वृंदावन । बुधवार, 26 अगस्त 2026
वृंदावन के प्रसिद्ध ठाकुर श्री बांके बिहारी मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए जाने वाले दान और मंदिर के चौमुखी विकास को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक अत्यंत महत्वपूर्ण और कड़ा फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि मंदिर में आने वाले चढ़ावे में किसी भी प्रकार की हेराफेरी या गबन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। श्रद्धालुओं द्वारा समर्पित की गई राशि का एक-एक पैसा सीधे मंदिर के खजाने (ट्रेजरी), दान-पेटी या आधिकारिक ऑनलाइन पोर्टल में ही जमा होना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट का मुख्य निर्देश और 3-सदस्यीय पीठ
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की तीन सदस्यीय पीठ ने मंदिर प्रबंधन समिति को वित्तीय जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कड़े कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
कोर्ट ने साफ किया कि:
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मंदिर में सेवायत या कोई अन्य व्यक्ति श्रद्धालु से दान की रकम लेकर उसे मंदिर कोष में जमा होने से पहले निजी स्तर पर अपने पास नहीं रख सकता।
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दान की प्रक्रिया में सेवायतों या अन्य किसी भी पक्ष द्वारा बाधा उत्पन्न करने के प्रयास को गंभीर अपराध माना जाएगा।
‘पहले भगवान का अधिकार, फिर सेवायत का हिस्सा’
सुनवाई के दौरान मंदिर प्रबंधन द्वारा प्रस्तुत स्टेटस रिपोर्ट में यह बात सामने आई कि कुछ सेवायत या भंडारी श्रद्धालुओं को आधिकारिक दान-पेटी (गोलक) में पैसे डालने के बजाय सीधे नकद देने के लिए प्रेरित कर रहे थे। कोर्ट को ऐसी तस्वीरें व वीडियो भी दिखाए गए, जिनमें लोग गोलक के सामने खड़े होकर श्रद्धालुओं से नकद लेकर थैली में रख रहे थे।
सेवायतों के वकीलों ने तर्क दिया कि पारंपरिक रूप से ‘भोग’ और पूजा सामग्री के लिए कुछ राशि ली जाती है। इस पर न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और पीठ ने स्पष्ट किया कि:
“पुजारी या सेवायत का देवता पर पूर्व-अधिकार (Garnishee Right) नहीं हो सकता। श्रद्धालु का दान सबसे पहले भगवान (देवता) को समर्पित होना चाहिए। दान की रकम मंदिर कोष में जमा होने के बाद ही नियमानुसार सेवायतों का निर्धारित हिस्सा उन्हें मिल सकेगा।”
5.5 एकड़ जमीन और मंदिर का विकास कार्य
बांके बिहारी मंदिर के आसपास श्रद्धालुओं की सुविधा और सुगम दर्शन व्यवस्था के लिए लगभग 5.5 एकड़ जमीन की आवश्यकता बताई गई है।
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वर्तमान स्थिति: करीब आधा एकड़ जमीन निजी सौदों के जरिए हासिल कर ली गई है, जबकि बाकी जमीन के लिए बातचीत जारी है।
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सरकारी अधिग्रहण पर चेतावनी: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि निजी स्तर पर जमीन खरीदने की बातचीत विफल होती है या कोई गतिरोध बना रहता है, तो अदालत उत्तर प्रदेश सरकार को आवश्यक जमीन के अधिग्रहण का निर्देश जारी करने पर विचार करेगी।
मंदिर फंड से संपत्ति खरीदने पर उठे सवाल
सुनवाई के दौरान यह मुद्दा भी उठा कि मंदिर के खजाने से संपत्तियां खरीदी जा रही हैं। सुप्रीम कोर्ट ने विकास कार्यों की निधि और संपत्ति खरीद के प्रस्तावों पर नियम तय करते हुए निर्देश दिया कि मंदिर फंड से कोई भी अचल संपत्ति खरीदने से पहले प्रस्ताव अदालत के समक्ष रखा जाए। सभी पक्षों को हाई-पावर्ड कमेटी की स्टेटस रिपोर्ट पर अपनी आपत्तियां दाखिल करने के लिए 1 से 2 सप्ताह का समय दिया गया है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1. सुप्रीम कोर्ट ने बांके बिहारी मंदिर दान मामले में क्या मुख्य फैसला दिया?
उत्तर: सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि श्रद्धालुओं का दिया गया पूरा दान सीधे मंदिर की दान-पेटी या ऑनलाइन ट्रेजरी में जमा होगा। कोई भी सेवायत या व्यक्ति दान का पैसा मंदिर कोष में जाने से पहले अपने पास नहीं रख सकता।
Q2. क्या सेवायतों को दान में से हिस्सा मिलेगा?
उत्तर: हाँ, लेकिन कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पहले पूरा दान भगवान और मंदिर के कोष में जाएगा। उसके बाद ही नियमानुसार सेवायतों को उनका तय हिस्सा दिया जाएगा।
Q3. मंदिर विकास के लिए कितनी जमीन की जरूरत है?
उत्तर: मंदिर के चौमुखी विकास और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए लगभग 5.5 एकड़ जमीन की आवश्यकता है।
डिस्क्लेमर (Disclaimer)
यह लेख सुप्रीम कोर्ट में बांके बिहारी मंदिर प्रबंधन एवं दान प्रणाली से जुड़ी हालिया कानूनी सुनवाई और समाचार रिपोर्टों पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल सूचना एवं शैक्षणिक जानकारी प्रदान करना है।
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