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केजरीवाल को नहीं याद, कहा है शराब नीति के समय का मोबाइल

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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नई दिल्ली. द‍िल्‍ली की आबकारी नीति को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है. सूत्रों के हवाले से पता चला है ज‍िस समय नई आबकारी नीत‍ि 2021 को तैयार क‍िया जा रहा था उस समय जो फोन मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल इस्तेमाल कर रहे थे, वो फोन गायब हो गया है. सूत्रों ने बताया क‍ि आबकारी नीत‍ि में कथ‍ित घोटाले की जांच को लेकर ED के अधिकारियों ने सीएम केजरीवाल से पूछताछ के दौरान उनसे उस समय यूज क‍िया गया फोन मांगा. उन्‍होंने ईडी अफसरों से फोन नहीं होने की बात कही.

ईडी ने करीब 4 घंटे तक क‍िए सवाल जवाब

ईडी की पूछताछ में आम आदमी पार्टी के राष्‍ट्रीय संयोजक अरव‍िंद केजरीवाल ने कहा कि उनको नहीं पता क‍ि उनका फोन कहां गया. सूत्रों की माने तो अरव‍िंद केजरीवाल से रव‍िवार (24 मार्च, 2024) को भी करीब 4 घंटे सवाल जवाब क‍िए गए. इतना ही नहीं ED ने जेल में आज रव‍िवार को समीर महेंद्रू का बयान भी दर्ज किया है.

मंगलवार को हो सकती है सी अरव‍िंद के सामने ब‍िठाकर पूछताछ

इसके अलावा सूत्रों ने बताया कि मंगलवार (26 मार्च, 2024) को अरव‍िंद केजरीवाल से पूर्व ड‍िप्‍टी सीएम मनीष सिसोदिया के सचिव रहे सी अरविंद के सामने बिठाकर पूछताछ हो सकती है. मनीष सिसोदिया और के कविता ने भी ED को यही बताया था कि आबकारी नीति बनने के समय इस्तेमाल फोन उनके पास नहीं हैं.

सबूत मिटाने के लिए मोबाइल फोन किए गए नष्ट

सूत्र बताते हैं क‍ि ED को लगता है कि सबूत मिटाने के लिए मोबाइल फोन नष्ट किए गए हैं. वहीं, द‍िल्‍ली के मुख्‍यमंत्री केजरीवाल को कोई कंप्यूटर नहीं दिया गया जिससे किसी कागज पर कुछ टाइप हुआ हो. ना ही कोई ऐसा कागज दिया गया जिसे दिखाया गया है. ईडी मुख्‍यालय की ओर से उनको ना कोई कंप्यूटर और न ही कोई पेपर दिया गया है.

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जल संकट समाधान के आदेश देने की जांच कर रहे

सूत्र बताते हैं क‍ि अरव‍िंद केजरीवाल की पत्‍नी सुनीता केजरीवाल ने कल शन‍िवार (23 मार्च) को ईडी मुख्‍यालय में उनसे मुलाकात की थी. इस मामले में आगे की जांच कर रहे हैं. आध‍िकार‍िक सूत्रों का कहना है क‍ि दावा किया जा रहा है क‍ि सीएम केजरीवाल ने ईडी HQ से जल संकट के समाधान के आदेश दिए थे, ये गलत है. हम मामले की जांच करवा रहे हैं.

साभार : एबीपी न्यूज़

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।