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तीन दिन और बढ़ी हेमंत सोरेन की हिरासत अवधि

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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रांची. पीएमएलए अदालत ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की रिमांड तीन दिन और बढ़ा दी है। इससे पहले सात फरवरी को रांची की विशेष पीएमएलए कोर्ट ने उनकी हिरासत पांच दिन के लिए बढ़ाई थी। बता दें कि 31 जनवरी को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सात घंटे की पूछताछ के बाद झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन को गिरफ्तार कर लिया था। इससे पहले सोरेन को ईडी की हिरासत में राज्यपाल से मिलकर सीएम पद से इस्तीफा देना पड़ा था।

इससे पहले हेमंत सोरेन की तरफ से प्रवर्तन निदेशालय के अफसरों के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट में दर्ज एफआईआर को लेकर एजेंसी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। ईडी ने सोरेन के केस दर्ज कराने के फैसले को चुनौती दी है। बताया गया है कि एजेंसी ने इस मामले में झारखंड हाईकोर्ट में तीन फरवरी को याचिका दायर की थी।

क्या है मामला?

गौरतलब है कि हाल ही में ईडी की टीमों ने हेमंत सोरेन के दिल्ली स्थित आवास पर छापेमारी की थी। इसी के बाद सोरेन ने रांची पुलिस से ईडी अधिकारियों के खिलाफ शिकायत की और एफआईआर दर्ज कराई गई। बता दें कि सोरेन के दिल्ली आवास में छापेमारी के बाद ईडी ने भारी मात्रा में बंगले से नकदी बरामद की थी। ईडी के अधिकारियों ने बताया था कि हेमंत सोरेन के बंगले से 36 लाख रुपये नकद बरामद किए गए, साथ ही दो लग्जरी कार भी जब्त की गईं।

ईडी का दावा- रांची में सोरेन के पास 8.5 एकड़ भूखंड

इस बीच ईडी ने विशेष अदालत को बताया कि सोरेन के पास रांची में एक दूसरे से सटे 12 भूखंड हैं जिनका माप कुल 8.5 एकड़ है। इन पर सोरेन का अवैध कब्जा है और वह उनका उपयोग करते हैं और उन्होंने यह जानकारी छिपा कर भी रखी थी। एजेंसी ने कहा कि ये भूखंड मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत अपराध की आय है।

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राज्य सरकार के कर्मचारी और राजस्व विभाग में सब इंस्पेक्टर भानू प्रताप प्रसाद के खिलाफ राज्य के विभिन्न ठिकानों पर छापेमारी में संपत्तियों के दस्तावेज मिले थे। इससे पता चला कि प्रसाद अन्य लोगों के साथ मिलकर संपत्तियों को अवैध रूप से हासिल करने की साजिश में शामिल था, इसमें हेमंत सोरेन द्वारा हासिल की गई संपत्तियां भी शामिल हैं। प्रसाद के मोबाइल फोन में भी इसके विवरण मिले थे।

साभार : अमर उजाला

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।