के लिए कुछ विदेशी फंडिंग (Foreign Funding) का भी उपयोग किया गया था, लेकिन इसका अधिकांश हिस्सा सीधे टीएमसी के कॉर्पस (पार्टी फंड) से आया था।
सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात यह है कि विमान और हेलीकॉप्टर की खरीद केयरवेल ग्रुप द्वारा की गई, लेकिन इसके तुरंत बाद इन्हें वापस टीएमसी (TMC) को ही किराये (Lease) पर दे दिया गया। इसके बदले में, विमान और हेलीकॉप्टर के इस्तेमाल के नाम पर पार्टी के खातों से कॉपोरेट इकाई को दोबारा बड़ी रकम का भुगतान किया गया। ED का मानना है कि यह पूरा चक्र पैसों को वैध दिखाने का एक संदिग्ध प्रयास हो सकता है, जिसकी गहराई से जांच की जा रही है।
बैंकिंग रिकॉर्ड और कॉपोरेट दस्तावेजों की कड़ाई से जांच
वर्तमान में ईडी के अधिकारी बैंकिंग रिकॉर्ड, डिजिटल इनवॉइस, टैक्स रिटर्न और कॉपोरेट दस्तावेज़ों की बारीकी से स्क्रूटनी कर रहे हैं। यह ताजा ऑपरेशन पश्चिम बंगाल में राजनीतिक-कॉर्पोरेट गठजोड़ से जुड़े वित्तीय अपराधों को रोकने की दिशा में ED का एक और कड़ा कदम माना जा रहा है। आने वाले दिनों में केंद्रीय एजेंसी द्वारा ज़ब्त की गई डिजिटल सामग्रियों के विश्लेषण के बाद इस मामले से जुड़े कई रसूखदार लोगों और कॉपोरेट निदेशकों को पूछताछ के लिए समन भेजे जाने की उम्मीद है।
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