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बेंगलुरु: अवैध संबंध में बाधक बने पति की खौफनाक हत्या, कोर्ट ने दोषी पत्नी और प्रेमी को सुनाई उम्रकैद की सजा

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बेंगलुरु कोर्ट परिसर जहां सतीश मर्डर केस का फैसला सुनाया गया.

बेंगलुरु । बुधवार, 8 जुलाई 2026

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु से एक बेहद चौंकाने वाला और सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां शहर की एक सत्र अदालत (67वें सिटी सिविल कोर्ट) ने साल 2017 में हुए चर्चित सतीश हत्याकांड में अपना ऐतिहासिक फैसला सुना दिया है। अदालत ने मृतक सतीश की पत्नी कल्पना और उसके प्रेमी जावेद पाशा को क्रूरतापूर्वक की गई इस हत्या का मुख्य दोषी पाते हुए उम्रकैद (आजीवन कारावास) की कठोर सजा सुनाई है।

जस्टिस ए. जयप्रकाश की पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दोनों दोषियों पर 25,000-25,000 रुपये का आर्थिक जुर्माना भी लगाया है। कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि यदि दोषी इस जुर्माने की राशि को जमा करने में विफल रहते हैं, तो उन्हें एक अतिरिक्त वर्ष की कैद की सजा काटनी होगी।

क्या थी पूरी घटना? (दोषियों ने कैसे रची साजिश)

यह पूरा मामला बेंगलुरु के यशवंतपुर इलाके का है। मृतक सतीश अपनी पत्नी कल्पना के साथ वहां रहता था और उसे अपनी पत्नी के अवैध संबंधों की भनक तक नहीं थी। कल्पना का जावेद पाशा नाम के एक व्यक्ति के साथ काफी समय से प्रेम प्रसंग चल रहा था। 18 अप्रैल 2017 को कल्पना अचानक अपने पति को छोड़कर प्रेमी जावेद के साथ फरार हो गई। इस बात से पूरी तरह अनजान और परेशान पति सतीश ने यशवंतपुर पुलिस स्टेशन में अपनी पत्नी की गुमशुदगी (Missing Report) भी दर्ज कराई थी।

हालांकि, कुछ दिनों बाद कल्पना वापस घर लौट आई, लेकिन उसके इरादे बेहद खतरनाक थे। दोनों प्रेमियों को लगा कि सतीश उनके रिश्ते के बीच का सबसे बड़ा कांटा है, जिसे रास्ते से हटाना जरूरी है।

नींद की गोलियां दीं, फिर पत्थर से पीटकर मार डाला

साजिश के तहत, 22 मई 2017 की रात (मूल समाचार में छपी ’22 मई 2027′ की तारीख एक लिपिकीय त्रुटि/Typo है, क्योंकि यह पूरी घटना 2017 की है) कल्पना ने सतीश के रात के खाने में नींद की गोलियां पीसकर मिला दीं। भोजन करने के बाद जब सतीश गहरी नींद में सो गया, तो कल्पना ने चुपके से अपने प्रेमी जावेद पाशा को घर के अंदर बुला लिया।

इसके बाद दोनों ने मिलकर बेहद क्रूरता से सतीश पर हमला किया। पत्नी कल्पना ने सतीश की गर्दन को कपड़े से कसकर दबा दिया, जबकि जावेद ने उसके मुंह में कपड़ा ठूंस दिया ताकि वह चीख न सके। इसके बाद उन्होंने घर में ही मौजूद एक भारी पत्थर से सतीश के सिर और चेहरे पर तब तक वार किए, जब तक कि उसकी जान नहीं चली गई।

जहर का नाटक और सबूत मिटाने की कोशिश

सतीश की बेरहमी से हत्या करने के बाद शातिर पत्नी कल्पना ने पुलिस और समाज को गुमराह करने के लिए एक झूठी कहानी रची। उसने दावा किया कि उसके पति ने जहर खाकर आत्महत्या की है। इतना ही नहीं, कानूनी शिकंजे से बचने के लिए उसने अपराध के समय इस्तेमाल किया गया मोबाइल सिम कार्ड भी तोड़कर फेंक दिया ताकि तकनीकी सबूत मिटाए जा सकें।

कोर्ट में कैसे साबित हुआ जुर्म?

भले ही आरोपियों ने सबूत मिटाने की पूरी कोशिश की थी, लेकिन कानून के हाथों से वे बच नहीं सके। यशवंतपुर पुलिस स्टेशन के तत्कालीन इंस्पेक्टर वाई. मुद्दुराज ने मामले की बारीकी से जांच की और दोनों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पुख्ता चार्जशीट पेश की।

सरकारी वकील के.वी. अश्वत्थनारायण ने अदालत के सामने अकाट्य तर्क और गवाह पेश किए। अदालत की सुनवाई के दौरान:

  1. चिकित्सकीय रिपोर्ट (Medical Reports): पोस्टमार्टम और फोरेंसिक रिपोर्ट ने साफ कर दिया कि मौत जहर से नहीं, बल्कि दम घुटने और सिर पर गंभीर चोट लगने (Blunt Force Trauma) के कारण हुई थी।

  2. तकनीकी सुराग (Technical Evidence): कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (CDR) और मोबाइल टावर लोकेशन से वारदात के वक्त जावेद की मौजूदगी सतीश के घर के पास साबित हुई।

  3. चश्मदीद और गवाह: पड़ोसियों और अन्य गवाहों के बयानों ने आरोपियों की पूरी कहानी को झूठा साबित कर दिया।

इन्हीं पुख्ता वैज्ञानिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने इसे ‘जघन्य अपराध’ मानते हुए दोनों को उम्रकैद की सजा से दंडित किया।

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