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बलिया में रामलीला मंच पर बवाल: महामंडलेश्वर कौशलेन्द्र गिरी पर हमले की कोशिश, यूपी मंत्री की मौजूदगी के बीच मचा हड़कंप

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
6 Min Read

बलिया।

उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से एक बेहद संवेदनशील और गंभीर घटना सामने आई है। रसड़ा क्षेत्र स्थित ऐतिहासिक श्रीनाथ बाबा मठ परिसर में आयोजित रामलीला मंचन के दौरान असामाजिक तत्वों द्वारा माहौल बिगाड़ने और मारपीट का प्रयास किया गया। घटना उस समय हुई जब मंच पर धार्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रम का संचालन हो रहा था और प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री भी वहां उपस्थित थे।

 

मंत्री ओम प्रकाश राजभर की मौजूदगी में हुआ हंगामा

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प्राप्त जानकारी के अनुसार, मंगलवार शाम श्रीनाथ बाबा मठ प्रांगण में रामलीला का मंचन देखने के लिए भारी भीड़ उमड़ी थी। इसी दौरान उत्तर प्रदेश सरकार के पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर भी कार्यक्रम में मौजूद थे। आरोप है कि कार्यक्रम के बीच में कुछ उपद्रवी तत्व घातक असलहों के साथ अचानक रामलीला के मंच पर चढ़ आए।

मंच पर पहुंचते ही आरोपियों ने श्रीनाथ बाबा मठ के महंत और महामंडलेश्वर कौशलेन्द्र गिरी को निशाना बनाते हुए जानलेवा हमला करने का प्रयास किया।

 

बीच–बचाव में सहयोगी घायल, मौके से फरार हुए आरोपी

महामंडलेश्वर कौशलेन्द्र गिरी पर हमला होते देख उनके सहयोगी रुपेश तिवारी तुरंत बीच-बचाव के लिए आगे आए। इस दौरान हमलावरों ने उनके साथ भी हाथापाई और मारपीट की, जिससे मौके पर अफरातफरी मच गई।

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मंच पर हंगामा और शोर-शराबा बढ़ते ही आसपास मौजूद सुरक्षाकर्मी, आयोजन समिति के सदस्य और स्थानीय लोग दौड़कर मंच की ओर पहुंचे। लोगों की भारी भीड़ को अपनी ओर आता देख आरोपी भीड़ का फायदा उठाकर घटनास्थल से भाग निकले।

 

पुलिस ने दर्ज किया हत्या के प्रयास व बलवा का केस

घटना के बाद महामंडलेश्वर कौशलेन्द्र गिरी की लिखित तहरीर के आधार पर रसड़ा कोतवाली पुलिस ने तुरंत एक्शन लिया। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपियों की धरपकड़ के लिए टीमें गठित कर दी हैं।

  • नामजद आरोपी: सतीश सिंह, संजीत गुप्ता और मोनू जायसवाल।
  • अज्ञात आरोपी: 3 से 4 अन्य अज्ञात लोग।
  • भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराएं: पुलिस ने BNS की धारा 109(1) (हत्या का प्रयास), 115(2) (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना), 191(2) और 191(3) (घातक हथियारों से लैस होकर बलवा करना) के तहत प्राथमिकी दर्ज की है।

 

रामलीला कमेटी का आंतरिक विवाद भी जांच के दायरे में

बलिया के पुलिस अधीक्षक (SP) ईराज राजा और क्षेत्र के पुलिस उपाधीक्षक (DSP) रजनीश कुमार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए घटनास्थल का जायजा लिया। प्राथमिक जांच में यह बात भी सामने आई है कि रामलीला कमेटी का अपने ही कुछ पूर्व या वर्तमान सदस्यों के साथ पुराना विवाद चला आ रहा है।

पुलिस प्रशासन इस घटना को केवल एक तात्कालिक झड़प न मानकर कमेटी के आपसी विवाद, पुरानी रंजिश और अन्य संभावित कारणों के दृष्टिकोण से भी गहराई से खंगाल रहा है।

 

पुलिस की कार्रवाई और वर्तमान स्थिति

रसड़ा कोतवाली पुलिस के अनुसार क्षेत्र में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और मठ परिसर की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कानून व्यवस्था को हाथ में लेने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और जल्द ही सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा जाएगा।

 

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1: बलिया के रसड़ा में रामलीला के दौरान क्या घटना हुई?

उत्तर: रसड़ा के श्रीनाथ बाबा मठ परिसर में आयोजित रामलीला के दौरान हथियारबंद लोगों ने मंच पर पहुंचकर महामंडलेश्वर कौशलेन्द्र गिरी पर जानलेवा हमले का प्रयास किया और बीच-बचाव करने आए उनके सहयोगी के साथ मारपीट की।

Q2: क्या घटना के समय कोई प्रमुख राजनीतिक हस्ती मौजूद थी?

उत्तर: हां, घटना के वक्त उत्तर प्रदेश सरकार के पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर रामलीला कार्यक्रम में मंच पर मौजूद थे।

Q3: पुलिस ने किन–किन धाराओं में और किनके खिलाफ केस दर्ज किया है?

उत्तर: पुलिस ने तीन नामजद (सतीश सिंह, संजीत गुप्ता, मोनू जायसवाल) और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 109(1), 115(2), 191(2) और 191(3) (हत्या का प्रयास, मारपीट और बलवा) के तहत मुकदमा दर्ज किया है।

 

अस्वीकरण (Disclaimer)

यह समाचार लेख प्रारंभिक सूचनाओं, पुलिस रिपोर्ट (FIR) और स्थानीय सूत्रों से प्राप्त विवरणों पर आधारित है। मामले में नामजद व अज्ञात आरोपियों पर लगाए गए आरोपों की अंतिम कानूनी एवं तथ्यपरक पुष्टि पुलिस जांच और अदालती प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।