कानपुर । रविवार, 12 जुलाई 2024
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS), तात्या टोपे नगर द्वारा रविवार को एकता पार्क में एक भव्य ‘वनविहार कार्यक्रम’ का आयोजन किया गया। इस आयोजन में बाल, युवा और वरिष्ठ स्वयंसेवकों सहित 150 से अधिक स्वयंसेवकों ने बेहद उत्साह और ऊर्जा के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
प्रकृति के बीच जागृत होती है सामाजिक समरसता: राधेश्याम सिंह
कार्यक्रम में उपस्थित स्वयंसेवकों के समूह को संबोधित करते हुए भाग संघचालक राधेश्याम सिंह ने वनविहार के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “वनविहार जैसे सामूहिक कार्यक्रम स्वयंसेवकों के भीतर एक नई और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं। जब हम प्रकृति के करीब आते हैं, तो हमारे भीतर सामाजिक समरसता (Social Harmony) का भाव स्वतः ही जागृत होने लगता है।”
उन्होंने आगे जोर देते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से आम नागरिकों और स्वयंसेवकों का जल, जंगल और जमीन (पर्यावरण) के प्रति आत्मीय व भावनात्मक लगाव काफी मजबूत होता है।
संघ के छह प्रमुख उत्सव और शताब्दी वर्ष का ‘पंच परिवर्तन’ संदेश
अपने संबोधन के दौरान राधेश्याम सिंह ने स्वयंसेवकों को याद दिलाया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ वर्षभर में छह मुख्य उत्सवों को बेहद गरिमा के साथ मनाता है। इन उत्सवों में शामिल हैं:
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वर्ष प्रतिपदा (नव संवत्सर)
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हिन्दू साम्राज्य दिवस
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गुरु पूर्णिमा
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रक्षाबंधन
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विजयादशमी
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मकर संक्रांति
इसके साथ ही उन्होंने संघ के शताब्दी वर्ष के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करते हुए ‘पंच परिवर्तन’ के संकल्प पर बात की। उन्होंने कहा कि देश के प्रत्येक नागरिक को इन पांच प्रमुख सिद्धांतों का पालन अनिवार्य रूप से करना चाहिए:
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सामाजिक समरसता: समाज में भेदभाव मिटाकर एकता कायम करना।
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कुटुंब प्रबोधन: पारिवारिक मूल्यों और संस्कारों को बढ़ावा देना।
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पर्यावरण संरक्षण: जल, जंगल और जमीन की रक्षा करना।
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स्वबोध: अपनी संस्कृति, इतिहास और स्वदेशी पहचान पर गर्व करना।
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नागरिक कर्तव्य: देश के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को ईमानदारी से निभाना।
रोचक प्रतियोगिताएं, खेल और सामूहिक गान
वन विहार कार्यक्रम केवल भाषणों तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें राष्ट्रभक्ति और मनोरंजन का अद्भुत संगम देखने को मिला। कार्यक्रम की शुरुआत में सह विभाग कार्यवाह अंकुर दीक्षित ने स्वयंसेवकों को “परम वैभवशाली भारत होगा, संघ शक्ति का हो विस्तार” जैसे ओजस्वी गीत का सामूहिक गान कराया, जिससे पूरा परिसर गूंज उठा।
इसके बाद स्वयंसेवकों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए कई तरह की मनोरंजक गतिविधियां और खेल प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं, जिनमें सभी ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया:
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नींबू दौड़ (Lemon Race)
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नेता जी की खोज
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मूर्ति-स्फूर्ति खेल
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देशभक्ति और भक्ति गीत प्रतियोगिता
खेलों के साथ-साथ स्वयंसेवकों ने प्रकृति भ्रमण (Nature Walk) किया, सामूहिक रूप से सेवा कार्य किए और मिलजुलकर भोजन निर्माण की प्रक्रिया में भी अपना अमूल्य सहयोग दिया।
‘समरसता सहभोज’ के साथ हुआ भव्य समापन
इस पूरे एक दिवसीय कार्यक्रम का समापन एक बेहद खूबसूरत परंपरा के साथ हुआ। कार्यक्रम के अंत में ‘समरसता सहभोज’ का आयोजन किया गया, जो समाज में समानता और भाईचारे का संदेश देता है। इस सहभोज में जाति-पाति के बंधनों से दूर सभी स्वयंसेवकों ने एक साथ बैठकर पारंपरिक भोजन—चोखा-बाटी और दाल-चावल का प्रसाद अत्यंत आनंद के साथ ग्रहण किया।
इन प्रमुख पदाधिकारियों की रही उपस्थिति:
इस अवसर पर संघ के कई वरिष्ठ पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे, जिनमें मुख्य रूप से सह नगर संघचालक अंजनी, भाग प्रचारक सक्षम, भाग शारीरिक प्रमुख संस्कार, भाग सेवा प्रमुख सुधाकर, नगर कार्यवाह कुंदन, सह नगर कार्यवाह योगेंद्र, सौरभ, हर्षनंदन, कृष्ण प्रसाद, धीरेन्द्र, बबलू चौहान, शैलेन्द्र, मनीष, मयंक, सुमित, ऋषभ, शांतनु, अनंत, राम, अमित, राम कुमार एवं राज कुमार आदि शामिल थे।
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