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पेटीएम में हिस्सेदारी खरीद सकते हैं गौतम अडानी, चल रही है बातचीत

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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मुंबई. पेटीएम (Paytm) की पैरेंट कंपनी, वन 97 कम्‍युनिकेशंस में हिस्‍सेदारी खरीदने को अडानी ग्रुप (Adani group) पूरा जोर लगा रहा है. अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी (Gautam Adani) और पेटीएम के संस्‍थापक सीईओ विजय शेखर शर्मा (Vijay Shekhar Sharma) की मुलाकात होने की खबरें भी आ रही हैं. सूत्रों का कहना है कि यह मीटिंग अहमदाबाद में हुई है, जिसमें डील को फाइनल करने को लेकर महत्‍वपूर्ण बातचीत हुई है. अगर अडानी ग्रुप पेटीएम में हिस्‍सेदारी खरीदने में कामयाब हो जाता है तो फिर ग्रुप फिनटेक क्षेत्र में गूगलपे और फोनपे को टक्‍कर देता नजर आएगा.

सूत्रों ने बताया कि अडानी और शर्मा के बीच पिछले कुछ समय से चर्चा चल रही है. अडानी ग्रुप पश्चिम एशिया के फंडों से भी बातचीत कर रहा है, ताकि उन्हें वन 97 में निवेशक के रूप में लाया जा सके, जिसने देश में मोबाइल पेमेंट में अग्रणी भूमिका निभाई है. 2007 में शर्मा द्वारा स्थापित वन 97, जिसका आईपीओ देश में दूसरा सबसे बड़ा था.

NDTV के बाद होगी यह चर्चित डील
गौरतलब है कि भारतीय रिजर्व बैंक के पेटीएम पेमेंट्स बैंक पर प्रतिबंध लगाने के बाद से ही पेटीएम मुश्किलों में घिरा है. वहीं, अगर पेटीएम डील सिरे चढती है तो अंबुजा सीमेंट्स और एनडीटीवी के बाद अडानी अडानी ग्रुप की यह महत्वपूर्ण खरीद होगी. एनडीटीवी की खरीद काफी चर्चा में रही थी.

पेटीएम में किसके पास कितनी हिस्‍सेदारी
विजय शेखर शर्मा के पास वन 97 में 19 फीसद हिस्सेदारी है, जिसकी कीमत मंगलवार को पेटीएम शेयर के 342 रुपये प्रति शेयर के बंद भाव के हिसाब से 4,218 करोड़ रुपये है. शर्माके पास पेटीएम में सीधे 9 फीसदी हिस्सेदारी है और एक विदेशी फर्म रेसिलिएंटएं एसेट मैनेजमेंट के जरिए 10 फीसदी हिस्सेदारी है. वन 97 द्वारा स्टॉक एक्सचेंजों में दाखिल किए गए दस्तावेजों के अनुसार शर्मा और रेसिलिएंटएं दोनों ही पब्लिक शेयरहोल्डर के रूप में लिस्टेड हैं. वन 97 के अन्य महत्वपूर्ण शेयरधारकों निजी इक्विटी फंड सैफ पार्टनर्स (15%), जैक मा द्वारा स्थापित एंटएं फिन नीदरलैंड (10%) और कंपनी के निदेशक (9%) हैं.

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सेबी के नियमों के अनुसार किसी टार्गेटेड कंपनी में 25 फीसदी से कम हिस्सेदारी रखनेवाले अधिग्रहणकर्ता को कंपनी की न्यूनतम 26 फीसदी हिस्सेदारी के लिए ओपन ऑफर देना होता है. अधिग्रहणकर्ता कंपनी की पूरी शेयर कैपिटल के लिए भी ओपन ऑफर दे सकता है.

साभार : न्यूज18

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।