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77 की उम्र में हेमा मालिनी का दिव्य अवतार: हैदराबाद में ‘दुर्गा’ डांस बैले से दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
5 Min Read

हैदराबाद|

भारतीय सिनेमा की ‘ड्रीमगर्ल’ और प्रसिद्ध शास्त्रीय नृत्यांगना हेमा मालिनी ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि कला और भक्ति के आगे उम्र महज़ एक संख्या है। 77 वर्ष की आयु में भी उनकी ऊर्जा, चेहरे के भाव और मंच पर उपस्थिति वैसी ही सम्मोहक है जैसी दशकों पहले हुआ करती थी। नवरात्रि के पावन पर्व के शुभ अवसर पर उन्होंने तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में अपने सबसे बहुचर्चित और लोकप्रिय डांस बैले ‘दुर्गा’ की भव्य व मनमोहक प्रस्तुति दी।

 

हैदराबाद नवरात्रि समारोह में सजीव हुआ देवी शक्ति का स्वरूप

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11 अक्टूबर 2026 को हैदराबाद में आयोजित विशेष नवरात्रि महोत्सव में हेमा मालिनी ने मुख्य आकर्षण के रूप में मंच संभाला। जैसे ही प्रकाश की किरणें मंच पर पड़ीं, हेमा मालिनी के रूप में साक्षात देवी शक्ति की अलौकिक छवि दर्शकों के सामने जीवंत हो उठी।

अपनी प्रस्तुति में उन्होंने भारतीय शास्त्रीय नृत्य (विशेष रूप से भरतनाट्यम) के कठिन मुद्राओं और आंगिक अभिनय के माध्यम से माता दुर्गा के विभिन्न अवतारों को बखूबी दर्शाया—चाहे वह महिषासुर मर्दिनी का उग्र रूप हो या भक्तों पर कृपा बरसाने वाली सौम्य जगदंबा का।

 

मंचीय प्रस्तुति के प्रमुख आकर्षण:

  • भाव–भंगिमा और नवरस: नृत्य के दौरान उनके नयन-बाण और चेहरे की अभिव्यक्तियों ने दर्शकों को अंत तक बांधे रखा।
  • पारंपरिक वेशभूषा व संगीत: दिव्य आभूषणों, लाल-सुनहरे परिधानों और पारंपरिक श्लोकों के संगीतमय संयोजन ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया।
  • सोशल मीडिया पर मिली जबरदस्त सराहना: कार्यक्रम के तुरंत बाद हेमा मालिनी ने अपनी इस प्रस्तुति की झलकियां और तस्वीरें अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर साझा कीं, जिसके बाद प्रशंसकों और कला प्रेमियों ने उनके इस समर्पण को “प्रेरणा का पुंज” करार दिया।

 

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शास्त्रीय नृत्य और हेमा मालिनी: दशकों पुराना आध्यात्मिक संबंध

हेमा मालिनी केवल एक सफल बॉलीवुड अभिनेत्री ही नहीं हैं, बल्कि वे एक समर्पित भरतनाट्यम नृत्यांगना भी हैं। बचपन में शुरू हुआ यह नृत्य अभ्यास आज उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुका है।

“नृत्य मेरे लिए सिर्फ मनोरंजन या कला का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि यह ईश्वर की साधना, भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिकता को व्यक्त करने का माध्यम है।” — हेमा मालिनी

उन्होंने अपने लंबे करियर के दौरान कई पौराणिक और सांस्कृतिक कथाओं को मंच पर नृत्याभिनय के रूप में उतारा है:

  1. दुर्गा बैले: शक्ति, न्याय और असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक।
  2. मीरा बैले: भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अनन्य प्रेम और भक्ति का प्राकट्य।
  3. रामायण: भारतीय संस्कृति, मर्यादा और पौराणिक मूल्यों का सजीव मंचन।

 

उम्र को दी मात: नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा

आज के दौर में जहां कलाकार उम्र के एक पड़ाव के बाद सार्वजनिक मंचों से दूरी बना लेते हैं, वहीं हेमा मालिनी की 77 साल की उम्र में यह सक्रियता हर किसी के लिए प्रेरणादायक है। नवरात्रि के इस पवित्र माहौल में उनकी इस प्रस्तुति ने न केवल कला जगत को समृद्ध किया, बल्कि दर्शकों को अपनी पौराणिक संस्कृति और शास्त्रीय कला की जड़ों से दोबारा जोड़ने का काम किया।

 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1: हेमा मालिनी ने हाल ही में किस शहर में ‘दुर्गा’ डांस बैले प्रस्तुत किया?

उत्तर: हेमा मालिनी ने 11 अक्टूबर 2026 को हैदराबाद में आयोजित नवरात्रि महोत्सव के दौरान ‘दुर्गा’ डांस बैले प्रस्तुत किया।

Q2: हेमा मालिनी किस शास्त्रीय नृत्य शैली में पारंगत हैं?

उत्तर: हेमा मालिनी मुख्य रूप से ‘भरतनाट्यम’ (Bharatanatyam) शास्त्रीय नृत्य शैली में प्रशिक्षित और पारंगत हैं।

Q3: हेमा मालिनी के प्रमुख डांस बैले कौन–कौन से हैं?

उत्तर: उनके सबसे प्रसिद्ध और लोकप्रिय डांस बैले ‘दुर्गा’, ‘मीरा’, ‘रामायण’ और ‘राधा-कृष्ण’ हैं।

 

अस्वीकरण (Disclaimer)

यह लेख उपलब्ध समाचार स्रोतों और सार्वजनिक जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य पाठकों तक हेमा मालिनी की हालिया सांस्कृतिक प्रस्तुति और भारतीय शास्त्रीय नृत्य से जुड़ी प्रामाणिक जानकारी पहुंचाना है।

 

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।