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वोटर आईडी के नए नियम: पहली बार वोट बनाने वालों के लिए फॉर्म-6 में बड़ा बदलाव, माता-पिता की SIR डिटेल्स हुई जरूरी

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नई दिल्ली । रविवार, 12 जुलाई 2026

डिजिटल होते भारत में अब चुनाव आयोग (Election Commission of India) ने मतदान प्रक्रिया और मतदाता सूची को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। यदि आप 18 वर्ष के हो चुके हैं और पहली बार मतदाता सूची में अपना नाम जुड़वाने जा रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। चुनाव आयोग ने नए मतदाताओं के लिए ऑनलाइन पंजीकरण (Online Registration) प्रक्रिया में एक नया और अनिवार्य प्रविधान लागू किया है।

अब नए आवेदकों को फॉर्म-6 (Form-6) भरते समय अपने माता-पिता की विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) से जुड़ी जानकारी भी देनी होगी। इसके बिना आपका ऑनलाइन आवेदन सबमिट नहीं हो सकेगा। आइए विस्तार से समझते हैं कि यह पूरा मामला क्या है और इससे आप पर क्या असर पड़ेगा।

क्या है चुनाव आयोग का नया नियम?

चुनाव आयोग के डिजिटल पोर्टल (ECINET) पर अब नए मतदाताओं के लिए फॉर्म-6 भरते समय एक नया ‘घोषणा-पत्र’ (Declaration Form) जोड़ा गया है। इस नए नियम के तहत हर नए आवेदक को ऑनलाइन फॉर्म भरते समय यह स्पष्ट करना होगा कि उसके माता-पिता पिछली एसआईआर (SIR) प्रक्रिया का हिस्सा थे या नहीं।

यदि आप इस कॉलम को खाली छोड़ते हैं, तो वेबसाइट आपको आवेदन प्रक्रिया में आगे नहीं बढ़ने देगी। हालांकि, ध्यान देने वाली बात यह है कि यह नियम केवल ऑनलाइन आवेदन करने वालों पर ही प्रभावी दिख रहा है, जबकि ऑफलाइन (Physical) डाउनलोड होने वाले फॉर्म में यह हिस्सा अभी शामिल नहीं है।

आवेदन के दौरान देनी होंगी ये 3 जानकारियां

ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदकों को मुख्य रूप से तीन विकल्प दिए जा रहे हैं, जिनमें से सही विकल्प चुनकर माता-पिता की निम्नलिखित जानकारी भरनी होगी:

  1. यदि माता-पिता SIR प्रक्रिया में शामिल थे: आवेदक को अपने माता-पिता के विधानसभा क्षेत्र का नंबर, पोलिंग बूथ (पार्ट नंबर) और मतदाता सूची में दर्ज क्रमांक (सीरियल नंबर) की सटीक जानकारी देनी होगी।

  2. यदि माता-पिता SIR में शामिल नहीं थे: ऐसी स्थिति में आवेदक को संबंधित ‘नॉट शामिल’ का विकल्प चुनना होगा। इसके बाद उन्हें माता-पिता का नाम और यदि उपलब्ध हो, तो उनका ईपीआईसी (EPIC – वोटर आईडी) नंबर दर्ज करना होगा।

  3. रिकॉर्ड न मिलने पर: यदि आवेदक के पास पुरानी जानकारी नहीं है, तो उसे तीसरा विकल्प चुनना होगा, हालांकि चुनाव आयोग ने अभी यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं किया है कि इस विकल्प को चुनने के बाद दस्तावेजों की जांच की प्रक्रिया कितनी कठिन होगी।

चुनाव आयोग ने क्यों किया यह बदलाव?

चुनाव आयोग का तर्क है कि इस नई व्यवस्था से नए मतदाताओं (First-time Voters) की पहचान को सत्यापित (Verify) करना बेहद आसान हो जाएगा।

  • दस्तावेजों का बोझ होगा कम: इस लिंकिंग से आयोग के पास पुराना डेटा मैच हो जाएगा, जिससे आवेदकों को कई तरह के अतिरिक्त दस्तावेज (Supporting Documents) जमा करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

  • फर्जीवाड़े पर रोक: एसआईआर (SIR) का मुख्य उद्देश्य ही मतदाता सूची से मृत, डुप्लीकेट, स्थानांतरित (Shifted) या विदेशी घुसपैठियों/अवैध मतदाताओं के नाम हटाना और केवल वास्तविक व पात्र नागरिकों को सूची में बनाए रखना है।

नियम पर क्यों उठ रहे हैं कानूनी सवाल?

इस नई व्यवस्था के लागू होते ही कानूनी विशेषज्ञों और राजनीतिक विश्लेषकों के बीच एक नई बहस छिड़ गई है। विवाद के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

  • संवैधानिकता और कानून: विशेषज्ञों का कहना है कि फॉर्म-6 ‘जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950’ (Representation of the People Act) और ‘मतदाता पंजीकरण नियम, 1960’ के तहत कानूनी रूप से तय प्रारूप है। कानूनन, इस फॉर्म में किसी भी प्रकार का बदलाव करने का अधिकार केवल केंद्र सरकार (विधि एवं न्याय मंत्रालय) के पास है, जिसे आधिकारिक राजपत्र (Gazette Notification) में प्रकाशित करना अनिवार्य होता है। आयोग प्रशासनिक आदेशों से फॉर्म का मूल ढांचा नहीं बदल सकता।

  • पारदर्शिता पर चिंताएं: हाल ही में संयुक्त राष्ट्र (UN) के विशेष दूतों ने भी भारत में चल रही इस गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर कुछ चिंताएं जताई थीं। हालांकि, चुनाव आयोग ने इन सभी दावों को सिरे से खारिज करते हुए पूरी प्रक्रिया को शत-प्रतिशत संवैधानिक और पारदर्शी बताया है।

  • युवाओं की परेशानी: 18 साल के नए युवाओं के लिए अपने माता-पिता के पुराने SIR रिकॉर्ड (जैसे बूथ नंबर और पुराना सीरियल नंबर) खोजना सिरदर्द बन सकता है, जिससे नए वोटर आईडी बनने की रफ्तार धीमी होने की आशंका है।

FAQs: नए वोटर आईडी नियमों से जुड़े आपके सवाल और जवाब

Q1. क्या बिना माता-पिता की SIR डिटेल दिए ऑनलाइन फॉर्म-6 भरा जा सकता है?

उत्तर: नहीं, चुनाव आयोग के ऑनलाइन पोर्टल पर इस घोषणा-पत्र को भरना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके बिना आवेदन की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ती।

Q2. विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का क्या मतलब है?

उत्तर: यह चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची को शुद्ध करने के लिए चलाया जाने वाला एक विशेष घर-घर गणना अभियान है, जिसके तहत फर्जी, मृत या स्थानांतरित मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाकर सूची को नए सिरे से अपडेट किया जाता है।

Q3. यदि मेरे माता-पिता का नाम पिछली मतदाता सूची या SIR में नहीं था, तो मैं क्या करूँ?

उत्तर: ऐसी स्थिति में आपको पोर्टल पर दिए गए तीसरे विकल्प (“Neither my name nor my parents name exists…”) को चुनना होगा और माता-पिता का नाम व उपलब्ध होने पर उनका पुराना वोटर आईडी (EPIC) नंबर दर्ज करना होगा।

अस्वीकरण (Disclaimer)

यह लेख केवल सामान्य जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से तैयार किया गया है। मतदाता सूची में नाम जुड़वाने की वैधानिक प्रक्रिया, आवश्यक दस्तावेजों और नियमों में किसी भी नवीनतम आधिकारिक बदलाव की पुष्टि के लिए कृपया भारत निर्वाचन आयोग (ECI) की आधिकारिक वेबसाइट (voters.eci.gov.in) पर जाएं या अपने क्षेत्र के बीएलओ (BLO) से संपर्क करें।

संबंधित महत्वपूर्ण लिंक्स (Relevant Links)

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