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सुप्रीम कोर्ट में राज्यों की अतिरिक्त Sales Tax Levy शक्ति पर 22 सितंबर से 7 जजों की संविधान पीठ करेगी सुनवाई

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नई दिल्ली | गुरुवार, 13 अगस्त 2026
भारत के सुप्रीम कोर्ट में राज्यों की अतिरिक्त Sales Tax Levy तथा सरचार्ज लगाने की संवैधानिक शक्ति से जुड़े एक अत्यंत संवेदनशील और व्यापक प्रभाव वाले मामले पर 22 सितंबर 2026 से सुनवाई शुरू होने जा रही है। इस ऐतिहासिक कानूनी समीक्षा के लिए सात न्यायाधीशों की संविधान पीठ (Constitution Bench) का गठन किया गया है।
यह मामला केवल कर लगाने के प्रशासनिक अधिकार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय संविधान के तहत केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय संघवाद (Fiscal Federalism) के मूलभूत ढांचे को री-डिफाइन कर सकता है।

विवाद की मुख्य जड़: क्या है पूरा मामला?

अदालत के समक्ष प्रमुख सवाल यह है कि क्या राज्य विधानसभाओं के पास पहले से लागू Sales Tax (बिक्री कर) या अन्य करों पर अतिरिक्त लेवी या सरचार्ज लगाने का अधिकार मौजूद है।
सुप्रीम कोर्ट इस बिंदु पर अपनी व्याख्या देगा कि:
  1. क्या संविधान के तहत राज्यों को प्राप्त कराधान शक्तियां (Taxation Powers) उन्हें मूल कर के अतिरिक्त शुल्क वसूलने की स्वायत्तता देती हैं?
  2. संविधान की सातवीं अनुसूची (Seventh Schedule) की सूची-II (राज्य सूची) के तहत राज्यों की कराधान शक्तियों की अंतिम संवैधानिक सीमा क्या है?

22 सितंबर की सुनवाई का महत्व और कानूनी पृष्ठभूमि

यह विषय लंबे समय से न्यायिक समीक्षा के अधीन अटका हुआ था। पूर्व के अलग-अलग फैसलों में इस बिंदु पर स्पष्टता न होने के कारण इसे 7 न्यायाधीशों की वृहद पीठ को संदर्भित किया गया था।
यदि सुप्रीम कोर्ट राज्यों के पक्ष में निर्णय देता है:
  • राजस्व के नए विकल्प: राज्यों के पास वित्तीय संकट या विशेष योजनाओं के वित्तपोषण के लिए अतिरिक्त राजस्व जुटाने के संवैधानिक अधिकार सुरक्षित हो जाएंगे।
  • वित्तीय स्वायत्तता मजबूत: GST व्यवस्था लागू होने के बाद राज्यों की अपनी कर दरें तय करने की स्वतंत्रता सीमित हुई है; यह फैसला उन्हें कुछ अतिरिक्त राजकोषीय लचीलापन प्रदान कर सकता है।
यदि अदालत राज्यों की इस शक्ति पर संवैधानिक सीमाएं तय करती है:
  • कर ढांचे में एकरूपता: देशभर में विभिन्न राज्यों द्वारा मनमाने ढंग से अतिरिक्त सरचार्ज या लेवी लगाने पर रोक लगेगी, जिससे व्यापार और उद्योगों को ‘वन नेशन, वन टैक्स’ जैसे तंत्र में सहूलियत मिलेगी।
  • राज्यों के कर विकल्प सीमित: राज्यों को केवल संविधान में स्पष्ट रूप से दर्ज कर-दायरों तक सीमित रहना होगा।

वर्तमान स्थिति और आगे की राह

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने इस विषय पर कोई अंतिम आदेश या निर्णय जारी नहीं किया है। 22 सितंबर 2026 से शुरू होने वाली 7 जजों की संविधान पीठ की दलीलों व सुनवाई के बाद ही यह तस्वीर साफ हो सकेगी कि राज्य सरकारों के पास मौजूदा Sales Tax के ऊपर अतिरिक्त लेवी लगाने की क्षमता किस हद तक संवैधानिक रूप से वैध है।
इस फैसले के प्रत्यक्ष नतीजे न केवल राज्य सरकारों के बजट पर दिखेंगे, बल्कि इसका असर भारतीय व्यापार जगत और आम उपभोक्ताओं पर भी पड़ेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. सुप्रीम कोर्ट में Sales Tax Levy मामले की सुनवाई कब शुरू होगी?

सुप्रीम कोर्ट में इस महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई 22 सितंबर 2026 से शुरू होने वाली है।

2. इस मामले की सुनवाई कितने जजों की पीठ कर रही है?

इस मामले की सुनवाई 7 न्यायाधीशों की संविधान पीठ (Constitution Bench) द्वारा की जाएगी।

3. संविधान की सातवीं अनुसूची का इस मामले से क्या संबंध है?

सातवीं अनुसूची (Seventh Schedule) केंद्र और राज्यों के बीच विधायी और कराधान शक्तियों का बंटवारा करती है। अदालत यह तय करेगी कि राज्य सूची के तहत अतिरिक्त लेवी लगाना संविधान सम्मत है या नहीं।
अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख केवल सूचनात्मक एवं शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए तैयार किया गया है। इसमें दी गई कानूनी जानकारी सार्वजनिक स्रोतों एवं न्यायालय के संदर्भों पर आधारित है। किसी भी कानूनी प्रक्रिया या राजकोषीय नीतिगत निर्णय हेतु आधिकारिक विधिक सलाह अवश्य लें।
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