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CBSE Class 12 Evaluation Policy 2026: खाड़ी देशों के छात्रों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा कदम, केंद्र और सीबीएसई को नोटिस जारी

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सीबीएसई सुप्रीम कोर्ट नोटिस कक्षा 12 मूल्यांकन नीति

नई दिल्ली । बुधवार, 8 जुलाई 2026

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की वर्ष 2025–26 की कक्षा 12वीं की विशेष मूल्यांकन नीति (Special Evaluation Policy) इस समय विवादों के घेरे में है। देश की सर्वोच्च अदालत, सुप्रीम कोर्ट ने खाड़ी (गल्फ) देशों में पढ़ने वाले कक्षा 12वीं के रेगुलर स्टूडेंट्स द्वारा दायर एक याचिका पर कड़ा रुख अपनाते हुए केंद्र सरकार और सीबीएसई को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

जस्टिस के. वी. विश्वनाथन और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सॉलिसिटर जनरल को भी याचिका की कॉपी सौंपने और अदालत की सहायता करने का निर्देश दिया है। यह याचिका सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कुवैत, कतर, ओमान और बहरीन के सीबीएसई से संबद्ध स्कूलों में पढ़ने वाले 30 प्रभावित छात्रों की ओर से वकील विनीत जिंदल द्वारा दायर की गई है।

क्या है पूरा विवाद? (Why Gulf Country Students are Protesting?)

शैक्षणिक सत्र 2025–26 के दौरान पश्चिम एशिया (गल्फ) क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और सुरक्षा चिंताओं के कारण सीबीएसई बोर्ड परीक्षाओं के कई मुख्य विषयों की परीक्षाएं आयोजित नहीं की जा सकी थीं। छात्रों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए परीक्षाओं को रद्द कर दिया गया था।

इसके बाद, सीबीएसई ने 27 मार्च 2026 को एक विशेष मूल्यांकन योजना (Special Evaluation Scheme) की घोषणा की। इस नीति के तहत, रद्द की गई परीक्षाओं के अंक निर्धारित करने के लिए छात्रों के स्कूल स्तर पर हुए आंतरिक मूल्यांकन को आधार बनाया गया, जिसमें शामिल थे:

  1. क्वार्टरली परीक्षाएं (Quarterly Exams)

  2. हाफ-इयरली परीक्षाएं (Half-Yearly Exams)

  3. प्री-बोर्ड परीक्षाओं का प्रदर्शन (Pre-Board Performance)

छात्रों का आरोप है कि इस मूल्यांकन पद्धति के कारण उनके अंतिम परिणाम में उम्मीद से काफी कम अंक आए हैं, जिससे उनके पिछले बेहतरीन शैक्षणिक रिकॉर्ड को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया है। कई होनहार और मेधावी छात्रों को या तो फेल घोषित कर दिया गया है या फिर उन्हें कंपार्टमेंट कैटेगरी में डाल दिया गया है।

हायर एजुकेशन और JEE Main क्वालिफाइड छात्रों पर संकट

इस विशेष मूल्यांकन नीति का सबसे बुरा असर छात्रों के हायर एजुकेशन (उच्च शिक्षा) के अवसरों पर पड़ा है। भारत सरकार द्वारा विदेशी और अनिवासी भारतीय छात्रों के लिए चलाई जा रही दो प्रमुख प्रवेश योजनाएं सबसे ज्यादा प्रभावित हुई हैं:

  • DASA (Direct Admission of Students Abroad)

  • CIWG (Children of Indian Workers in Gulf Countries)

नियमों का टकराव: DASA और CIWG जैसी प्रतिष्ठित योजनाओं के माध्यम से भारतीय तकनीकी संस्थानों (जैसे NITs और IIITs) में प्रवेश पाने के लिए कक्षा 12वीं के बोर्ड एग्जाम में न्यूनतम 75 प्रतिशत अंक होना अनिवार्य है।

याचिका के अनुसार, कई छात्रों ने बेहद कठिन JEE Main परीक्षा तो उत्तीर्ण कर ली है, लेकिन सीबीएसई की त्रुटिपूर्ण विशेष मूल्यांकन नीति के कारण उनके बोर्ड अंक 75% से कम रह गए हैं। इस वजह से वे तकनीकी रूप से इन योजनाओं के तहत कॉलेज आवंटन के लिए अयोग्य (Ineligible) हो गए हैं।

सुप्रीम कोर्ट से छात्रों ने क्या माँगें की हैं?

छात्रों के भविष्य और उनके एक कीमती साल को बर्बाद होने से बचाने के लिए याचिका में निम्नलिखित प्रमुख मांगें की गई हैं:

  1. एकमुश्त ग्रेस मार्क्स (One-time Grace Marks): नियंत्रण से बाहर की परिस्थितियों और आपातकालीन मूल्यांकन व्यवस्था से हुए नुकसान की भरपाई के लिए छात्रों को एकमुश्त ग्रेस मार्क्स दिए जाएं।

  2. विशेष सुधार परीक्षा (Special Improvement Exam): प्रभावित खाड़ी देशों के छात्रों के लिए विशेष रूप से नए सिरे से सुधार परीक्षाओं का आयोजन किया जाए।

  3. ‘बेटर ऑफ टू’ (Better of Two) का लाभ: छात्रों को यह विकल्प दिया जाए कि विशेष मूल्यांकन नीति के अंक और सुधार परीक्षा के अंक, दोनों में से जिसमें भी अधिक नंबर हों, उन्हें ही अंतिम माना जाए।

  4. DASA और CIWG पात्रता मानदंडों में छूट: इस शैक्षणिक सत्र (2025-26) के लिए 75% अंकों की अनिवार्य शर्त में एक बार की विशेष छूट (One-time Relaxation) दी जाए ताकि JEE Main पास छात्रों का प्रवेश सुरक्षित हो सके।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: खाड़ी देशों में सीबीएसई कक्षा 12वीं की परीक्षाएं क्यों रद्द की गई थीं?

उत्तर: शैक्षणिक सत्र 2025–26 के दौरान पश्चिम एशिया (गल्फ देश) क्षेत्र में अचानक बढ़े भू-राजनीतिक तनाव और छात्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कई विषयों की परीक्षाओं को रद्द करना पड़ा था।

प्रश्न 2: सीबीएसई की स्पेशल इवैल्यूएशन (विशेष मूल्यांकन) नीति 2026 क्या है?

उत्तर: परीक्षाएं रद्द होने के बाद सीबीएसई ने 27 मार्च 2026 को यह नीति लागू की, जिसके तहत छात्रों को उनके स्कूल स्तर के क्वार्टरली, हाफ-इयरली और प्री-बोर्ड परीक्षाओं के प्रदर्शन के आधार पर अंक दिए गए।

प्रश्न 3: DASA और CIWG योजनाएं क्या हैं और छात्र इनके लिए अयोग्य क्यों हो रहे हैं?

उत्तर: ये खाड़ी देशों और विदेश में रहने वाले भारतीय मूल के छात्रों को भारत के शीर्ष तकनीकी संस्थानों में सीधे प्रवेश देने की योजनाएं हैं। इनमें प्रवेश के लिए कक्षा 12वीं में न्यूनतम 75% अंक आवश्यक हैं। विशेष मूल्यांकन नीति में कम अंक मिलने के कारण छात्र पात्रता खो रहे हैं।

प्रश्न 4: छात्रों ने सुप्रीम कोर्ट से क्या मुख्य राहत मांगी है?

उत्तर: छात्रों ने एकमुश्त ग्रेस मार्क्स देने, विशेष सुधार परीक्षा आयोजित करने, ‘बेटर ऑफ टू’ का विकल्प देने और DASA/CIWG के 75% पात्रता मानदंड में एक बार की छूट देने की मांग की है।

Disclaimer: यह लेख उपलब्ध समाचार पत्रों, अदालती याचिकाओं और मीडिया रिपोर्ट्स के इनपुट पर आधारित है। सुप्रीम कोर्ट में मामले की अगली सुनवाई और सीबीएसई के आधिकारिक जवाब के बाद ही अंतिम निर्णय स्पष्ट हो सकेगा। छात्र और अभिभावक किसी भी आधिकारिक अपडेट के लिए सीबीएसई की आधिकारिक वेबसाइट को नियमित रूप से चेक करते रहें।

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