चेन्नई । रविवार, 12 जुलाई 2026
तमिलनाडु की सियासत में इन दिनों भारी हलचल है। राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के खिलाफ बना विपक्षी ‘INDIA’ गठबंधन राज्य स्तर पर बिखरता नजर आ रहा है। द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) ने अपने पुराने सहयोगी विदुथलाई चिरुथैगल काची (VCK) और कांग्रेस के उस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें मुख्यमंत्री विजय की सत्तारूढ़ पार्टी TVK (तमिलगा वेत्री कड़गम) और DMK को राष्ट्रीय स्तर पर एक साथ लाने की बात कही जा रही थी।
विधानसभा चुनाव के बाद पैदा हुए नए राजनीतिक घटनाक्रमों ने इस दरार को और गहरा कर दिया है। आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर तमिलनाडु की राजनीति में यह नया विवाद क्या है और गठबंधन के साथी आमने-सामने क्यों हैं।
केरल और बंगाल मॉडल पर छिड़ी बहस
विवाद की शुरुआत तब हुई जब VCK प्रमुख थोल थिरुमावलवन ने एक नया राजनीतिक फॉर्मूला सुझाया। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में भी केरल और पश्चिम बंगाल जैसा मॉडल अपनाया जा सकता है। इस मॉडल के तहत पार्टियां राज्य स्तर पर एक-दूसरे की कट्टर प्रतिद्वंद्वी होने के बावजूद, राष्ट्रीय स्तर पर INDIA गठबंधन के झंडे तले BJP के खिलाफ एकजुट रह सकती हैं।
कांग्रेस सांसद जोथिमणि ने भी इस विचार का पुरजोर समर्थन किया। उन्होंने तर्क दिया कि देश इस समय लोकतांत्रिक संस्थाओं पर दबाव और परिसीमन जैसे गंभीर मुद्दों से जूझ रहा है। ऐसे में राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखते हुए विपक्षी दलों की अधिकतम एकता जरूरी है।
DMK का कांग्रेस पर तीखा हमला: ‘पीठ में छुरा घोंपा’
DMK इस प्रस्ताव पर बेहद आक्रामक रुख अपनाए हुए है। पार्टी ने केरल या बंगाल मॉडल को तमिलनाडु में लागू करने की संभावना को पूरी तरह नकार दिया। DMK सांसद गणपति पी. राजकुमार ने एक निजी टीवी चैनल से बातचीत में कांग्रेस पर सीधा और गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा:
“विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस ने गठबंधन धर्म का पालन नहीं किया और सिर्फ सत्ता तथा मंत्री पदों की खातिर मुख्यमंत्री विजय की पार्टी TVK को समर्थन दे दिया। यह DMK के साथ एक बड़ा विश्वासघात है और कांग्रेस ने हमारी पीठ में छुरा घोंपा है।”
राजकुमार ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस अब सीधे बात करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही है, इसलिए वह VCK को एक ‘दूत’ की तरह इस्तेमाल कर रही है ताकि DMK को मनाया जा सके।
चुनाव के बाद बदले तमिलनाडु के समीकरण
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद राज्य की राजनीतिक तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। सत्ता गंवाने के तुरंत बाद कांग्रेस ने DMK के साथ अपना नौ साल पुराना ऐतिहासिक गठबंधन तोड़ लिया था। इसके बाद कांग्रेस, VCK और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) मुख्यमंत्री विजय की TVK सरकार में शामिल हो गए, जबकि वामपंथी दलों (CPI और CPM) ने सरकार को बाहर से समर्थन दिया।
DMK का मानना है कि अब परिस्थितियां पूरी तरह अलग हैं। TVK राज्य में एक बड़ी राजनीतिक ताकत बनकर सीधे सत्ता तक पहुंच चुकी है और मुख्यमंत्री विजय खुद कई बार सार्वजनिक मंचों से DMK को अपना मुख्य राजनीतिक दुश्मन घोषित कर चुके हैं। ऐसे में दोनों दलों का एक मंच पर आना व्यावहारिक रूप से असंभव है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. VCK प्रमुख ने तमिलनाडु के लिए क्या सुझाव दिया था?
VCK प्रमुख थोल थिरुमावलवन ने सुझाव दिया था कि DMK और TVK राज्य स्तर पर प्रतिद्वंद्वी बने रहें, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर BJP के खिलाफ INDIA गठबंधन के तहत एकजुट होकर काम करें।
2. DMK ने कांग्रेस पर विश्वासघात का आरोप क्यों लगाया?
DMK का आरोप है कि विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस ने सत्ता और मंत्री पदों के लालच में नौ साल पुराना गठबंधन तोड़ दिया और मुख्यमंत्री विजय की पार्टी TVK का समर्थन कर सरकार में शामिल हो गई।
3. क्या TVK को INDIA गठबंधन में शामिल किया जा सकता है?
DMK ने इस पर सवाल उठाया है क्योंकि वर्तमान में TVK के पास संसद में कोई प्रतिनिधित्व (सांसद) नहीं है। हालांकि, कांग्रेस का मानना है कि भविष्य में संसद में प्रतिनिधित्व मिलने पर इस पर पुनर्विचार किया जा सकता है।
अस्वीकरण (Disclaimer)
यह लेख उपलब्ध राजनीतिक बयानों और हालिया घटनाक्रमों के विश्लेषण पर आधारित है। इसका उद्देश्य किसी भी राजनीतिक दल की छवि को प्रभावित करना नहीं, बल्कि राजनीतिक विश्लेषकों और पाठकों तक सही जानकारी पहुंचाना है।
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