नई दिल्ली।
देश की शीर्ष अदालत (Supreme Court of India) ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR – Special Intensive Revision) प्रक्रिया और इससे जुड़े विरोध-प्रदर्शनों को लेकर दायर याचिकाओं पर गुरुवार को बेहद अहम सुनवाई की। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) तथा संबंधित उच्च चुनाव अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
अदालत ने SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूचियों से सामूहिक रूप से नाम हटाए जाने के आरोपों पर चुनाव आयोग से जवाब तलब किया है। इसके अतिरिक्त, हालिया विरोध-प्रदर्शनों के दौरान कानून प्रवर्तन एजेंसियों की कार्रवाई पर कड़ा रुख अपनाते हुए शीर्ष अदालत ने डिजिटल साक्ष्यों को नष्ट होने से बचाने के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं।
निर्वाचन आयोग और संबंधित पक्षों को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं में आरोप लगाया गया था कि SIR प्रक्रिया के नाम पर कई योग्य मतदाताओं के नाम बिना कारण बताओ नोटिस (Show-Cause Notice) दिए मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं।
- नोटिस जारी: पीठ ने भारत निर्वाचन आयोग (ECI), मुख्य निर्वाचन आयुक्त और संबंधित राज्यों के चुनाव अधिकारियों को नोटिस जारी किया।
- निर्णय प्रक्रिया की फाइलें तलब: अदालत ने SIR से जुड़े विवादित फैसलों पर आयोग के भीतर दर्ज बैठकों के विवरण (minutes of meetings), अधिकारियों की टिप्पणियों और फाइल नोटिंग्स को प्रस्तुत करने का संकेत दिया है।
- अदालत का रुख: CJI सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि नोटिस जारी करने का आशय यह नहीं है कि अदालत ने याचिकाओं में लगाए गए आरोपों को स्वीकार कर लिया है। इसका मुख्य उद्देश्य निर्वाचन आयोग का आधिकारिक पक्ष जानना और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की पारदर्शिता की समीक्षा करना है।
CCTV फुटेज और डिजिटल रिकॉर्ड्स सुरक्षित रखने के सख्त निर्देश
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने आशंका जताई कि विरोध-प्रदर्शनों और उससे संबंधित पुलिस कार्रवाइयों के CCTV फुटेज सीमित डिजिटल स्टोरेज क्षमता के कारण स्वतः ही ओवरराइट (Overwrite) हो सकते हैं।
इस पर संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सभी संबंधित कानून प्रवर्तन एजेंसियों को आदेश दिया कि:
- हालिया घटनाओं और प्रदर्शन स्थलों से जुड़े सभी CCTV फुटेज और डिजिटल रिकॉर्डिंग्स को तुरंत सील करके सुरक्षित रखा जाए।
- किसी भी स्थिति में इन रिकॉर्ड्स के साथ छेड़छाड़ या डेटा ओवरराइटिंग नहीं होनी चाहिए, ताकि न्यायिक जांच के दौरान निष्पक्ष साक्ष्य उपलब्ध रह सकें।
दिल्ली पुलिस को BNSS धारा 163 के आदेश रिकॉर्ड पर रखने की हिदायत
राजधानी में विरोध-प्रदर्शनों के दौरान लागू किए गए निषेधात्मक आदेशों पर सुनवाई करते हुए पीठ ने दिल्ली पुलिस प्रशासन को निर्देश दिया है:
- भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 (पूर्ववर्ती CrPC धारा 144) के तहत जारी सभी निषेधात्मक आदेशों और पुलिस कार्रवाई से जुड़े दस्तावेजों को अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया जाए।
- अदालत यह समीक्षा करेगी कि क्या सार्वजनिक सभाओं पर लगाए गए प्रतिबंध आनुपातिक (Proportional) थे या न्यायिक प्रक्रिया में दखल देने के इरादे से लगाए गए थे।
न्यायपालिका का संदेश: “हर आवाज मूल्यवान है“
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं और सॉलिसिटर जनरल के बीच हुई तीखी बहसों के बीच न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने स्पष्ट किया, “अदालत के समक्ष हर आवाज मूल्यवान है और सभी पक्षों को अपनी बात रखने का पूरा अवसर दिया जाएगा।“
इसके पूर्व, CJI सूर्यकांत ने स्पष्ट संदेश दिया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में न्यायपालिका संविधान के दायरे में रहकर निष्पक्षता से कार्य करती है और किसी भी प्रशासनिक या राजनीतिक दबाव के बिना जनहित के मामलों का निस्तारण करेगी।
Frequently Asked Questions (FAQ)
प्रश्न 1: विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) क्या है और इस पर विवाद क्यों है?
उत्तर: विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूची को शुद्ध और अद्यतन करने की एक विस्तृत प्रक्रिया है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि इस प्रक्रिया में बिना उचित प्रक्रिया अपनाए और कारण बताए वैध मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं।
प्रश्न 2: सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में चुनाव आयोग को क्या आदेश दिया है?
उत्तर: सुप्रीम कोर्ट ने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) को नोटिस जारी कर इस प्रक्रिया से संबंधित निर्णय लेने की फाइलों, बैठकों के विवरण और अपना आधिकारिक पक्ष अदालत में पेश करने का निर्देश दिया है।
प्रश्न 3: CCTV फुटेज को सुरक्षित रखने के लिए कोर्ट ने क्या कहा?
उत्तर: कोर्ट ने एजेंसियों को आदेश दिया कि सीमित स्टोरेज के कारण CCTV फुटेज ऑटो-ओवरराइट न हों, इसलिए उन्हें तुरंत डिजिटल फॉर्मेट में सुरक्षित किया जाए ताकि न्यायिक जांच में वे साक्ष्य के रूप में प्रयोग किए जा सकें।
प्रश्न 4: BNSS की धारा 163 क्या है जिसका जिक्र सुनवाई के दौरान हुआ?
उत्तर: भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 (जो पहले CrPC की धारा 144 थी) पुलिस प्रशासन को जन-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सार्वजनिक सभाओं, प्रदर्शनों और आवाजाही पर प्रतिबंध लगाने का अधिकार देती है।
Disclaimer (अस्वीकरण)
यह समाचार लेख सुप्रीम कोर्ट में चल रही न्यायिक कार्यवाही, समाचार एजेंसियों तथा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध अदालती ब्योरों के आधार पर सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य किसी भी विचाराधीन कानूनी मामले में न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करना या अंतिम निर्णय देना नहीं है।
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