मुंबई । गुरुवार, 9 जुलाई 2026
महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code – UCC) को लागू करने की दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विधानसभा में एक हाई लेवल कमेटी के गठन का आधिकारिक ऐलान किया है। इस कदम के बाद अब कयास लगाए जा रहे हैं कि महाराष्ट्र जल्द ही उत्तराखंड के बाद UCC लागू करने वाला देश का अगला बड़ा राज्य बन सकता है।
सरकार का लक्ष्य आगामी विधानसभा के शीतकालीन सत्र में इससे जुड़ा विधेयक (Bill) पेश करने का है। आइए विस्तार से समझते हैं कि यह कमेटी क्या काम करेगी और महाराष्ट्र के नागरिकों पर इसका क्या असर होने वाला है।
न्यायमूर्ति रंजना देसाई करेंगी कमेटी की अध्यक्षता
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विधानसभा में घोषणा करते हुए बताया कि इस उच्च स्तरीय कमेटी की कमान सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना देसाई (Justice Ranjana Desai) को सौंपी गई है। कमेटी के बाकी छह सदस्यों के नाम भी तय कर दिए गए हैं। न्यायमूर्ति रंजना देसाई इससे पहले उत्तराखंड के UCC ड्राफ्ट को तैयार करने वाली समिति की भी अध्यक्षता कर चुकी हैं, जिससे उनके अनुभव का लाभ महाराष्ट्र सरकार को मिलेगा।
यह हाई लेवल कमेटी क्या काम करेगी?
मुख्यमंत्री के अनुसार, यह 7 सदस्यीय कमेटी महाराष्ट्र की सामाजिक और कानूनी संरचना को ध्यान में रखते हुए काम करेगी। इसके मुख्य कार्यों में शामिल हैं:
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व्यापक अध्ययन: कमेटी समान नागरिक संहिता से जुड़े सभी कानूनी, सामाजिक और प्रशासनिक पहलुओं का गहराई से अध्ययन करेगी।
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6 महीने में रिपोर्ट: कमेटी को अपनी सिफारिशों के साथ विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के लिए 6 महीने का समय दिया गया है।
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अंतिम ड्राफ्ट तैयार करना: कमेटी की इसी रिपोर्ट के आधार पर सरकार UCC के अंतिम कानूनी मसौदे (Draft) को तैयार करेगी।
आगामी शीतकालीन सत्र में विधेयक पेश करने की तैयारी
महाराष्ट्र सरकार इस मामले में काफी तेज़ी से आगे बढ़ना चाहती है। देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट किया है कि सरकार का पूरा प्रयास रहेगा कि आगामी नागपुर शीतकालीन विधानसभा सत्र में इस विधेयक को विधानसभा और विधान परिषद, दोनों सदनों में पेश कर पारित कराया जाए। सरकार सभी संवैधानिक और कानूनी प्रक्रियाओं का पूरी तरह पालन कर रही है ताकि इसे कानूनी रूप से ठोस बनाया जा सके।
क्या है समान नागरिक संहिता (UCC) का उद्देश्य?
समान नागरिक संहिता का सीधा उद्देश्य देश या राज्य के सभी नागरिकों के लिए उनके धर्म, मजहब या समुदाय से ऊपर उठकर एक समान कानून बनाना है। वर्तमान में शादी, तलाक, गोद लेने, और संपत्ति के उत्तराधिकार जैसे मामलों के लिए अलग-अलग धर्मों के अपने पर्सनल लॉ (Personal Laws) हैं।
यदि महाराष्ट्र में UCC लागू होता है, तो:
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धर्म और मजहब के आधार पर मौजूदा अलग-अलग व्यक्तिगत कानून निष्प्रभावी हो जाएंगे।
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विवाह, तलाक, गुजारा भत्ता और संपत्ति के अधिकार में सभी महिलाओं और नागरिकों को समान अधिकार मिलेंगे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न 1: महाराष्ट्र में UCC ड्राफ्ट कमेटी की अध्यक्ष कौन हैं?
उत्तर: महाराष्ट्र में UCC का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए गठित 7 सदस्यीय हाई लेवल कमेटी की अध्यक्ष सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना देसाई हैं।
प्रश्न 2: कमेटी को अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए कितना समय मिला है?
उत्तर: कमेटी को सभी कानूनी और सामाजिक पहलुओं का अध्ययन कर अगले छह महीनों के भीतर अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपनी है।
प्रश्न 3: महाराष्ट्र सरकार इस विधेयक को कब पेश कर सकती है?
उत्तर: सरकार का प्रयास है कि आगामी नागपुर शीतकालीन विधानसभा सत्र में इस विधेयक को दोनों सदनों (विधानसभा और विधान परिषद) में पेश कर पारित कराया जाए।
Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी महाराष्ट्र विधानसभा में की गई आधिकारिक घोषणाओं और मौजूदा प्रशासनिक घटनाक्रमों पर आधारित है। कमेटी की अंतिम रिपोर्ट और विधायी प्रक्रियाओं के बाद नियमों में बदलाव संभव हैं।
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