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“हॉरर और कॉमेडी का मेल बहुत दिलचस्प होता है”: ‘भूत बंगला’ के वर्ल्ड टेलीविजन प्रीमियर पर अक्षय कुमार ने खोले कॉमेडी के बड़े राज

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

मुंबई।

अपनी ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘भूत बंगला’ के ज़ी सिनेमा पर होने जा रहे वर्ल्ड टेलीविजन प्रीमियर से पहले बातचीत करते हुए बॉलीवुड के ‘खिलाड़ी’ अक्षय कुमार ने फैंटेसी सिनेमा की बारीकियों पर बेबाकी से बात की।

अक्षय कुमार के मुताबिक, चाहे कहानी फैंटेसी या काल्पनिक दुनिया की ही क्यों न हो, हर घटना और किरदार के पीछे एक लॉजिक होना चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह कॉमिक बुक्स में भी सुपरहीरोज़ की शक्तियों का एक आधार होता है, ठीक उसी तरह फिल्मों में भी असाधारण स्थितियों की वजह बताना जरूरी है। इससे दर्शक कहानी और बनाई गई नई दुनिया से खुद को गहराई से जोड़ पाते हैं।

 

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हॉरर और कॉमेडी: तनाव और राहत का बेहतरीन कॉम्बिनेशन

जब अक्षय कुमार से पूछा गया कि दर्शकों को हॉरर-कॉमेडी जॉनर इतना क्यों पसंद आता है, तो उन्होंने बताया:

“जब आप कोई डरावना सीन देखते हैं, तो तनाव में रहते हैं। तभी अचानक कोई मजेदार पल आ जाता है और सारा तनाव खत्म हो जाता है। यही मेल इस तरह की फिल्मों को असरदार बनाता है।“

उन्होंने जोर देकर कहा कि कॉमेडी को कभी जबरदस्ती नहीं लाया जा सकता, बल्कि इसे परिस्थितियों के साथ स्वाभाविक रूप से उभरना चाहिए। ‘भूत बंगला’ में भी दर्शकों को एक ही पल में डरने और अगले ही पल खुलकर हँसने का मौका मिलेगा।

 

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कॉमेडी टाइमिंग और चेहरे के हाव–भाव का जादू

अपनी बेमिसाल कॉमेडी टाइमिंग पर बात करते हुए अक्षय कुमार ने साझा किया कि कॉमेडी पूरी तरह सही समय पर सही बात कहने और रोजमर्रा की जिंदगी को करीब से देखने पर निर्भर करती है।

उन्होंने बताया कि कई बार लंबे संवादों की तुलना में चेहरे का एक छोटा सा हाव-भाव या कुछ पलों का ठहराव दर्शकों को ज्यादा हँसा सकता है। कलाकार के तौर पर अनोखे और अजीब हालातों को भी पूरी गंभीरता से जीना पड़ता है, और यही स्वाभाविक प्रतिक्रिया परदे पर कॉमेडी का सबसे बड़ा हथियार बनती है।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।