मंगलवार, सितंबर 08 2026 | 03:34:27 PM

मद्रास हाईकोर्ट: मंदिर के पास चर्च पुनर्निर्माण की अनुमति बरकरार; कहा- केवल आशंका पर नहीं रुक सकते संवैधानिक अधिकार

Saransh Kanaujia
4 Min Read
शिवगंगा | 
मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै पीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए तमिलनाडु के शिवगंगा जिले में स्थित एक हिंदू मंदिर के पास ईसाई प्रार्थना भवन (चर्च) के पुनर्निर्माण की जिला प्रशासन द्वारा दी गई अनुमति को बरकरार रखा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि विभिन्न धार्मिक समुदायों के शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के संवैधानिक अधिकार को केवल बिना किसी ठोस प्रमाण वाली काल्पनिक या संभावित कानून-व्यवस्था की आशंका के आधार पर बाधित नहीं किया जा सकता है।
मामले की पूरी पृष्ठभूमि और अदालती कार्यवाही
यह कानूनी विवाद तमिलनाडु के शिवगंगा जिले के दयापुरम (मानामादुरै तालुक) गांव से जुड़ा है। यहां स्थित मुथुमारियम्मन मंदिर से करीब 45 मीटर की दूरी पर एक पुराना ईसाई प्रार्थना भवन स्थित है।
वर्ष 2021 में हिंदू मुन्नानी के जिला कार्यकारिणी सदस्य G. मरिमुथु (G. Marimuthu) ने एक याचिका दायर की थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि प्रार्थना भवन का पुनर्निर्माण बिना पूर्व प्रशासनिक अनुमति के किया जा रहा है। उस समय हाईकोर्ट ने परिसर को सील करने का आदेश दिया था और संबंधित पक्ष को जिला कलेक्टर के समक्ष औपचारिक आवेदन करने की छूट दी थी।
जिला कलेक्टर द्वारा मामले की समीक्षा करने और उचित प्रशासनिक मंजूरी देने के बाद याचिकाकर्ता ने दोबारा हाईकोर्ट का रुख किया और दावा किया कि मंदिर के इतने पास चर्च बनने से सांप्रदायिक तनाव और कानून-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न हो सकती है।
हाईकोर्ट की खंडपीठ का फैसला
जस्टिस एम. धंदापानी और जस्टिस एन. दिलीप कुमार की खंडपीठ ने इस याचिका को खारिज करते हुए जिला कलेक्टर के आदेश को वैध ठहराया। अदालत के मुख्य अवलोकन इस प्रकार थे:
  • 25 वर्षों का इतिहास: रिकॉर्ड और प्रशासनिक रिपोर्ट से सिद्ध हुआ कि प्रार्थना भवन पिछले 25 वर्षों से वहां मौजूद था और नियमित पूजा-प्रार्थना जारी थी। केवल जर्जर हो चुकी इमारत का पुनर्निर्माण कराया जा रहा था।
  • फील्ड इंस्पेक्शन और स्थानीय सहमति: प्रशासनिक जांच में पाया गया कि दोनों धार्मिक स्थलों के बीच 45 मीटर की दूरी है। पूछताछ के दौरान स्थानीय ग्रामीणों ने निर्माण पर कोई आपत्ति व्यक्त नहीं की।
  • संवैधानिक गारंटी: कोर्ट ने माना कि किसी भी नागरिक को अपने धर्म का पालन करने और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का अधिकार संविधान द्वारा प्राप्त है।
  • साक्ष्य का अभाव: याचिकाकर्ता यह साबित करने में विफल रहा कि पुनर्निर्माण से किसी वैधानिक नियम या पिछले अदालती निर्देशों का उल्लंघन हुआ है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1: मद्रास हाईकोर्ट ने G. Marimuthu बनाम District Collector मामले में क्या फैसला दिया?
उत्तर: हाईकोर्ट ने शिवगंगा जिले के दयापुरम गांव में मंदिर से 45 मीटर दूर स्थित प्रार्थना भवन के पुनर्निर्माण के लिए जिला कलेक्टर द्वारा दी गई अनुमति को सही ठहराया और याचिका खारिज कर दी।
Q2: क्या मंदिर के पास धार्मिक स्थल निर्माण पर रोक लगाई जा सकती है?
उत्तर: कोर्ट के अनुसार, केवल किसी अप्रमाणित कानून-व्यवस्था बिगड़ने के डर या निकटता के आधार पर निर्माण नहीं रोका जा सकता, जब तक कि कोई वैधानिक उल्लंघन या ठोस विवाद मौजूद न हो।
Q3: यह मामला कब से चल रहा था?
उत्तर: यह कानूनी विवाद वर्ष 2021 से चल रहा था, जब निर्माण प्रक्रिया को लेकर पहली बार याचिका दायर की गई थी।
अस्वीकरण (Disclaimer)
यह लेख केवल सामान्य सूचनात्मक और शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए तैयार किया गया है। यह कानूनी सलाह नहीं है। कानूनी मामलों में आधिकारिक न्यायालयी आदेश या योग्य कानूनी विशेषज्ञ से परामर्श लें।

Related Post

Share This Article