लखनऊ।
उत्तर प्रदेश में आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव की राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। लखनऊ में आयोजित भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट घोषणा की है कि यदि राज्य में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार दोबारा बनती है, तो उत्तर प्रदेश में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code – UCC) को पूर्ण रूप से लागू किया जाएगा।
अमित शाह ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि उत्तराखंड के बाद उत्तर प्रदेश अगला राज्य होगा जहाँ UCC लागू किया जाएगा। इस ऐलान के साथ ही UCC 2027 के चुनाव का सबसे बड़ा वैचारिक और राजनीतिक मुद्दा बन चुका है।
क्या है समान नागरिक संहिता (UCC)?
समान नागरिक संहिता (अनुच्छेद 44) का अर्थ एक ऐसे एकीकृत नागरिक कानून से है, जो देश या राज्य के सभी नागरिकों पर उनके धर्म, जाति या समुदाय से परे समान रूप से लागू होता है।
वर्तमान में भारत में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेना (Adoption) और रखरखाव जैसे व्यक्तिगत मामले विभिन्न धार्मिक कानूनों (Personal Laws) से संचालित होते हैं। UCC का उद्देश्य इन सभी व्यक्तिगत कानूनों के स्थान पर एक निष्पक्ष और एक समान कानूनी ढांचा तैयार करना है।
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│ समान नागरिक संहिता (UCC) का ढांचा │
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विवाह और तलाक उत्तराधिकार व संपत्ति गोद लेना और रखरखाव
(अनिवार्य पंजीकरण, (महिलाओं व पुरुषों के (सार्वभौमिक नियम एवं
एक समान कानूनी नियम) लिए समान अधिकार) समान अधिकार प्रक्रिया)
उत्तर प्रदेश में UCC लागू होने पर क्या-क्या बदलेगा?
यदि उत्तर प्रदेश में भविष्य में UCC विधायी प्रक्रिया के माध्यम से पारित होता है, तो राज्य की नागरिक व्यवस्था में निम्नलिखित प्रमुख बदलाव संभव हैं:
- विवाह का अनिवार्य पंजीकरण: सभी धर्मों के लिए विवाह का सरकारी पंजीकरण अनिवार्य हो जाएगा।
- तलाक की पारदर्शी प्रक्रिया: तलाक और भरण-पोषण (Alimony) के लिए सभी समुदायों हेतु एक समान कानूनी नियम होंगे।
- लैंगिक समानता और संपत्ति अधिकार: पारिवारिक संपत्ति के बंटवारे में पुत्रियों और पुत्रों को समान अधिकार मिलेंगे।
- कुप्रथाओं पर रोक: बहुविवाह (Polygamy) और बाल विवाह जैसी प्रथाओं पर पूर्ण कानूनी प्रतिबंध लगेगा।
- गोद लेने के समान नियम: किसी भी बच्चे को गोद लेने के नियम धर्म से परे सभी नागरिकों के लिए एक समान होंगे।
उत्तराखंड मॉडल और यूपी की कानूनी राह
देश में उत्तराखंड पहला ऐसा राज्य बना जिसने अपनी विधानसभा से UCC पारित करके इसे लागू किया। उत्तर प्रदेश सरकार के लिए भी यह प्रक्रिया केवल राजनीतिक घोषणा तक सीमित नहीं रहेगी। इसके लिए:
- विशेषज्ञ समिति का गठन: राज्य सरकार को कानून विशेषज्ञों की एक समिति बनाकर जन सुझाव लेने होंगे।
- ड्राफ्टिंग (Drafting): उत्तर प्रदेश की सामाजिक-सांस्कृतिक परिस्थितियों के अनुसार कानूनी मसौदा तैयार करना होगा।
- विधानसभा स्वीकृति: इस विधेयक को राज्य विधानसभा में पेश कर सर्वसम्मति या बहुमत से पारित कराना होगा।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और विपक्ष का हमला
अमित शाह के इस ऐलान के बाद विपक्षी दलों, विशेषकर समाजवादी पार्टी (SP) और कांग्रेस की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। विपक्ष का आरोप है कि भाजपा वास्तविक मुद्दों (जैसे रोजगार, महंगाई और विकास) से ध्यान भटकाने और चुनावी ध्रुवीकरण के लिए UCC का मुद्दा उठा रही है।
वहीं, सत्तारूढ़ भाजपा का तर्क है कि UCC देश के संविधान निर्माताओं का सपना था और यह कानून के समक्ष समानता (Equality before Law) और महिला सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1: क्या UCC लागू होने से धार्मिक रीति-रिवाजों पर रोक लगेगी?
उत्तर: नहीं, UCC केवल विवाह, तलाक, संपत्ति और गोद लेने जैसे नागरिक एवं प्रशासनिक मामलों को नियंत्रित करता है। यह किसी भी नागरिक की धार्मिक पूजा-पद्धति या रीति-रिवाजों में हस्तक्षेप नहीं करता।
Q2: क्या भारतीय संविधान में UCC का उल्लेख है?
उत्तर: हाँ, भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 (राज्य के नीति निदेशक तत्व) में कहा गया है कि राज्य पूरे भारत में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता सुरक्षित करने का प्रयास करेगा।
Q3: उत्तर प्रदेश में UCC कब तक लागू हो सकता है?
उत्तर: अमित शाह की घोषणा के अनुसार, यदि 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा पुनः सत्ता में आती है, तो नई सरकार के गठन के बाद विधायी प्रक्रिया पूरी कर इसे लागू किया जाएगा।
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अस्वीकरण (Disclaimer)
यह लेख उत्तर प्रदेश की वर्तमान राजनीतिक गतिविधियों, सार्वजनिक बयानों और संवैधानिक प्रावधानों के विश्लेषण पर आधारित है। UCC के अंतिम नियम और प्रभाव राज्य सरकार द्वारा तैयार किए जाने वाले आधिकारिक कानूनी मसौदे (Draft) और विधानसभा की प्रक्रिया पर निर्भर करेंगे।

