वाशिंगटन ।
अमेरिका में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे लाखों अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं के लिए सोमवार का दिन एक बड़ी राहत लेकर आया। 15 सितंबर 2026 से लागू होने वाले नए आव्रजन प्रतिबंधों से ठीक एक दिन पहले, मैसाचुसेट्स की एक संघीय अदालत ने ट्रंप प्रशासन के नए वीजा नियमों पर राष्ट्रव्यापी अंतरिम रोक (Nationwide Preliminary Injunction) लगा दी है।
प्रस्तावित नियमों के तहत F-1 और J-1 वीजा धारकों के अमेरिका में रहने की अवधि को अधिकतम 4 वर्षों के लिए सीमित किया जाना था। अदालत के इस फैसले के बाद दशकों पुरानी “Duration of Status” (D/S) व्यवस्था फिलहाल बरकरार रहेगी।
क्या था विवादित नया आव्रजन नियम?
गृह सुरक्षा विभाग (DHS) द्वारा जारी इस नियम का उद्देश्य वर्षों पुरानी ‘Duration of Status’ प्रणाली को समाप्त करना था:
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निश्चित समय सीमा: F-1 (छात्र) और J-1 (एक्सचेंज विजिटर) वीजा धारक केवल अधिकतम 4 वर्षों तक ही अमेरिका में वैध रूप से रह सकते थे।
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पत्रकारों पर पाबंदी: विदेशी मीडिया प्रतिनिधियों (I-Visa) के लिए अमेरिका में रहने की अवधि घटाकर अधिकतम 240 दिन निर्धारित की गई थी।
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Extension of Stay (EOS): 4 वर्ष से अधिक की पढ़ाई (जैसे पीएचडी, मेडिकल या रिसर्च प्रोग्राम) करने वाले छात्रों को USCIS के समक्ष अलग से स्टे बढ़ाने के लिए आवेदन करना पड़ता, जिसे स्वीकृत करने का पूर्ण अधिकार आव्रजन अधिकारियों के पास होता।
अदालत ने क्यों लगाया स्टे?
अमेरिका के जिला न्यायाधीश एफ. डेनिस सायलर (F. Dennis Saylor) ने शिक्षा समूहों और यूनियनों द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रशासन की दलीलों को खारिज कर दिया।
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कमजोर औचित्य: जज सायलर ने टिप्पणी की कि गृह सुरक्षा विभाग (DHS) का यह तर्क बेहद कमजोर था कि 4 साल की सीमा से राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत होगी या धोखाधड़ी रुकेगी।
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आर्थिक व शैक्षणिक नुकसान: अदालत ने माना कि बिना पर्याप्त शोध के लागू की जाने वाली यह नीति अमेरिकी उच्च शिक्षा प्रणाली और अर्थव्यवस्था को अपूरणीय क्षति (“Catastrophic Damage”) पहुंचा सकती थी।
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प्रशासनिक विफलता: सरकार 22,000 से अधिक सार्वजनिक सुझावों और कम कठोर विकल्पों पर विचार करने में विफल रही, जो प्रशासनिक प्रक्रिया अधिनियम (APA) का उल्लंघन है।
भारतीय छात्रों के लिए क्यों है यह ऐतिहासिक जीत?
अमेरिका जाने वाले विदेशी छात्रों में भारतीय समुदाय की भागीदारी सर्वाधिक है। पीएचडी,STEM (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, मैथ्स) और इंटीग्रेटेड मास्टर्स प्रोग्राम पूरा करने में अक्सर 4 से 6 साल का समय लगता है।
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अकादमिक निरंतरता: नए नियम से भारतीय छात्रों पर हर कुछ वर्षों में वीजा रद्द होने या एक्सटेंशन खारिज होने का मानसिक व प्रशासनिक दबाव बढ़ जाता।
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वित्तीय सुरक्षा: एक्सटेंशन प्रक्रिया के कारण लगने वाले अतिरिक्त शुल्क और देरी से बचत होगी।
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रिसर्च और असिस्टेंटशिप जारी: शोध छात्र अब बिना अपनी कानूनी स्थिति खोने के डर से अपनी शोध प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे।
FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
Q1. क्या अमेरिका का 4 साल का वीजा कैप नियम हमेशा के लिए रद्द हो गया है?
नहीं, यह एक अंतरिम रोक (Preliminary Injunction) है। मामला कोर्ट में चलता रहेगा और अमेरिकी प्रशासन इस फैसले के खिलाफ अपील कर सकता है।
Q2. ‘Duration of Status’ (D/S) क्या है?
D/S व्यवस्था के तहत जब तक छात्र अपने शैक्षणिक संस्थान (University) में एक वैध छात्र के रूप में नामांकित रहता है और अपना I-20 बनाए रखता है, तब तक उसे अमेरिका में अलग से वीजा एक्सटेंशन की आवश्यकता नहीं होती।
Q3. 15 सितंबर 2026 से छात्रों पर क्या असर पड़ेगा?
कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा। पहले से चले आ रहे पुराने नियम लागू रहेंगे और छात्रों को अपने 4 साल पूरे होने पर अलग से ‘Extension of Stay’ दाखिल करने की बाध्यता नहीं होगी।
Disclaimer (अस्वीकरण)
यह लेख सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए तैयार किया गया है और इसे कानूनी या आव्रजन सलाह नहीं माना जाना चाहिए। आव्रजन नीतियों में कानूनी प्रक्रियाओं के अनुसार त्वरित बदलाव हो सकते हैं। छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे अपने विश्वविद्यालय के इंटरनेशनल स्टूडेंट ऑफिस (ISSS/DSO) या USCIS की आधिकारिक वेबसाइट से अद्यतन जानकारी प्राप्त करते रहें।
